16 जुलाई 2026
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अमेरिका-ईरान संघर्ष: अमेरिकी सेना ने 90 मिनट तक ईरानी सैन्य ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, IRGC का जवाबी हमला

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अमेरिका-ईरान संघर्ष: अमेरिकी सेना ने 90 मिनट तक ईरानी सैन्य ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, IRGC का जवाबी हमला

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज़ हो गया है — अमेरिकी सेना ने 90 मिनट में ईरानी तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए, तो IRGC ने बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी बेसों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की यह लड़ाई वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन रही है।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 16 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने बुधवार दोपहर 3 बजे (स्थानीय समय) ईरान पर हमलों की दूसरी लहर शुरू की जो 90 मिनट तक जारी रही।
ग्रेटर टुंब आइलैंड पर तटीय रक्षा प्रणालियाँ और क्रूज मिसाइल भंडारण-लॉन्च साइट्स निशाने पर रहीं।
IRGC ने जॉर्डन के अल-अजराक और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया; F-15, F-16, F-35 और MQ-9 ड्रोन तबाह होने का दावा — स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने दिसंबर 2024 से हिरासत में एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है।
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकाबंदी फिर से सक्रिय की; इससे पहले मंगलवार को 7 घंटे तक हमले हो चुके थे।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 16 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने बुधवार दोपहर 3 बजे (स्थानीय समय) ईरान के विरुद्ध हमलों की दूसरी लहर शुरू की, जो लगातार 90 मिनट तक जारी रही। इन हमलों में ग्रेटर टुंब आइलैंड पर स्थित तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइल भंडारण एवं लॉन्च साइट्स को सटीक निशाना बनाया गया।

हमलों का क्रम और लक्ष्य

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा, 'हमले ईरानी सैन्य क्षमताओं को टारगेट कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया जाता है।' इससे पहले मंगलवार देर रात अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट और ईरानी तटीय इलाकों के पास मिसाइल-ड्रोन साइट्स, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों सहित दर्जनों सैन्य ठिकानों पर सात घंटे तक हमले किए थे।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से सक्रिय कर दी है और हिंद महासागर में अपने नौसैनिक बल तैनात किए हैं — एक कदम जिसे ईरान ने अपने जवाबी हमलों की वजह बताया।

ईरान का जवाबी हमला

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को कहा कि उसने बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया।

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, इन हमलों में वे शेल्टर तबाह हो गए जिनमें कथित तौर पर अमेरिकी F-15, F-16 और F-35 फाइटर जेट तथा MQ-9 रणनीतिक ड्रोन तैनात थे। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

IRGC की नौसेना ने बहरीन में अमेरिका के पाँचवें फ्लीट की सुविधाओं पर भी हमला करने का दावा किया, जिसमें NSI मैनेजमेंट सेंटर, बड़े वेयरहाउस, कमांड-कंट्रोल सेंटर और ईंधन भंडारण सुविधाएँ कथित तौर पर निशाने पर रहीं।

ईरान की जॉर्डन से अपील

IRGC ने जॉर्डन के नागरिकों से अपने देश में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति समाप्त करने की अपील की। ईरान ने कहा कि जॉर्डन को अपनी धरती को 'इस्लामी देशों और फिलिस्तीनी लोगों के विरुद्ध हमलों के लॉन्चपैड' के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। यह अपील क्षेत्रीय देशों को अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग से अलग करने की ईरान की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

ट्रम्प का बयान और बंधक रिहाई

इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने एक अमेरिकी नागरिक को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है, जिसे दिसंबर 2024 में जो बाइडेन के कार्यकाल में 'गलत तरीके से' हिरासत में लिया गया था। ट्रम्प ने कहा कि वह नागरिक 'सुरक्षित रूप से ईरान से बाहर है और अच्छी हालत में है' तथा संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के इस कदम की 'सराहना करता है।' गौरतलब है कि यह बयान उसी दिन आया जब दोनों देशों के बीच सैन्य हमलों का दौर जारी था — जो कूटनीतिक और सैन्य मोर्चों पर एक साथ चल रहे दोहरे खेल की ओर संकेत करता है।

आगे क्या

होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर यह संघर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों पक्षों के जवाबी हमलों का यह चक्र तब तक थमने की संभावना कम है जब तक किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का हस्तक्षेप न हो। भारत सहित खाड़ी क्षेत्र में हितों वाले देश इस स्थिति पर बारीक नज़र रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए सबसे बड़ा तात्कालिक जोखिम है, और भारत — जो खाड़ी से अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है — इस संकट का मूक भुक्तभोगी बन सकता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान पर 90 मिनट का हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये हमले उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को नष्ट करने के लिए किए गए जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया जाता है। यह हमलों की दूसरी लहर थी; इससे पहले मंगलवार को 7 घंटे तक हमले हो चुके थे।
IRGC ने किन अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने का दावा किया?
IRGC ने जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सैन्य बेस और बहरीन में अमेरिका के पाँचवें फ्लीट की सुविधाओं पर हमले का दावा किया। IRNA के अनुसार, F-15, F-16, F-35 फाइटर जेट और MQ-9 ड्रोन तबाह हुए — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट इस संघर्ष में इतना अहम क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है। अमेरिका ने यहाँ नौसैनिक नाकाबंदी सक्रिय की है, जिसे ईरान ने अपने जवाबी हमलों की वजह बताया है।
ट्रम्प ने ईरान द्वारा अमेरिकी नागरिक की रिहाई पर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने दिसंबर 2024 से हिरासत में रखे एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है और वह 'सुरक्षित व अच्छी हालत में' है। ट्रम्प ने इसे ईरान का 'अच्छी मंशा से किया गया काम' बताया।
इस संघर्ष का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है और होर्मुज स्ट्रेट इस आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। नाकाबंदी या लंबे संघर्ष की स्थिति में भारत को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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