चेन्नई प्रॉपर्टी टैक्स की अंतिम तारीख 31 जुलाई तक बढ़ी, 7.25 लाख मालिकों ने अब तक नहीं चुकाया
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने 16 जुलाई 2026 को विशेष प्रॉपर्टी टैक्स संग्रह अभियान की समय सीमा 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है, क्योंकि शहर के 14.23 लाख आकलित संपत्ति मालिकों में से 7.25 लाख — यानी लगभग आधे — ने अभी तक अपना टैक्स जमा नहीं किया है। पहले यह अभियान 17 जुलाई को समाप्त होना था, लेकिन बड़े पैमाने पर बकाया और राजस्व संग्रह की ज़रूरत को देखते हुए निगम ने यह निर्णय लिया।
अभियान का विस्तार क्यों किया गया
निगम अधिकारियों के अनुसार, 3 जुलाई से शुरू हुए विशेष शिविरों के ज़रिए 15 जुलाई तक केवल ₹96 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स एकत्र किया जा सका। इस अवधि में 6.98 लाख संपत्ति मालिकों ने भुगतान किया, जबकि 7.25 लाख बकायेदार अभी भी शेष हैं। राजस्व में यह अंतर पाटने के लिए अभियान को दो सप्ताह और आगे बढ़ाया गया है।
शिविर कहाँ और कैसे
विशेष टैक्स संग्रह शिविर चेन्नई के सभी 15 जोन में लगाए गए हैं। निगम कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्र में जाकर नागरिकों को जागरूक करें और उन्हें 31 जुलाई से पहले टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा नागरिक GCC के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी घर बैठे भुगतान कर सकते हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स का महत्व
प्रॉपर्टी टैक्स ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के राजस्व के सबसे प्रमुख स्रोतों में से एक है, जिससे हर वर्ष लगभग ₹1,800 करोड़ की आय होती है। यह राशि ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, पार्कों की देखभाल और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च की जाती है।
आम नागरिकों पर असर
निगम ने स्पष्ट किया है कि 31 जुलाई के बाद भुगतान करने पर बकायेदार संपत्ति मालिकों पर अतिरिक्त ब्याज और वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारियों ने अपील की है कि सभी बकायेदार समय सीमा से पहले टैक्स जमा कर इस अतिरिक्त बोझ से बचें। गौरतलब है कि समय पर राजस्व संग्रह न होने से शहर की बुनियादी सेवाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा
यदि 31 जुलाई तक भी पर्याप्त राजस्व एकत्र नहीं हुआ, तो निगम डिफॉल्टरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी निकाय अपने वित्तीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और केंद्र व राज्य सरकार की अनुदान-निर्भरता घटाने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोतों को मज़बूत करने पर ज़ोर दे रहे हैं।