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क्या माकपा चेन्नई में लंबे समय से रह रहे परिवारों को मकान पट्टा दिलाने में सफल होगी?

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क्या माकपा चेन्नई में लंबे समय से रह रहे परिवारों को मकान पट्टा दिलाने में सफल होगी?

सारांश

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने 16 दिसंबर को चेन्नई में जन–मोबिलाइजेशन की योजना बनाई है। यह आंदोलन उन परिवारों के लिए है जो दशकों से शहर में रह रहे हैं लेकिन आज तक कानूनी स्वामित्व दस्तावेज नहीं प्राप्त कर पाए हैं। क्या यह आंदोलन उनके अधिकारों की रक्षा करेगा?

मुख्य बातें

माकपा का आंदोलन 16 दिसंबर को होगा।
लंबे समय से रह रहे परिवारों को पट्टा दिलाने का लक्ष्य।
कानूनी स्वामित्व दस्तावेज की कमी की समस्या।
अनुसूचित जाति समुदाय विशेष रूप से प्रभावित।
मार्च का समापन मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के साथ होगा।

चेन्नई, 11 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने घोषणा की है कि वह 16 दिसंबर को चेन्नई में व्यापक जन–मोबिलाइजेशन आयोजित करेगी। इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य उन शहरी परिवारों को मकान पट्टा दिलाना है, जो दशकों से शहर में निवास कर रहे हैं लेकिन कानूनी स्वामित्व दस्तावेज हासिल नहीं कर पाए हैं।

गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि चेन्नई और इसके उपनगरीय क्षेत्रों में लगभग एक-तिहाई घरों के पास अब भी पट्टा नहीं है, जबकि ये परिवार कई वर्षों से यहां स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई सरकारों ने नियमितीकरण योजनाओं की घोषणा की है, लेकिन गरीब और कामकाजी वर्ग के लोग आज भी अपनी भूमि के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

शनमुगम ने कहा कि तेज और अव्यवस्थित शहरीकरण के कारण कई पुरानी जलाशयों और खाली पड़ी ज़मीन पर आवासीय बस्तियां विकसित हो गई हैं। कई मामलों में, सरकार ने स्वयं लोगों को पोरंबोक ज़मीन पर बसाया और इसके बाद वहां नागरिक सुविधाएं जैसे सड़क, पेयजल, ड्रेनेज, बिजली, स्कूल और राशन दुकानें उपलब्ध कराई। कई क्षेत्रों में वर्षों से प्रॉपर्टी टैक्स भी लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इसके बावजूद निवासियों को आज भी अतिक्रमणकारी कहा जाता है। उन्हें पट्टा देने से इनकार किया जाता है यह कहकर कि ज़मीन जल-संरक्षण क्षेत्र, सरकारी स्वामित्व, रेलवे भूमि या ट्रस्ट की संपत्ति में आती है। यह स्थिति शहरी गरीब परिवारों के लिए अत्यंत अन्यायपूर्ण है।”

माकपा नेता ने बताया कि चेन्नई के केंद्रीय क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जाति समुदाय विशेष रूप से असुरक्षित हैं और सुंदरकरण परियोजनाओं के नाम पर लगातार विस्थापन का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कन्नगी नगर और सेम्मनचेरी में पुनर्वासित निवासियों की समस्याओं का उल्लेख किया, जहां सेवाएं अब भी अपर्याप्त हैं और पुनर्वास से संबंधित कई वादे अधूरे हैं।

पार्टी ने अपनी मांगों का विस्तृत चार्टर भी जारी किया है, जिसमें पूरे तमिलनाडु में भूमि का पुनः सर्वेक्षण, सरकारी और निजी जमीन पर लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को पट्टा जारी करना, हाउसिंग बोर्ड और स्लम क्लीयरेंस बोर्ड के आवंटियों को सेल डीड और नामांतरण की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है।

शनमुगम ने कहा, “इन मांगों के समर्थन में 16 दिसंबर को स्वामी शिवानंद सलाई पर एक लाख लोगों के साथ मार्च निकाला जाएगा। मार्च के अंत में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।” उन्होंने इस अभियान को “सम्मान, न्याय और सभी के लिए सुरक्षित आवास की लड़ाई” बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि शहरी गरीबों की समस्याओं को सुलझाया जा सके।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माकपा का आंदोलन कब है?
माकपा का आंदोलन 16 दिसंबर को चेन्नई में आयोजित किया जाएगा।
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन शहरी परिवारों को मकान पट्टा दिलाना है जो दशकों से शहर में रह रहे हैं।
क्या माकपा ने कोई विशेष मांगें रखी हैं?
हां, माकपा ने भूमि का पुनः सर्वेक्षण और निवासियों को पट्टा जारी करने की मांग की है।
इस आंदोलन से क्या उम्मीद की जा सकती है?
इस आंदोलन से उन परिवारों के अधिकारों की रक्षा की उम्मीद की जा रही है, जो वर्षों से कानूनी स्वामित्व के बिना रह रहे हैं।
क्या यह आंदोलन राजनीतिक है?
यह आंदोलन निश्चित रूप से राजनीतिक है, क्योंकि यह शहरी गरीबों के अधिकारों की बात करता है।
राष्ट्र प्रेस
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