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ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक चार महीने बाद आज, 28 प्रस्ताव और नागरिक मुद्दे एजेंडे पर

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ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक चार महीने बाद आज, 28 प्रस्ताव और नागरिक मुद्दे एजेंडे पर

सारांश

चार महीने की चुप्पी के बाद ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल आज बैठती है — एजेंडे में 28 प्रस्ताव, अनसुलझी नागरिक समस्याएँ और टीवीके में दलबदल का राजनीतिक उफान। यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक नहीं, चेन्नई की स्थानीय राजनीति का नया अध्याय भी है।

मुख्य बातें

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) काउंसिल की बैठक 24 जून को चार महीने के अंतराल के बाद हो रही है।
काउंसिल के सामने 28 प्रस्ताव रखे जाएंगे; 12 पार्षदों ने चर्चा के लिए सवाल जमा किए हैं।
एआईएडीएमके और एएमएमके के 4 पार्षद कथित तौर पर सत्ताधारी दल टीवीके में शामिल हो चुके हैं।
काउंसिल में डीएमके का 153 सदस्यों के साथ बहुमत बरकरार है।
बिजली कटौती, अधूरे स्टॉर्मवॉटर ड्रेन, सड़क मरम्मत और अनियमित पेयजल आपूर्ति प्रमुख नागरिक मुद्दे हैं।
चुनाव आचार संहिता 6 मई को हटने के बावजूद बैठक में देरी पर कई पार्षदों ने सवाल उठाए।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) काउंसिल की बैठक बुधवार, 24 जून को चार महीने के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है — विधानसभा चुनावों और आचार संहिता लागू रहने के कारण यह बैठक इतने लंबे समय से टली हुई थी। काउंसिल के सामने 28 प्रस्ताव रखे जाएंगे और 12 पार्षदों ने चर्चा के लिए सवाल जमा किए हैं।

मुख्य एजेंडा और नागरिक मुद्दे

आम नागरिकों की नजर इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि लंबे समय से कई बुनियादी समस्याएँ अनसुलझी पड़ी हैं। वार्ड 4 से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पार्षद आर. जयरामन ने बताया कि निवासियों ने बार-बार शिकायत की है — रात में अक्सर बिजली गुल हो जाती है, तूफानी पानी की निकासी (स्टॉर्मवॉटर ड्रेन) का काम अधूरा है, सड़कों की मरम्मत अपर्याप्त है और टैंकर सेवाओं के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति अनियमित बनी हुई है।

जयरामन ने कहा कि चार महीने बैठक न होने से पार्षदों के पास जनहित के मुद्दे उठाने के अवसर ही नहीं बचे थे।

राजनीतिक हलचल: टीवीके और दलबदल पर नजर

इस बैठक में राजनीतिक दृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। खबरों के अनुसार, हाल के महीनों में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (एएमएमके) के चार पार्षद सत्ताधारी दल तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) में शामिल हो चुके हैं।

यह भी चर्चा है कि काउंसिल हॉल में मुख्यमंत्री चंद्रशेखर जोसेफ विजय की तस्वीर लगाने का मुद्दा उठ सकता है — टीवीके के सत्ता में आने के बाद से कई स्थानीय निकायों में इस विषय पर विचार-विमर्श चल रहा है। हालाँकि, कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक किसी पार्षद के दल-बदल की कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। मौजूदा नियमों के तहत, पार्टी बदलने वाले पार्षद तब तक अयोग्य नहीं होते जब तक पार्षद और संबंधित पार्टी दोनों की ओर से आवश्यक सूचना न दी जाए।

काउंसिल में दलीय समीकरण

काउंसिल में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) का दबदबा बना हुआ है — पार्टी के 153 सदस्य हैं। टीवीके को सहयोगियों का भी समर्थन प्राप्त है, जिनमें कांग्रेस के 13 सदस्य, विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के 4 सदस्य, सीपीआई(एम) और सीपीआई के 2-2 सदस्य तथा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का 1 सदस्य शामिल है।

पार्षदों की आलोचना और यातायात विवाद

डीएमके पार्षद और टोंडियारपेट जोनल चेयरमैन नेताजी यू. गणेशन ने उत्तरी चेन्नई में रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर लंबे समय से अटके रोड ओवरब्रिज का काम शुरू होने का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने स्थानीय पार्षदों से परामर्श किए बिना वैद्यनाथन ब्रिज और आर.के. नगर जंक्शन के बीच ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने के लिए नागरिक प्रशासन और पुलिस की आलोचना की। उनके अनुसार, इस कदम से सुबह के व्यस्त समय में भारी जाम की स्थिति बन गई और वे बैठक में वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत करने की योजना बना रहे हैं।

वलासरवक्कम जोनल चेयरमैन वी. राजन ने भी बैठक बुलाने में हुई देरी पर सवाल उठाए और कहा कि चुनाव आचार संहिता 6 मई को ही हटा ली गई थी, फिर भी काउंसिल की बैठक इतनी देर से बुलाई गई।

आगे क्या होगा

यह बैठक चेन्नई के नागरिक प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है — जहाँ एक ओर लंबित नागरिक समस्याओं पर निर्णय अपेक्षित हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पुनर्संरेखण के संकेत भी स्पष्ट हैं। बैठक में लिए गए निर्णय और उठाए गए मुद्दे आने वाले महीनों में जीसीसी की कार्यशैली की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बैठक डेढ़ महीने बाद बुलाई गई — यह अंतराल उन निवासियों के लिए महँगा रहा जो बिजली कटौती और अधूरी नालियों से जूझते रहे। टीवीके में दलबदल और मुख्यमंत्री की तस्वीर का मुद्दा दर्शाता है कि स्थानीय निकाय तेजी से राज्य की राजनीति के विस्तार बन रहे हैं — और नागरिक सेवाएँ इस राजनीतिक खींचतान में पीछे छूट सकती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक चार महीने से क्यों नहीं हुई?
विधानसभा चुनावों और चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण जीसीसी काउंसिल की बैठक चार महीने तक नहीं हो सकी। आचार संहिता 6 मई को हटाई गई और बैठक 24 जून को बुलाई गई।
24 जून की जीसीसी काउंसिल बैठक में क्या-क्या एजेंडे पर है?
काउंसिल के सामने 28 प्रस्ताव रखे जाएंगे और 12 पार्षदों ने चर्चा के लिए सवाल जमा किए हैं। नागरिक मुद्दों में बिजली कटौती, अधूरे स्टॉर्मवॉटर ड्रेन, सड़क मरम्मत और अनियमित पेयजल आपूर्ति प्रमुख हैं।
टीवीके में पार्षदों के दलबदल का काउंसिल पर क्या असर होगा?
खबरों के अनुसार एआईएडीएमके और एएमएमके के चार पार्षद टीवीके में शामिल हो चुके हैं, हालाँकि कॉर्पोरेशन को अभी तक कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। मौजूदा नियमों के तहत, आवश्यक सूचना दिए बिना पार्षद अयोग्य नहीं होते।
जीसीसी काउंसिल में किस पार्टी का बहुमत है?
डीएमके के 153 सदस्यों के साथ काउंसिल में स्पष्ट बहुमत है। सहयोगी दलों में कांग्रेस के 13, वीसीके के 4, सीपीआई(एम) और सीपीआई के 2-2 तथा आईयूएमएल का 1 सदस्य शामिल है।
उत्तरी चेन्नई में ट्रैफिक डायवर्जन विवाद क्या है?
डीएमके पार्षद नेताजी यू. गणेशन के अनुसार, वैद्यनाथन ब्रिज और आर.के. नगर जंक्शन के बीच स्थानीय पार्षदों से परामर्श किए बिना ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया, जिससे सुबह के व्यस्त समय में भारी जाम की स्थिति बन गई। वे बैठक में वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत करने की योजना बना रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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