चेन्नई प्रॉपर्टी टैक्स विवाद: GCC ने किया स्पष्ट — नई बढ़ोतरी नहीं, 3.5 लाख गलत आकलन वाली संपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) ने 13 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि शहर में प्रॉपर्टी टैक्स में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई है — बल्कि केवल उन 3.5 लाख संपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन किया गया है जिनमें दर्ज निर्माण क्षेत्र और वास्तविक निर्माण क्षेत्र के बीच विसंगति पाई गई थी। निगम आयुक्त जी.एस. समीरन ने कहा कि यह संशोधन केवल उन आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों पर लागू होता है जिनका कर उनके वास्तविक आकार से कम क्षेत्र पर गलत तरीके से निर्धारित किया गया था।
पुनर्मूल्यांकन की पृष्ठभूमि
GCC ने जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट डेटा, सरकारी रिकॉर्ड और संपत्ति मालिकों द्वारा स्वयं दी गई जानकारी की क्रॉस-जाँच की। यह सर्वेक्षण 2018 में स्व-घोषणा विवरण एकत्र किए जाने के बाद शुरू हुआ था, और बाद में उस जानकारी का निगम के मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान किया गया। जाँच में सामने आया कि बड़ी संख्या में संपत्ति मालिक अपने पूरे निर्मित क्षेत्र पर कर नहीं चुका रहे थे — कई मामलों में रिकॉर्ड में वास्तविक से कम क्षेत्र दर्ज था।
गौरतलब है कि एक ही आकार की संपत्तियों पर अलग-अलग कर लगने की शिकायतें लंबे समय से निगम को मिल रही थीं। पुनर्मूल्यांकन का उद्देश्य इन्हीं विसंगतियों को दूर कर समान आकार की संपत्तियों पर एकसमान कर सुनिश्चित करना है।
राजस्व और प्रशासनिक प्रभाव
निगम के अनुसार, इस पुनर्मूल्यांकन से सालाना लगभग ₹170 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह राशि नई दर लागू करने से नहीं, बल्कि उन संपत्तियों के उन हिस्सों पर कर वसूली से आएगी जिनका पहले मूल्यांकन ही नहीं हुआ था।
राजनीतिक विवाद और परिषद की प्रतिक्रिया
बड़ी संख्या में संपत्ति मालिकों द्वारा अपने कर दावों में भारी वृद्धि की शिकायत के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया। उप महापौर मगेष कुमार ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेतृत्व वाली परिषद ने निवासियों पर अतिरिक्त बोझ न डालने के लिए संपत्ति कर की निर्धारित वार्षिक वृद्धि को स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि परिषद ने अपनी पिछली बैठक में आयुक्त से वृद्धि लागू करने के बजाय तमिलनाडु सरकार से ₹2,000 करोड़ का विशेष आवंटन माँगने को कहा था।
मगेष कुमार ने आरोप लगाया कि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया परिषद को सूचित किए बिना की गई। हालाँकि, निगम अधिकारियों ने इस पर सफाई दी कि यह कदम प्रशासनिक आवश्यकता के तहत उठाया गया था, क्योंकि समान आकार की संपत्तियों पर असमान कर को लेकर शिकायतें लगातार आ रही थीं।
आम नागरिकों के लिए राहत और अपील प्रक्रिया
संशोधित मूल्यांकन से असहमत संपत्ति मालिक नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकते हैं। अपीलें संबंधित क्षेत्रीय उपायुक्त को प्रस्तुत की जा सकती हैं या क्षेत्रीय कार्यालयों में जमा की जा सकती हैं। निगम ने आश्वासन दिया है कि आपत्तियों का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाएगा।
बड़ी संख्या में अपीलें आने पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएँगे। निगम की 1913 हेल्पलाइन के संचालकों को भी निर्देश दिया गया है कि वे स्पष्टीकरण चाहने वाले निवासियों को सटीक जानकारी प्रदान करें।
आगे की राह
यह विवाद शहरी निकायों में संपत्ति कर प्रशासन की पारदर्शिता और परिषद-प्रशासन समन्वय पर बड़े सवाल खड़े करता है। GCC का कहना है कि पुनर्मूल्यांकन दीर्घकालिक असमानताओं को दूर करेगा, लेकिन राजनीतिक दबाव और नागरिक असंतोष को देखते हुए निगम को अपनी संचार रणनीति और अपील प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बनाना होगा।