चेन्नई नगर निगम की 90 परियोजनाओं की लागत समीक्षा का आदेश, प्रिंटर खरीद में ₹37.78 लाख की बचत से खुला मामला
सारांश
मुख्य बातें
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के 2026-27 बजट में शामिल 90 परियोजनाओं की अनुमानित लागत का व्यापक पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया है। सरकार की आशंका है कि इन परियोजनाओं के लिए तय की गई राशि वास्तविक बाज़ार दरों से काफी अधिक हो सकती है। यह कदम 21 जुलाई को उस समय सामने आया जब निगम स्कूलों के लिए प्रिंटर खरीद में बड़े पैमाने पर लागत-अंतर उजागर हुआ।
प्रिंटर खरीद से खुला लागत-फुलाव का द्वार
निगम के बजट में 100 स्कूलों के लिए प्रिंटर खरीदने हेतु ₹60 लाख का प्रावधान किया गया था। TVK सरकार के सत्ता में आने के बाद यही खरीद प्रक्रिया मात्र ₹22.12 लाख में पूरी कर ली गई — यानी ₹37.78 लाख की सीधी बचत। अनुमानित और वास्तविक लागत के बीच इस लगभग 63% के अंतर ने सरकार को बजट की शेष परियोजनाओं की भी छानबीन करने पर मजबूर कर दिया।
समीक्षा का दायरा और उद्देश्य
रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों को सभी 90 परियोजनाओं की लागत का दोबारा आकलन करने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक परियोजना की अलग-अलग जाँच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि मूल वित्तीय अनुमान मौजूदा बाज़ार दरों के अनुरूप थे या नहीं। सरकार का कहना है कि आगे किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले मूल अनुमानों की उचितता सुनिश्चित की जाएगी।
बजट का वित्तीय ढाँचा
फरवरी 2026 में पेश किए गए ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के बजट में ₹7,717 करोड़ की आय और ₹9,319 करोड़ के खर्च का अनुमान था, जिससे ₹1,602 करोड़ का राजकोषीय घाटा सामने आया। इसके अलावा, निगम विश्व बैंक और जापान डेवलपमेंट बैंक सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से लिए गए लगभग ₹2,000 करोड़ के ऋण पर प्रतिवर्ष ₹95.20 करोड़ ब्याज चुका रहा है। ऐसे में लागत-अनुशासन की यह समीक्षा वित्तीय दृष्टि से और भी अहम हो जाती है।
प्रमुख परियोजनाएँ जो समीक्षा के दायरे में
बजट में घोषित बड़ी परियोजनाओं में निगम स्कूलों के आसपास 50 किलोमीटर लंबे सुरक्षित कॉरिडोर के लिए ₹200 करोड़, 30 जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए ₹100 करोड़, 60 पार्कों के वैज्ञानिक नवीनीकरण के लिए ₹60 करोड़ और शहर के जलमार्गों के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवारों के लिए ₹55 करोड़ शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की लागत अब जाँच के दायरे में आ गई है।
मेयर और आगे की राह
यह घटनाक्रम चेन्नई की मेयर आर. प्रिया के लिए नई प्रशासनिक चुनौती बन सकता है, क्योंकि समीक्षा के दायरे में आई परियोजनाएँ पिछली सरकार के कार्यकाल में तैयार बजट का हिस्सा थीं। यदि लागत अनुमानों में बड़े बदलाव होते हैं तो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, फंड आवंटन और समय-सीमा पर सीधा असर पड़ सकता है। समीक्षा के नतीजे तय करेंगे कि ये परियोजनाएँ संशोधित अनुमानों के साथ आगे बढ़ेंगी या नहीं।