चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल बैठक में DMK-AIADMK टकराव, सभी 38 प्रस्ताव पारित
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) काउंसिल की 24 जून 2026 को आयोजित पहली बैठक — तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद — उस समय हंगामेदार हो गई जब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक ने रिपन बिल्डिंग की कार्यवाही को कुछ समय के लिए बाधित कर दिया। बावजूद इसके, परिषद ने अपना पूरा एजेंडा निपटाते हुए सभी 38 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
बैठक का माहौल और सुरक्षा व्यवस्था
बैठक की अध्यक्षता मेयर आर. प्रिया ने की, जिसमें कॉर्पोरेशन कमिश्नर जी.एस. समीरन और डिप्टी मेयर एम. महेश कुमार भी उपस्थित रहे। राजनीतिक सरगर्मी को देखते हुए कॉर्पोरेशन मुख्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
सत्र के शुरुआती दौर में ध्यान काउंसिल हॉल में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तस्वीरों के एक साथ प्रदर्शन पर केंद्रित रहा। मौजूदा टीवीके-नीत सरकार और पिछली DMK सरकार, दोनों के नेताओं की तस्वीरों का एक ही मंच पर होना चर्चा का विषय बन गया।
मुख्य घटनाक्रम और विवाद की जड़
DMK पार्षद चित्ररासु और अन्य सदस्यों ने मौजूदा सरकारी आदेश का हवाला देते हुए जोनल कमेटी की बैठक वाले हॉल में एम.के. स्टालिन की तस्वीरें लगाने की माँग रखी।
AIADMK के फ्लोर लीडर सतीश कुमार ने अपने वार्ड के रिहायशी इलाके 'वर्मा कॉलोनी' में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया, जहाँ लगभग 2,000 लोग रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाता होने के बावजूद इस इलाके को नज़रअंदाज़ किया गया और कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ।
तनाव उस समय चरम पर पहुँचा जब जोनल कमेटी के चेयरमैन रविचंद्रन इस मुद्दे पर बोलने के लिए उठे। खबरों के अनुसार, सतीश कुमार ने उनसे अपनी सीट पर बैठे रहने को कहा, जिस पर DMK पार्षद कवि गणेशन ने कड़ी आपत्ति जताई। देखते ही देखते बहस तेज़ हो गई और दोनों दलों के पार्षद इसमें कूद पड़े।
नागरिक मुद्दे और प्रशासनिक माँगें
मनाली जोनल कमेटी के चेयरमैन ए.वी. अरुमुगम ने कॉर्पोरेशन से आग्रह किया कि थंडुवाडी में खाली पड़ी नागरिक ज़मीन को वापस पाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाए। यह ज़मीन पहले चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) को लॉरी पार्किंग सुविधा के उपयोग के लिए सौंपी गई थी।
वर्मा कॉलोनी के मुद्दे पर मेयर प्रिया ने स्पष्ट किया कि यह इलाका अतिक्रमण वाले ज़ोन में आता है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा करना कठिन हो जाता है। उन्होंने काउंसिल को आश्वस्त किया कि अधिकारी क्षेत्र का मुआयना कर रिपोर्ट सौंपेंगे।
मेयर का स्पष्टीकरण और आगे की राह
हंगामे के बीच मेयर प्रिया ने प्रक्रियागत स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जोनल समिति के अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की देखरेख करते हैं, वहीं विधायक भी जोनल बैठकों में भाग लेने, निर्वाचन क्षेत्र की परियोजनाओं पर चर्चा करने और समिति के अध्यक्षों के साथ मंच साझा करने के अधिकारी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सत्ता-परिवर्तन के बाद स्थानीय निकायों में राजनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि GCC काउंसिल की यह पहली बैठक थी, और राजनीतिक तनाव के बावजूद परिषद ने अपना पूरा एजेंडा पूरा करते हुए सभी 38 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया — जो आने वाले सत्रों के लिए एक मिली-जुली शुरुआत कही जा सकती है।