चेन्नई बाढ़ रोकथाम: ₹3,059 करोड़ की परियोजनाएं अंतिम चरण में, अधूरे ड्रेनेज नेटवर्क से बढ़ी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले शहर को बाढ़ से बचाने के लिए 23 जुलाई 2026 तक बड़े पैमाने पर कार्य तेज कर दिए हैं — नहरों की गाद सफाई, स्टॉर्म वाटर ड्रेन नेटवर्क और जलाशय पुनर्स्थापना समेत दर्जनों परियोजनाएं जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि नागरिक संगठनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई इलाकों में ड्रेनेज की कड़ियां अभी भी अधूरी हैं और विभागीय समन्वय की कमी तैयारियों पर भारी पड़ सकती है।
नहरों की मरम्मत और गाद सफाई
जीसीसी आयुक्त जी. एस. समीरन के अनुसार, शहर की 44 नहरों में से 33 नहरों में ₹295.25 करोड़ की लागत से गाद निकालने, रिटेनिंग वॉल को मजबूत करने और सुरक्षा बाड़ लगाने का काम चल रहा है। इनमें से 28 नहरों का काम पूरा हो चुका है।
ट्रस्टपुरम, ओटेरी नुल्लाह, विरुगंबक्कम नहर, रेड्डी कुप्पम नहर और कैप्टन कॉटन नहर जैसे प्राथमिकता वाले हिस्सों का काम 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने की योजना है। यह ऐसे समय में आया है जब 2015 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से चेन्नई की जल निकासी व्यवस्था लगातार सुधार की माँग करती रही है।
स्टॉर्म वाटर ड्रेन: 155 मिसिंग लिंक की पहचान
आयुक्त समीरन ने बताया कि चेन्नई में स्टॉर्म वाटर ड्रेन की 155 मिसिंग लिंक चिह्नित की गई हैं। इनमें लगभग 140 किलोमीटर लंबाई वाले अधूरे हिस्सों में से 103 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है; शेष 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना (फेज-1 से 3) के तहत प्रस्तावित 310 किलोमीटर नेटवर्क में से 264.20 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। डीमेलोज रोड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना को 30 सितंबर 2026 तक और अंबत्तूर सरप्लस डायवर्जन चैनल — जो ईस्ट एवेन्यू रोड को ओटेरी नुल्लाह से जोड़ता है — को 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने की उम्मीद है।
कोसस्थलैयार बेसिन परियोजना: 99.6% पूर्ण
कोसस्थलैयार नदी बेसिन में चल रही इंटीग्रेटेड अर्बन फ्लड मैनेजमेंट परियोजना — जिसमें तिरुवोट्टियूर, मनाली, माधवरम, तिरु वी का नगर और अन्ना नगर के कुछ इलाके शामिल हैं — 99.6 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। ₹3,059 करोड़ की इस परियोजना के तहत प्रस्तावित 636 किलोमीटर नेटवर्क में से 633.46 किलोमीटर का निर्माण हो चुका है और इसके जुलाई 2026 में ही पूर्ण होने की संभावना है।
गौरतलब है कि यह परियोजना शहर के उन उत्तरी इलाकों को कवर करती है जो 2015 और 2021 की बाढ़ में सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंताएं
प्रगति रिपोर्टों के बावजूद स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। उनके अनुसार कई स्थानों पर ड्रेनेज नेटवर्क की कड़ियां नहीं जुड़ी हैं, नालों की सफाई अधूरी है और खुले बिजली के तार, गलत तरीके से लगाए गए कैचपिट कवर तथा निष्प्रभावी जल निकासी व्यवस्था जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
आलोचकों का कहना है कि नगर निगम के विभिन्न विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी इन कमियों की मुख्य वजह है — और यदि मानसून समय से पहले तेज हुआ तो अधूरी परियोजनाएं शहर को गंभीर संकट में डाल सकती हैं।
अन्य परियोजनाओं की स्थिति और आगे की राह
कोवलम बेसिन की इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना का 89 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। आर्कोट रोड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना के अक्टूबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
मनाली स्थित कडापक्कम झील के इको-रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसके जुलाई 2026 में समाप्त होने की संभावना है। इसके अलावा पुझल सरप्लस कैनाल से जुड़ी माधवरम स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले हफ्तों में इन परियोजनाओं की प्रगति यह तय करेगी कि चेन्नई इस बार मानसून की चुनौती से कितनी मजबूती से निपट पाता है।