तांबरम जलभराव से मुक्ति: ₹111 करोड़ की स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना का प्रस्ताव, 30 किमी नेटवर्क का खाका तैयार
सारांश
मुख्य बातें
तांबरम सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने उत्तर-पूर्व मानसून से पहले शहर के जलभराव-प्रभावित इलाकों को राहत दिलाने के लिए ₹111.08 करोड़ की व्यापक स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना का प्रस्ताव तमिलनाडु सरकार को भेजा है। यह प्रस्ताव 30.37 किलोमीटर लंबाई में फैले 40 ड्रेनेज कार्यों को समेटता है और इसके लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रतीक्षा है।
परियोजना का विस्तार और चरणबद्ध ढाँचा
निगम अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में ₹95.51 करोड़ की अनुमानित लागत से 23.1 किलोमीटर लंबाई के 25 ड्रेनेज कार्य पूरे किए जाएंगे। दूसरे चरण में ₹15.57 करोड़ की लागत से 7.27 किलोमीटर में 15 कार्य शामिल हैं।
प्रस्तावित नेटवर्क से गुडविल नगर, समथुवा पेरियार नगर, जज कॉलोनी, चितलापक्कम के कुछ हिस्सों और निगम सीमा के भीतर स्थित अन्य जलभराव-प्रभावित बस्तियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
आयुक्त की बात: फील्ड निरीक्षण और बाढ़ मानचित्रण का आधार
निगम आयुक्त एस. बालाचंदर ने बताया कि यह प्रस्ताव पिछले कई मानसून सत्रों के दौरान किए गए व्यापक फील्ड निरीक्षण और बाढ़ मानचित्रण (फ्लड मैपिंग) के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों की पहचान ड्रेनेज तंत्र की कमियों और जलभराव के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर की गई है।
बालाचंदर के अनुसार, नए ड्रेनेज सिस्टम का डिज़ाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि वह मुख्य जल निकासी तंत्र से सीधे जुड़ सके, जिससे भारी बारिश के दौरान भी जलनिकासी तेज़ी से हो सके।
पुरानी परियोजनाएँ और नागरिकों के सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले निगम राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत ₹37.59 करोड़ की लागत से 15 किलोमीटर लंबे स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का निर्माण पूरा कर चुका है। हालाँकि, स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों का कहना है कि इन कार्यों से अपेक्षित राहत नहीं मिली।
उनका आरोप है कि कई ड्रेनों का निर्माण पर्याप्त ढलान (ग्रेडिएंट) के बिना किया गया, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब गुडविल नगर और आसपास के इलाकों में हर मानसून में भारी बारिश के कुछ घंटों के भीतर सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, यातायात ठप हो जाता है और संपत्तियों को नुकसान पहुँचता है।
नागरिक माँगें: निगरानी और प्राकृतिक जलमार्गों का पुनरुद्धार
नागरिक कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्यों के दौरान कड़ी निगरानी की माँग की है। साथ ही उन्होंने निगम से नई अवसंरचना के साथ-साथ प्राकृतिक जलमार्गों के पुनर्जीवन, अतिक्रमण हटाने और मौजूदा जल निकासी चैनलों को चौड़ा करने की भी अपील की है, ताकि सार्वजनिक धन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की मंजूरी मिलते ही निगम की योजना प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू करने की है, ताकि उत्तर-पूर्व मानसून के चरम दौर से पहले बाढ़-रोधी तैयारियाँ पुख्ता की जा सकें। यदि समयसीमा के भीतर काम शुरू हुआ, तो यह परियोजना तांबरम के लाखों निवासियों के लिए इस मानसून को पिछले वर्षों से बेहतर बना सकती है।