चेन्नई: व्यासर्पदी नहर जलकुंभी से पटी, शास्त्री नगर में बाढ़ का खतरा गहराया
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई के व्यासर्पदी इलाके में शास्त्री नगर के निवासी गंभीर बाढ़ की आशंका से जूझ रहे हैं, क्योंकि 30 अगस्त 2026 तक लगातार हो रही बारिश ने जलकुंभी और कचरे से बुरी तरह अवरुद्ध व्यासर्पदी नहर की खस्ता हालत उजागर कर दी है। नहर का पानी ठीक से नहीं बह पा रहा और स्थानीय लोग किसी भी भारी बारिश में सड़कों व घरों में पानी घुसने की आशंका जता रहे हैं।
नहर की मौजूदा स्थिति
शास्त्री नगर फर्स्ट स्ट्रीट के किनारे बहने वाली व्यासर्पदी नहर का एक बड़ा हिस्सा जलकुंभी की घनी परत से ढका हुआ है, जो दूर से हरे कालीन जैसी दिखती है। इस वनस्पति के नीचे जमा पानी से तेज दुर्गंध उठती है और मच्छरों व कीड़ों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। निवासियों के अनुसार, यह जलीय खरपतवार पिछले पाँच महीनों से बिना किसी रोकटोक के फैलता रहा है।
स्थिति को और बिगाड़ने में रात के अँधेरे में नहर किनारे फेंका जाने वाला कचरा भी अहम भूमिका निभा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे जलमार्ग और भी संकरा होता जा रहा है।
निर्माण कार्य से जटिल हुई स्थिति
अन्ना सलाई पर चल रहे पुल-निर्माण कार्य ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। निर्माण के दौरान जलमार्ग के कुछ हिस्से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे जल निकासी की गति धीमी पड़ गई है। परिणामस्वरूप फर्स्ट स्ट्रीट और आसपास के आवासीय क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो रहा है।
स्थानीय निवासी नागमणि ने बताया कि पुल-निर्माण के कारण कई स्थानों पर पानी का प्रवाह रुक गया है। उन्होंने माँग की है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए और तब तक अस्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
निवासियों की चिंताएँ और माँगें
एक निवासी ने बताया, 'पिछले पाँच महीनों से यहाँ जलकुंभी उग रही है। कुछ लोग रात में नहर के किनारे कचरा भी फेंक देते हैं। इससे पानी का बहाव और बाधित होता है। दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप रोज़ाना की परेशानी है।'
निवासियों ने ग्रेटर चेन्नई नगर निगम (GCCM) से आग्रह किया है कि अगली भारी बारिश से पहले नहर से जलकुंभी और जमा कचरा तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि देरी से कार्रवाई करने पर बाढ़ और सार्वजनिक स्वास्थ्य — दोनों मोर्चों पर संकट खड़ा हो सकता है।
नगर निगम की प्रतिक्रिया
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्ना सलाई पुल के एक तरफ का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और दूसरी तरफ का काम प्रगति पर है। निगम ने नहर से घनी वनस्पति हटाने के लिए रोबोटिक उत्खनन यंत्र की माँग की है और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि उपकरण के पहुँचते ही जलकुंभी हटाने का अभियान शुरू किया जाएगा।
स्वास्थ्य और बाढ़ का दोहरा खतरा
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नहर साफ नहीं की गई, तो घरों में बाढ़ आने का जोखिम तो है ही, लंबे समय तक जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना सकता है — जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब चेन्नई मानसून के सक्रिय चरण में है और शहर में रुक-रुक कर बारिश जारी है। अब सबकी निगाहें नगर निगम की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं।