पीएपी किसानों की माँग: नहर मरम्मत के लिए ₹14.98 करोड़ जारी करे तमिलनाडु सरकार, मॉनसून की कमी से बढ़ी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
परम्बिकुलम-अलियार प्रोजेक्ट (पीएपी) पर आश्रित किसानों ने तमिलनाडु सरकार से सिंचाई नहरों की सफाई और मरम्मत के लिए तत्काल ₹14.98 करोड़ जारी करने की माँग की है। 12 अगस्त को कोयंबटूर से उठी यह माँग ऐसे समय में आई है जब कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के चलते जल संरक्षण पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है। किसानों की चेतावनी है कि नहरों के जर्जर रखरखाव की स्थिति में जलाशयों से छोड़ा गया पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही बर्बाद हो सकता है।
परियोजना का दायरा और महत्त्व
पीएपी तमिलनाडु की सबसे बड़ी बहु-जिला सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जो कोयंबटूर, तिरुप्पुर और इरोड जिलों में फैली लगभग 3.80 लाख एकड़ कृषि भूमि को सींचती है। इस विशाल नेटवर्क को मुख्यतः तिरुमूर्ती और अलियार बाँधों से जल आपूर्ति होती है।
तिरुमूर्ती जलाशय प्रणाली के अंतर्गत दो जोन में प्रतिवर्ष लगभग 1.90 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई होती है — प्रत्येक जोन में करीब 95,000 एकड़। इस वर्ष जोन 2 और जोन 3 की कृषि भूमि को जल आपूर्ति निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, अलियार जलाशय प्रणाली हर साल लगभग 25,000 एकड़ भूमि को सिंचित करती है।
मुख्य घटनाक्रम: 229 मरम्मत कार्य चिह्नित
पीएपी के अंतर्गत जल-उपयोगकर्ता संगठनों ने पूरे सिंचाई नेटवर्क में नहरों की मरम्मत के 229 कार्य चिह्नित किए हैं, जिनकी अनुमानित लागत ₹14.98 करोड़ है। इन संगठनों की कुल संख्या 150 है — जिनमें 134 तिरुमूर्ती जलाशय प्रणाली और 16 अलियार जलाशय प्रणाली के अंतर्गत आते हैं।
किसानों का कहना है कि नहरों की वार्षिक सफाई और खरपतवार हटाने का कार्य जलाशयों से छोड़े गए पानी को अंतिम छोर तक के खेतों तक बिना अपव्यय के पहुँचाने के लिए अनिवार्य है। इन संगठनों के पास इतने बड़े पैमाने पर रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, इसलिए वे सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और पिछले वित्तपोषण का इतिहास
तिरुमूर्ती जलाशय प्रोजेक्ट कमेटी के चेयरमैन के. परमशिवम ने बताया कि पूर्व अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकार के कार्यकाल में 'कुदिमरमथु' योजना के तहत नहरों का नियमित रखरखाव होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के शुरुआती चार वर्षों में इन कार्यों के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया गया। किसानों की लगातार माँगों के बाद पिछले वर्ष नहर सफाई के लिए ₹10 करोड़ स्वीकृत किए गए थे।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कृषि जल प्रबंधन को लेकर पहले से ही बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि सिंचाई बुनियादी ढाँचे के रखरखाव में राजनीतिक प्राथमिकताओं के कारण बार-बार व्यवधान आता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
किसान प्रतिनिधियों ने त्वरित स्वीकृति के लिए सरकार के तीन मंत्रियों से संपर्क किया है — जिनमें वित्त मंत्री, जल संसाधन मंत्री और तिरुप्पुर जिले के प्रभारी मंत्री शामिल हैं। फंड जारी करने का आश्वासन तो मिला है, लेकिन आवंटन अभी लंबित है।
जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है और मंजूरी की प्रतीक्षा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि शीघ्र ही फंड स्वीकृत होगा, जिसके बाद मरम्मत कार्य प्रारंभ हो सकेगा।
आम किसान पर असर और आगे की राह
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कमज़ोर रहने के कारण किसानों को आशंका है कि नहर मरम्मत में देरी से जलाशयों से छोड़े जाने वाले सीमित जल का प्रभाव और घट जाएगा। खराब नहरों में रिसाव और अवरोध से अंतिम छोर के किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे फसल नुकसान का खतरा बढ़ता है। यदि ₹14.98 करोड़ की स्वीकृति शीघ्र मिलती है, तो खरीफ सीजन से पहले मरम्मत कार्य पूरे होने की संभावना है।