तमिलनाडु: नहर गाद सफाई के लिए ₹10 करोड़ वार्षिक आवंटन की मांग, 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
परंबिकुलम-अलियार सिंचाई परियोजना की थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने तमिलनाडु सरकार से सिंचाई नहरों की गाद सफाई (डिसिल्टिंग) के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ का नियमित आवंटन सुनिश्चित करने की मांग की है। कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों में 4.25 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई इसी नेटवर्क पर निर्भर है, और अंतिम छोर के किसानों को पर्याप्त जल न मिलने की समस्या लगातार गहरी होती जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
समिति ने जल संसाधन विभाग के मंत्री एन. आनंद और वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें नहरों में जमा गाद के कारण जल प्रवाह में आ रही बाधाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया। एक अलग ज्ञापन मुख्यमंत्री विजय, जल संसाधन मंत्री, वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को भी संबोधित किया गया है।
समिति ने यह भी मांग की कि लंबे समय से लंबित अनैमलैयारु और नल्लारु परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए।
सिंचाई नेटवर्क का दायरा
समिति के अनुसार, यह सिंचाई नेटवर्क 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि को सेवा देता है। इसमें से 3.77 लाख एकड़ क्षेत्र थिरुमूर्ति बांध सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत आता है, जबकि शेष 44,000 एकड़ को अलियार बांध नेटवर्क से सींचा जाता है। नहर नेटवर्क के संचालन में थिरुमूर्ति बेसिन की 134 किसान संघों और अलियार बेसिन की 16 किसान संघों की भागीदारी है।
2021 के बाद से बंद हुआ आवंटन
समिति ने बताया कि 2016 से 2021 के बीच राज्य सरकार ने नहर गाद सफाई के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ आवंटित किए थे, जिससे सिंचाई नेटवर्क में जल प्रवाह निर्बाध बना रहा। हालांकि, 2021 से 2025 के बीच यह आवंटन पूरी तरह बंद रहा, जिससे कई नहरों में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ज्ञापन देने के बाद पूर्व सरकार ने ₹10 करोड़ मंजूर कर धनराशि जारी की थी, जिससे गाद सफाई का कार्य संभव हो सका। अब समिति ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी यही आवंटन जारी रखने का अनुरोध किया है।
मनरेगा की सीमाएं
ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किसी एक नहर पर तीन वर्षों में केवल एक बार ही कार्य की अनुमति है। समिति का कहना है कि यह प्रावधान नियमित रखरखाव की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है, और इसीलिए राज्य बजट से अलग वार्षिक आवंटन अनिवार्य है।
आम जनता पर असर
रखरखाव में चार वर्षों के अंतराल का सबसे अधिक असर अंतिम छोर वाले किसानों पर पड़ा है, जो पहले से ही जल वितरण की असमानता से जूझते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी तमिलनाडु में कृषि क्षेत्र पहले से ही जलवायु अनिश्चितता का सामना कर रहा है। नियमित डिसिल्टिंग के अभाव में नहर की वहन क्षमता घटती है, जिससे अंतिम छोर के खेतों तक पानी पहुंचना और कठिन हो जाता है।