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तमिलनाडु: नहर गाद सफाई के लिए ₹10 करोड़ वार्षिक आवंटन की मांग, 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित

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तमिलनाडु: नहर गाद सफाई के लिए ₹10 करोड़ वार्षिक आवंटन की मांग, 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित

सारांश

कोयंबटूर और तिरुप्पुर के 4.25 लाख एकड़ खेतों को पानी देने वाली परंबिकुलम-अलियार सिंचाई प्रणाली की थिरुमूर्ति समिति ने चेताया है — 2021 से बंद पड़े ₹10 करोड़ के वार्षिक डिसिल्टिंग आवंटन की बहाली न हुई तो अंतिम छोर के किसानों की मुश्किलें और गहरी होंगी।

मुख्य बातें

थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने तमिलनाडु सरकार से नहर गाद सफाई के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ आवंटित करने की मांग की।
सिंचाई नेटवर्क 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि को कवर करता है — 3.77 लाख एकड़ थिरुमूर्ति बांध और 44,000 एकड़ अलियार बांध के अंतर्गत।
2016–2021 के बीच ₹10 करोड़ वार्षिक आवंटन मिलता था; 2021 से 2025 के बीच कोई आवंटन नहीं हुआ।
ज्ञापन जल संसाधन मंत्री एन.
आनंद , वित्त मंत्री एन.
मैरी विल्सन और मुख्यमंत्री विजय को सौंपा गया।
मनरेगा के तहत एक नहर पर तीन वर्षों में एक बार ही कार्य की अनुमति, जो नियमित रखरखाव के लिए अपर्याप्त।
समिति ने अनैमलैयारु और नल्लारु परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने की भी मांग की।

परंबिकुलम-अलियार सिंचाई परियोजना की थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने तमिलनाडु सरकार से सिंचाई नहरों की गाद सफाई (डिसिल्टिंग) के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ का नियमित आवंटन सुनिश्चित करने की मांग की है। कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों में 4.25 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई इसी नेटवर्क पर निर्भर है, और अंतिम छोर के किसानों को पर्याप्त जल न मिलने की समस्या लगातार गहरी होती जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

समिति ने जल संसाधन विभाग के मंत्री एन. आनंद और वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें नहरों में जमा गाद के कारण जल प्रवाह में आ रही बाधाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया। एक अलग ज्ञापन मुख्यमंत्री विजय, जल संसाधन मंत्री, वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को भी संबोधित किया गया है।

समिति ने यह भी मांग की कि लंबे समय से लंबित अनैमलैयारु और नल्लारु परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए।

सिंचाई नेटवर्क का दायरा

समिति के अनुसार, यह सिंचाई नेटवर्क 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि को सेवा देता है। इसमें से 3.77 लाख एकड़ क्षेत्र थिरुमूर्ति बांध सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत आता है, जबकि शेष 44,000 एकड़ को अलियार बांध नेटवर्क से सींचा जाता है। नहर नेटवर्क के संचालन में थिरुमूर्ति बेसिन की 134 किसान संघों और अलियार बेसिन की 16 किसान संघों की भागीदारी है।

2021 के बाद से बंद हुआ आवंटन

समिति ने बताया कि 2016 से 2021 के बीच राज्य सरकार ने नहर गाद सफाई के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ आवंटित किए थे, जिससे सिंचाई नेटवर्क में जल प्रवाह निर्बाध बना रहा। हालांकि, 2021 से 2025 के बीच यह आवंटन पूरी तरह बंद रहा, जिससे कई नहरों में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ज्ञापन देने के बाद पूर्व सरकार ने ₹10 करोड़ मंजूर कर धनराशि जारी की थी, जिससे गाद सफाई का कार्य संभव हो सका। अब समिति ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी यही आवंटन जारी रखने का अनुरोध किया है।

मनरेगा की सीमाएं

ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किसी एक नहर पर तीन वर्षों में केवल एक बार ही कार्य की अनुमति है। समिति का कहना है कि यह प्रावधान नियमित रखरखाव की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है, और इसीलिए राज्य बजट से अलग वार्षिक आवंटन अनिवार्य है।

आम जनता पर असर

रखरखाव में चार वर्षों के अंतराल का सबसे अधिक असर अंतिम छोर वाले किसानों पर पड़ा है, जो पहले से ही जल वितरण की असमानता से जूझते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी तमिलनाडु में कृषि क्षेत्र पहले से ही जलवायु अनिश्चितता का सामना कर रहा है। नियमित डिसिल्टिंग के अभाव में नहर की वहन क्षमता घटती है, जिससे अंतिम छोर के खेतों तक पानी पहुंचना और कठिन हो जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पुरानी समस्या की अभिव्यक्ति है जिसमें सिंचाई बुनियादी ढाँचे का रखरखाव राजनीतिक प्राथमिकता सूची में नई परियोजनाओं की घोषणाओं से पीछे रह जाता है। ₹10 करोड़ की यह मांग बड़ी नहीं है — लेकिन 4.25 लाख एकड़ और डेढ़ सौ से अधिक किसान संघों के लिए इसका न होना बहुत बड़ा है। मनरेगा की 'तीन साल में एक बार' की सीमा यह भी उजागर करती है कि केंद्रीय रोज़गार योजनाएँ सिंचाई रखरखाव के विकल्प नहीं बन सकतीं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इस मांग को वार्षिक बजट में संस्थागत रूप देगी, या अगले ज्ञापन का इंतज़ार करेगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थिरुमूर्ति जलाशय परियोजना समिति ने क्या मांग की है?
समिति ने तमिलनाडु सरकार से परंबिकुलम-अलियार सिंचाई परियोजना की नहरों की गाद सफाई के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ आवंटित करने की मांग की है। यह मांग कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों में 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि तक उचित जल वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
2021 के बाद से नहर गाद सफाई आवंटन क्यों बंद हो गया?
समिति के अनुसार, 2016 से 2021 के बीच प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ का आवंटन होता था, लेकिन 2021 से 2025 के दौरान कोई आवंटन नहीं किया गया। इसके सटीक कारण ज्ञापन में स्पष्ट नहीं किए गए, परंतु परिणामस्वरूप कई नहरों में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई।
इस सिंचाई नेटवर्क से कितने किसान प्रभावित होते हैं?
परंबिकुलम-अलियार सिंचाई नेटवर्क लगभग 4.25 लाख एकड़ कृषि भूमि को सेवा देता है। इसमें थिरुमूर्ति बेसिन की 134 और अलियार बेसिन की 16 किसान संघों की भागीदारी है, जो पश्चिमी तमिलनाडु के हज़ारों किसान परिवारों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
मनरेगा के ज़रिए नहर सफाई क्यों नहीं हो सकती?
मनरेगा के प्रावधानों के तहत किसी एक नहर पर तीन वर्षों में केवल एक बार ही कार्य की अनुमति है। समिति का कहना है कि गाद जमाव एक सतत प्रक्रिया है और इतने लंबे अंतराल पर होने वाली सफाई नियमित रखरखाव की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकती।
समिति ने किन अन्य परियोजनाओं को पूरा करने की मांग की है?
समिति ने अनैमलैयारु और नल्लारु परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की है, जो इस सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत लंबे समय से लंबित हैं। यह मांग मुख्यमंत्री विजय, जल संसाधन मंत्री और वित्त मंत्री को संबोधित अलग ज्ञापन में उठाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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