तमिलनाडु: सीएम विजय की पहल पर किसानों को मुफ्त सिल्ट, 'ई-सेवई' पोर्टल से करें आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 20 मई 2026 को किसानों, कुम्हारों और घरेलू उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए जलाशयों से मुफ्त गाद (सिल्ट) निकालने की अनुमति देने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में चेन्नई सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसका उद्देश्य आगामी पूर्वोत्तर मानसून से पहले जलाशयों की जल-भंडारण क्षमता बढ़ाना और कृषि समुदाय को सीधा लाभ पहुँचाना है।
योजना का विवरण
सरकार ने स्पष्ट किया कि किसान और कुम्हार बिना किसी रॉयल्टी शुल्क के तालाबों और झीलों से गाद ले जा सकेंगे। यह प्रक्रिया संबंधित विभागों के अधिकारियों की निगरानी में संचालित होगी ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो। वर्ष 2026-27 के लिए चिन्हित झीलों और तालाबों की सूची जिला राजपत्रों में प्रकाशित की जाएगी।
ई-सेवई पोर्टल से आवेदन प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सरल बनाया गया है। इच्छुक किसान, कुम्हार और घरेलू उपयोगकर्ता तमिलनाडु ई-सेवई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित तहसीलदार 10 दिनों के भीतर निर्धारित मात्रा में गाद लेने की अनुमति जारी करेंगे।
जलाशयों पर असर और व्यापक महत्व
बैठक में बताया गया कि तमिलनाडु में करीब 40,000 झीलें और तालाब जल संसाधन विभाग तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के नियंत्रण में हैं। इन जलाशयों से गाद हटाने पर दोहरा लाभ होगा — किसानों को उर्वर मिट्टी मिलेगी और जलाशयों की जल-भंडारण क्षमता में भी सुधार होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून-पूर्व तैयारियाँ जोरों पर हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को मौजूदा नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार योजना की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बैठक में ग्रामीण विकास एवं जल संसाधन मंत्री एन. आनंद, वित्त मंत्री के.ए. सेनगोट्टैयन, मुख्य सचिव डॉ. एम. साईकुमार सहित कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और विभागीय सचिव उपस्थित रहे।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहल किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता करने के साथ-साथ कुम्हार समुदाय की कच्चे माल की जरूरत भी पूरी करेगी। राज्य सरकार की यह योजना पूर्वोत्तर मानसून से पहले लागू होने की उम्मीद है, जिससे खरीफ सत्र में किसानों को सीधा लाभ मिल सकेगा।