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क्या तमिलनाडु के किसानों को धान फसल बीमा में राहत मिली?

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क्या तमिलनाडु के किसानों को धान फसल बीमा में राहत मिली?

सारांश

तमिलनाडु के धान किसानों के लिए बीमा योजना की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। यह निर्णय बारिश और अन्य कारणों से हो रही देरी के चलते लिया गया है। अब किसान 30 नवंबर तक अपना आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने इसे किसानों के हित में एक बड़ी राहत बताया है।

मुख्य बातें

बीमा की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 नवंबर की गई है।
किसानों के लिए राहत का एक महत्वपूर्ण कदम।
राज्य सरकार ने केंद्र से समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।
अवधि के दौरान 6.27 लाख किसानों ने बीमा कराया।
बीमा कवरेज बढ़ाने के लिए कृषि विभाग सक्रिय होगा।

चेन्नई, 16 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के धान किसानों को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए सांबा, थालाडी और पिशानम धान फसल बीमा योजना के लिए नामांकन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया है। पहले यह तिथि 15 नवंबर तक निर्धारित थी।

लगातार बारिश, कुरुवई फसल की कटाई में देरी और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के कारण कई जिलों में बीमा आवेदनों की प्रक्रिया में बाधा आई थी, जिसके चलते राज्य ने केंद्र से समय बढ़ाने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार ने इस पर सहमति दे दी है।

राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम ने कहा कि यह विस्तार इसलिए आवश्यक था ताकि कोई भी किसान प्रशासनिक या मौसम संबंधी समस्याओं के कारण बीमा से वंचित न रह सके।

उन्होंने बताया कि इस सीजन में सांबा की खेती तेजी से बढ़ रही है और अब तक 26.25 लाख एकड़ में खेती हो चुकी है।

अब तक 6.27 लाख किसानों ने लगभग 15 लाख एकड़ भूमि का बीमा कराया है, जो कुल लक्ष्य का 57 प्रतिशत है। यह पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है, जब इसी अवधि में केवल 10 लाख एकड़ का बीमा हुआ था।

अधिकारियों ने इस वृद्धि का श्रेय व्यापक जागरूकता अभियान, सिंचाई के लिए समय पर पानी की आपूर्ति और नामांकन केंद्रों की बेहतर उपलब्धता को दिया है।

बीमा की पुरानी अंतिम तिथि राज्य के 27 जिलों के लिए निर्धारित थी, जिनमें तंजावुर, नागपट्टिनम, मयिलाडुथुरै, तिरुवरूर, मदुरै, पुडुकोट्टई, करूर, सलेम, तिरुप्पूर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, थेनी, रामनाथपुरम, तिरुची, अरियालुर, वेल्लोर, रणिपेट, तिरुपतूर, तिरुवन्नामलाई, धर्मपुरी, विलुप्पुरम, कल्लाकुरिची, पेरंबलूर, शिवगंगा, कुड्डलूर, तिरुवल्लूर और इरोड शामिल हैं।

मंत्री पन्नीरसेल्वम ने कहा कि किसानों और विभिन्न संगठनों से कई प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए, जिसमें अनियमित बारिश और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण समय पर आवेदन न कर पाने की कठिनाइयों को उजागर किया गया था।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के त्वरित हस्तक्षेप के बाद केंद्र ने समय बढ़ाने को मंजूरी दी।

सरकार ने उन किसानों से अपील की है जिन्होंने अभी तक बीमा नहीं कराया है कि वे 30 नवंबर से पहले ई-सेवाई केंद्रों, प्राइमरी एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी या राष्ट्रीयकृत बैंकों में जाकर नामांकन पूरा करें।

कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांव-स्तरीय टीमों को सक्रिय करें और अधिकतम किसानों तक पहुंचकर बीमा कवरेज सुनिश्चित करें, खासकर उत्तरपूर्वी मानसून के दौरान संभावित फसल जोखिमों को देखते हुए। सरकार ने दोहराया है कि किसान नामांकन में देरी न करें, क्योंकि सांबा सीजन में अनिश्चित मौसम से बचाव के लिए फसल बीमा बेहद जरूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह निर्णय न केवल किसानों के हित में है, बल्कि कृषि क्षेत्र की स्थिरता को भी सुनिश्चित करता है।
RashtraPress
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