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अमेरिका का ईरान पर लगातार नौवीं रात हमला, सेंटकॉम बोला — होर्मुज़ खतरे को करेंगे नष्ट

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अमेरिका का ईरान पर लगातार नौवीं रात हमला, सेंटकॉम बोला — होर्मुज़ खतरे को करेंगे नष्ट

सारांश

अमेरिकी सेना का ईरान पर हमला नौवीं रात भी जारी रहा — सेंटकॉम ने एक्स पर पुष्टि की। निशाने पर IRGC के मिसाइल भंडार, तटीय निगरानी और वायु रक्षा ठिकाने। 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व में तैनात, होर्मुज़ स्ट्रेट पर खतरा बना मुख्य कारण।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 20 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि ईरान पर हमले लगातार नौवीं रात भी जारी रहे।
ताज़ा हमले रविवार शाम 7 बजे (अमेरिकी समयानुसार) शुरू हुए; लक्ष्य — होर्मुज़ स्ट्रेट को खतरा बनाने वाली ईरानी सैन्य क्षमताएँ।
18 जुलाई की रात के अभियान में तटीय निगरानी , एयर डिफेंस , मिसाइल और ड्रोन भंडार नष्ट किए गए।
IRGC के उन बलों को भी निशाना बनाया गया जिन्होंने 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।
मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात; सेना को 'पूरी तरह सतर्क और तैयार' बताया गया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 20 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार नौवीं रात सैन्य हमले किए, जिनका मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यावसायिक और नागरिक जहाज़ों के लिए खतरा बनती हैं। ताज़ा हमले रविवार शाम 7 बजे (अमेरिकी समयानुसार) शुरू हुए, जो इस सैन्य अभियान की अब तक की सबसे लंबी निरंतर श्रृंखला है।

ताज़ा हमलों का विवरण

सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (X) पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में कहा कि नए हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निष्क्रिय करना है 'जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाज़ों और आम नागरिकों वाले समुद्री जहाज़ों पर हमले के लिए किया जाता है।' यह बयान सेंटकॉम के आधिकारिक हैंडल से जारी किया गया।

इससे पहले, सेंटकॉम ने बताया था कि 18 जुलाई को रात 11:30 बजे (ईस्टर्न समयानुसार) ईरान के विरुद्ध एक और सैन्य अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह ऑपरेशन कमांडर-इन-चीफ के प्रत्यक्ष निर्देश पर अंजाम दिया गया था।

आठवीं रात के अभियान में क्या निशाना बना

सेंटकॉम के अनुसार, आठवीं रात के अभियान में अमेरिकी सेना ने ईरान की तटीय निगरानी सुविधाओं, वायु रक्षा प्रतिष्ठानों, समुद्री क्षमताओं तथा मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को सफलतापूर्वक नष्ट किया।

इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सेना ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उन बलों को भी निशाना बनाया जिन्होंने कथित तौर पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति

सेंटकॉम के बयान के अनुसार, इस समय मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सेना ने कहा है कि ये सैनिक 'पूरी तरह सतर्क, घातक और तैयार' हैं।

गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह में अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी प्रांतों में कई सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढाँचे पर हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का एकमात्र लक्ष्य होर्मुज़ स्ट्रेट में व्यावसायिक नौवहन को बाधित करने की ईरान की क्षमता को कमज़ोर करना है।

क्षेत्रीय तनाव और आगे की स्थिति

यह सैन्य अभियान ऐसे समय में जारी है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ सकता है। लगातार नौ रातों की यह कार्रवाई संकेत देती है कि अमेरिका इस अभियान को निकट भविष्य में समाप्त करने के मूड में नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित सैन्य क्षरण रणनीति के रूप में चला रहा है। होर्मुज़ स्ट्रेट का हवाला देना महत्वपूर्ण है — यह वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% वहन करता है, और इसे 'व्यावसायिक शिपिंग की रक्षा' के रूप में फ्रेम करना अमेरिका को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिश है। लेकिन जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले के जवाब में IRGC को निशाना बनाना संघर्ष के विस्तार का संकेत है, जो इस अभियान को केवल 'शिपिंग सुरक्षा' से आगे ले जाता है। यह देखना होगा कि नौ रातों की यह कार्रवाई ईरान को वार्ता की मेज़ पर लाती है या क्षेत्रीय तनाव को एक नए और अधिक खतरनाक चरण में धकेलती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान पर लगातार नौवीं रात हमला क्यों किया?
सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यावसायिक और नागरिक जहाज़ों के लिए खतरा बनती हैं। इसके अतिरिक्त, 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर IRGC के हमले का जवाब देना भी एक प्रमुख कारण बताया गया है।
अमेरिका ने ईरान के किन ठिकानों को निशाना बनाया?
आठवीं रात के अभियान में अमेरिकी सेना ने ईरान की तटीय निगरानी सुविधाओं, वायु रक्षा प्रतिष्ठानों, समुद्री क्षमताओं और मिसाइल व ड्रोन भंडारण स्थलों को नष्ट किया। IRGC के उन बलों को भी निशाना बनाया गया जिन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।
होर्मुज़ स्ट्रेट इस संघर्ष में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका का दावा है कि ईरान इस जलमार्ग से गुज़रने वाले व्यावसायिक जहाज़ों को खतरे में डालने की क्षमता रखता है, और इसी खतरे को समाप्त करना इन हमलों का मुख्य घोषित उद्देश्य है।
मध्य पूर्व में अभी कितने अमेरिकी सैनिक तैनात हैं?
सेंटकॉम के बयान के अनुसार, इस समय मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सेना ने इन्हें 'पूरी तरह सतर्क, घातक और तैयार' बताया है।
इन हमलों के बाद आगे क्या हो सकता है?
लगातार नौ रातों के हमलों के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका यह अभियान कब तक जारी रखेगा। विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति या तो ईरान को वार्ता के लिए मजबूर कर सकती है या मध्य पूर्व में तनाव को और गहरा कर सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर भी पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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