ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें हवा में ढेर, सेंटकॉम ने 'अचानक हमले' को किया नाकाम
सारांश
मुख्य बातें
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 29 जुलाई को दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ईरान से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सेना ने सफलतापूर्वक रोक दिया। सेंटकॉम के अनुसार यह हमला शाम 5:45 बजे (पूर्वी समय) किया गया और इसे मध्य पूर्व में अमेरिकी बलों पर 'अचानक हमले' की कोशिश बताया गया। तेहरान की ओर से इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
मिसाइल हमले का विवरण
सेंटकॉम ने एक्स पर अपनी आधिकारिक पोस्ट में कहा, 'आज शाम 5:45 बजे (ईटी) इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सेनाओं ने ईरान से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं — यह मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना पर अचानक हमला करने की कोशिश थी। ईरान की सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया।' एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अधिकतम चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकेबंदी
मिसाइल हमले से पहले उसी दिन सेंटकॉम ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे 18 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया, 2 को निष्क्रिय कर दिया और 2 अन्य पर कब्जा कर लिया। यह कार्रवाई ईरान के सभी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी — जिसे 'स्टील वॉल' नाम दिया गया है — को सख्ती से लागू करने के तहत की गई।
सेंटकॉम के अनुसार, मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के समर्थन में 20 से अधिक अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत सक्रिय हैं। इससे पहले 26 जुलाई को सेंट्रल कमांड ने घोषणा की थी कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू है और 25 जुलाई तक 12 कमर्शियल जहाजों का मार्ग परिवर्तन किया जा चुका था।
राजनयिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मुलाकात हो रही थी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को दोनों देशों द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद यह उनकी पहली आमने-सामने की बैठक थी।
ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने कूटनीतिक वार्ता को एक और अवसर देने के लिए ईरान पर अमेरिकी हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल रही तो वे पुनः हमले का आदेश दे सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव और आगे की स्थिति
मध्य पूर्व में यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका-ईरान तनाव पहले से चरम पर था। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयाँ क्षेत्र में व्यापक संघर्ष का जोखिम बढ़ा सकती हैं। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वह पूरी तरह सतर्क और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।