कुवैत ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल रोकी, अमेरिकी सेना ने 5 ड्रोन मार गिराए: CENTCOM
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 28 मई 2026 को पुष्टि की कि ईरान ने 27 मई की रात 10:17 बजे (अमेरिकी पूर्वी समय) कुवैत की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे कुवैती सेना ने सफलतापूर्वक मार गिराया। इसके साथ ही ईरानी सेना ने पाँच वन-वे अटैक ड्रोन भी लॉन्च किए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने नष्ट किया।
मुख्य घटनाक्रम
CENTCOM के अनुसार, ईरानी ड्रोन होर्मुज स्ट्रेट में और उसके आसपास स्पष्ट खतरा उत्पन्न कर रहे थे। इसके अलावा, बंदर अब्बास पोर्ट पर ईरानी ग्राउंड कंट्रोल साइट से छठे ड्रोन के प्रक्षेपण को भी रोक लिया गया। CENTCOM ने इसे सीजफायर का बड़ा उल्लंघन करार दिया।
इससे एक दिन पहले, बुधवार को कुवैत आर्मी के जनरल स्टाफ ने जनता को सूचित किया था कि देश की वायु रक्षा प्रणाली दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रही है। सेना ने स्पष्ट किया कि सुनाई दे रहे धमाके वायु रक्षा प्रणाली द्वारा हमलों को रोकने का परिणाम हैं।
यूएई की कड़ी निंदा
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने गुरुवार को इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'ईरान का आतंकवादी ड्रोन और मिसाइल हमला' बताया। यूएई के विदेश मंत्रालय (MOFA) ने अपने बयान में कहा, 'ये आतंकवादी हमले कुवैत की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन हैं और उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं।' मंत्रालय ने कुवैत के साथ पूर्ण एकजुटता और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के सभी उपायों के लिए समर्थन व्यक्त किया।
ट्रंप का होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान साफ कर दिया कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने की कोई भी अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'स्ट्रेट सभी के लिए खुला रहेगा। कोई भी इसे कंट्रोल नहीं करेगा। यह अंतरराष्ट्रीय पानी है।'
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने चल रही परमाणु वार्ता के दौरान इस रणनीतिक तेल शिपिंग मार्ग पर नियंत्रण की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिका इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।
व्यापक संदर्भ और क्षेत्रीय तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है। कुवैत में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा रही है।
आगे की स्थिति
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। CENTCOM और खाड़ी देशों की सेनाएँ हाई अलर्ट पर हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर घटनाक्रम तेज़ हो सकता है।