कुवैत पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमला: GCC और खाड़ी देशों ने की कड़ी निंदा, बताया संप्रभुता का उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने 27 मई 2026 की रात 10:17 बजे कुवैत की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे कुवैती सेना ने हवा में ही मार गिराया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले को युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। इस घटना के बाद गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) सहित कई खाड़ी देशों ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
हमले का घटनाक्रम
CENTCOM के अनुसार, मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास 5 वन-वे अटैक ड्रोन भी भेजे थे, जिन्हें अमेरिकी सेना ने इंटरसेप्ट कर लिया। CENTCOM ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी बलों ने बंदर अब्बास स्थित ईरानी ग्राउंड कंट्रोल साइट से छठे ड्रोन को लॉन्च होने से भी रोक दिया।
IRGC ने शुरू में केवल यह कहा था कि उसने अमेरिका के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है, लेकिन उस देश का नाम नहीं लिया था। बाद में स्पष्ट हुआ कि वह सैन्य प्रतिष्ठान कुवैत में स्थित था।
खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और सऊदी अरब ने इस हमले को कुवैत की संप्रभुता का 'स्पष्ट उल्लंघन' बताया। UAE ने अपने बयान में सीधे ईरान का नाम लेते हुए इसे 'आतंकी हमला' करार दिया — जो तीनों देशों में सबसे कड़ी भाषा थी।
तीनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने बयान जारी कर कहा कि वे कुवैत की सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता बनाए रखने के लिए उठाए गए हर कदम के साथ खड़े हैं।
GCC महासचिव की निंदा
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के महासचिव जसेम मोहम्मद अल बुदावी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि GCC के सभी सदस्य देश कुवैत की सुरक्षा और उसके नागरिकों व निवासियों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से उसके साथ हैं।
हमले की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास के पास स्थित एक ईरानी ड्रोन बेस पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। CENTCOM ने दावा किया था कि उसने ईरान के कुछ ड्रोन मार गिराए थे, जिसके बाद IRGC ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से चरम पर है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वह और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरानी आक्रामकता से अपने सैनिकों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर घटनाक्रम तेज़ी से बदल सकता है।