होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी सेना ने ईरान के दो 'वन-वे अटैक ड्रोन' मार गिराए, खाड़ी में तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 7 जून को पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बना रहे ईरान के दो 'वन-वे अटैक ड्रोन' को अमेरिकी सेना ने मार गिराया। सेंटकॉम के अनुसार, ये ड्रोन वाणिज्यिक जहाजों की ओर बढ़ रहे थे और उन्हें टकराने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
सेंटकॉम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर ये ड्रोन लॉन्च किए थे। अमेरिकी सेना ने दोनों ड्रोन को हवा में ही नष्ट करते हुए किसी भी जहाज को नुकसान पहुँचने से रोका। सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि वह ईरानी आक्रामकता का मुकाबला करने और क्षेत्र में अपना बचाव जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स की कार्रवाई
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दक्षिणी ईरान में केशम द्वीप और सिरिक काउंटी पर पहले हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की पुष्टि की। आईआरजीसी के अनुसार, यह कार्रवाई केशम आइलैंड पर उसके कम्युनिकेशन टावर पर रात भर हुए अमेरिकी हमले का प्रत्युत्तर था।
खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इन हमलों से खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। बहरीन ने ईरान से अपने हमले तत्काल रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के पूरी तरह खोलने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता का सम्मान करने की माँग की।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि लगातार हो रहे ये हमले ऐसे समय में खतरनाक तनाव-वृद्धि को दर्शाते हैं, जब वैश्विक प्रयास एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने पर केंद्रित हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन हमलों को किसी भी बहाने से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है। गौरतलब है कि यह घटना मध्य-पूर्व में पहले से चल रहे संघर्षों की पृष्ठभूमि में घटी है, जिससे समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।
आगे की स्थिति
क्षेत्र में तनाव के और बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी सेना ने संकेत दिया है कि वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब खाड़ी देशों और ईरान के बीच अगले कदम पर टिकी हैं।