होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी शिकंजा: सेंटकॉम ने 44 जहाज़ों का रास्ता बदला, ट्रंप बोले — 'स्टील की दीवार' खड़ी है
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 3 अगस्त 2026 को घोषणा की कि ईरान के विरुद्ध अमेरिकी नाकाबंदी को और कड़ा कर दिया गया है। सेंटकॉम के अनुसार, अब तक 44 व्यावसायिक जहाज़ों का मार्ग बदलवाया जा चुका है, दो जहाज़ों पर सवार होकर जाँच की गई है और दो जहाज़ों को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है। यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही है।
सेंटकॉम का आधिकारिक बयान
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी को लगातार और सख्ती से लागू कर रही है। 3 अगस्त तक सेंटकॉम ने 44 व्यावसायिक जहाज़ों का रास्ता बदलवाया है, दो जहाज़ों को निष्क्रिय किया है, और दो जहाज़ों पर चढ़कर उनकी जाँच की है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
ट्रंप की तीखी टिप्पणी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर ईरानी नेतृत्व पर 'दोहरे चरित्र' का आरोप लगाया। ट्रंप ने लिखा, 'ईरान का नेतृत्व हैरान करने वाली दोहरी बातें करता है। वे बैठक की मांग करते हैं, कुछ लोग तो कहेंगे कि वे इसके लिए गिड़गिड़ाते हैं। बातचीत शुरू होती है और आगे के कई दौर तय होते हैं, लेकिन फिर वे खुलेआम और बड़े गर्व से कहते हैं कि कोई बातचीत ही नहीं हो रही, किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं चल रही, और वे सिर्फ ओमान से बात कर रहे हैं।'
ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर बड़े-बड़े दावे करता है, जबकि 'हकीकत यह है कि उस इलाके पर पहले से ही अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण है और हमारी नाकाबंदी — जिसे कुछ लोग अमेरिका की स्टील की दीवार कहते हैं — वहाँ मौजूद है।'
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने ट्रंप के 'अप्रत्यक्ष वार्ता' संबंधी दावों को सिरे से खारिज किया। बाघेई ने पत्रकारों से कहा, 'किसी प्रतिनिधि का स्वागत करने या किसी को बातचीत के लिए भेजने की हमारी कोई योजना नहीं है। फिलहाल हमारी अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही है।' यह खंडन अमेरिका के उन दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें ईरान को बातचीत का इच्छुक पक्ष बताया गया था।
होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार की सबसे संकरी और महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य है — दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल इसी मार्ग से गुज़रता है। इस जलसंधि पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के कई दौर बेनतीजा रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाज़ारों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह नाकाबंदी और कड़ी होती है तो खाड़ी क्षेत्र से होने वाला तेल निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब ओमान की मध्यस्थता की भूमिका पर टिकी हैं।