अमेरिकी सेना ने ईरान के 4 हमलावर ड्रोन मार गिराए, होर्मुज स्ट्रेट के पास रडार ठिकानों पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 6 जून को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट की दिशा में भेजे गए ईरान के चार वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया और इसके जवाब में गोरुक तथा केशम द्वीप पर ईरान के तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमले किए। सेंटकॉम के अनुसार यह कार्रवाई क्षेत्रीय समुद्री यातायात को तत्काल खतरे से बचाने के लिए की गई।
मुख्य घटनाक्रम
सेंटकॉम के आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरानी ड्रोन होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे और उन्हें क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए 'तत्काल खतरा' माना गया। बयान में कहा गया, 'कुछ ही देर पहले सेना ने ईरान के चार वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट की ओर भेजा गया था।' इसके बाद जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी बलों ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित निगरानी बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया।
कहाँ और किन ठिकानों पर हुए हमले
सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी बलों ने गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ईरान के तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमले किए। बयान में कहा गया कि यह कदम 'आगे के हमलों से बचाव' के उद्देश्य से उठाया गया। हालाँकि, सेंटकॉम ने हताहतों की संख्या, नुकसान के आकलन या इस्तेमाल किए गए विमान और हथियारों के प्रकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
होर्मुज स्ट्रेट का सामरिक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सर्वाधिक रणनीतिक जलमार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुज़रता है। अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में तैनात है और इन प्रमुख समुद्री मार्गों पर नियमित गश्त करती है।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है। सेंटकॉम ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि ड्रोन ने किसी वाणिज्यिक जहाज़ को सीधे निशाना बनाया था या नहीं।
आगे की स्थिति
सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि 'अमेरिकी बल सतर्क हैं और आत्मरक्षा में ईरान की अनुचित आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार हैं।' इस ताज़ा घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है, तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।