होर्मुज तनाव: अमेरिका ने ईरान के 4 ड्रोन मार गिराए, बंदर अब्बास ड्रोन केंद्र पर हमला; ईरान ने अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने 28 मई को पुष्टि की कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट ईरान के चार ड्रोन मार गिराए और दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में स्थित एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह एक सप्ताह के भीतर ईरान पर दूसरी बड़ी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
सेंटकाम ने कहा कि उसके बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी और वाणिज्यिक जहाजों को खतरे में डाल रहे चार ईरानी ड्रोन को नष्ट किया। इसके साथ ही उस ड्रोन नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया जहाँ एक और ड्रोन लॉन्च की तैयारी चल रही थी।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास शहर के पूर्वी इलाके में मंगलवार सुबह तीन धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके तुरंत बाद ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया। गौरतलब है कि सोमवार को भी ईरानी बोट्स को निशाना बनाया गया था।
अमेरिका का पक्ष
सेंटकाम ने इस पूरी कार्रवाई को 'आत्म-रक्षा' के तहत उठाया गया कदम बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते खतरों को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले शिपिंग मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
ईरान की प्रतिक्रिया और जवाबी दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमला किया। तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से आईआरजीसी ने कहा कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4:50 बजे किया गया — हालाँकि ईरान ने यह नहीं बताया कि लक्षित एयरबेस किस देश में स्थित था।
तेहरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह मौजूदा संघर्षविराम का सीधा उल्लंघन है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है और उसकी सैन्य कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध हैं।
व्यापक संदर्भ और असर
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार गुज़रता है — पहले से ही भू-राजनीतिक दबाव में है। एक सप्ताह में दो बड़ी सैन्य कार्रवाइयाँ यह संकेत देती हैं कि दोनों देशों के बीच सीधी झड़प का जोखिम तेज़ी से बढ़ रहा है।
आलोचकों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कूटनीतिक चैनल के इस तरह की जवाबी कार्रवाइयाँ क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस पर टिकी हैं कि क्या दोनों पक्ष संयम बरतेंगे या यह टकराव और बड़े संघर्ष में तब्दील होगा।