27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

होर्मुज स्ट्रेट में एम/वी एवर लवली पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर बोला हवाई हमला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
होर्मुज स्ट्रेट में एम/वी एवर लवली पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर बोला हवाई हमला

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के ध्वज वाले मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर ईरानी ड्रोन हमले के महज़ एक दिन बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर 90 मिनट के हवाई हमले किए। यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए नाज़ुक सीजफायर समझौते के भविष्य पर गहरे सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने 26 जून 2025 को ईरान के मिसाइल-ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार ठिकानों पर 90 मिनट के हवाई हमले किए।
ईरान ने 25 जून को होर्मुज स्ट्रेट में चार वन-वे अटैक ड्रोन से एम/वी एवर लवली (सिंगापुर ध्वज) को निशाना बनाया; अमेरिका ने तीन ड्रोन मार गिराए, चौथे ने जहाज पर हमला किया।
CENTCOM ने इस हमले को दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में ईरानी हमले की निंदा की और इसे 'सीजफायर का बेवकूफी भरा उल्लंघन' बताया।
IRGC ने अमेरिकी ऑपरेशन के एक हिस्से को नाकाम करने का दावा किया, जिसकी अमेरिकी सेना ने पुष्टि नहीं की।
इस घटनाक्रम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर जारी कूटनीतिक वार्ता के भविष्य पर संशय पैदा कर दिया है।

अमेरिकी सेना ने 26 जून 2025 को ईरान के मिसाइल-ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले किए — यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के ध्वज वाले वाणिज्यिक मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर 25 जून को हुए ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई। दोनों देशों के बीच इसी सप्ताह हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद यह वॉशिंगटन की पहली प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई है, जिसने उस नाज़ुक समझौते की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमले का घटनाक्रम

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने 25 जून को चार वन-वे अटैक ड्रोन लॉन्च किए, जब एम/वी एवर लवली ओमानी तट के साथ होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकल रहा था। अमेरिकी सेना ने उनमें से तीन ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, लेकिन चौथे ड्रोन ने मालवाहक जहाज पर सीधा हमला किया।

CENTCOM ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'CENTCOM बलों ने 26 जून को ईरान के विरुद्ध हमले किए, जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले का कड़ा जवाब था।' कमांड ने स्पष्ट किया कि ये हमले लगभग 90 मिनट तक चले और इन्हें जवाबी कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया — किसी बड़े युद्ध अभियान की पुनः शुरुआत के तौर पर नहीं।

सीजफायर उल्लंघन पर अमेरिका का रुख

CENTCOM ने व्यापारिक जहाज पर ईरानी हमले को संघर्ष विराम का 'स्पष्ट उल्लंघन' करार दिया। कमांड के बयान में कहा गया, 'ईरानी सेना का वाणिज्यिक शिपिंग पर बेवजह हमला साफ तौर पर सीजफायर का उल्लंघन है। इसके अलावा, ईरान के खतरनाक व्यवहार ने नेविगेशन की स्वतंत्रता को कमज़ोर किया है, क्योंकि व्यापार तेज़ी से ज़रूरी अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारों से होकर गुज़रता है।'

CENTCOM ने यह भी कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए समन्वय और सहयोग जारी रखेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन से कुछ घंटे पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में मीडिया से कहा, 'मुझे यह बात पसंद नहीं है कि उन्होंने कल गोली चलाई। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को 'हमारे सीजफायर एग्रीमेंट का बेवकूफी भरा उल्लंघन' बताया।

ईरान की प्रतिक्रिया और दावे

ईरान ने एम/वी एवर लवली पर हमले की तत्काल जिम्मेदारी नहीं ली। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर स्थित सिरिक पोर्ट में एक दूरसंचार टावर पर प्रक्षेप्य हमला हुआ। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि किसी भी नई कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। IRGC ने यह भी दावा किया कि उसने अमेरिकी ऑपरेशन के एक हिस्से को नाकाम कर दिया और अमेरिकी सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया — हालांकि अमेरिकी सेना की ओर से इस दावे की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

समझौते की स्थिरता पर संकट

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच हुए हालिया समझौते में सैन्य अभियान समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। 25 जून को एवर लवली पर हुए हमले और उसके बाद 26 जून को अमेरिका की जवाबी कार्रवाई ने उस समझौते के भविष्य पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्ष कूटनीतिक चैनलों को सक्रिय रखने की कोशिश कर रहे थे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि दोनों देश संघर्ष को और आगे बढ़ाते हैं या संयम बरतते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मीन पर उनकी पकड़ उतनी ही कमज़ोर होती है — खासकर तब जब दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक अविश्वास गहरा हो। ईरान द्वारा एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाना और फिर जिम्मेदारी से इनकार करना, और अमेरिका का 90 मिनट में 'सीमित जवाबी कार्रवाई' करना — दोनों ही यह संकेत देते हैं कि दोनों पक्ष तनाव को नियंत्रित रखना चाहते हैं, लेकिन पीछे हटने को तैयार नहीं। असली चिंता यह है कि होर्मुज स्ट्रेट — जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल गुज़रता है — अब फिर से अस्थिरता के केंद्र में आ गया है, और इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट में एम/वी एवर लवली पर हमला क्या था?
एम/वी एवर लवली सिंगापुर के ध्वज वाला एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज है, जिस पर ईरान ने 25 जून 2025 को होर्मुज स्ट्रेट में वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया। अमेरिकी सेना ने चार में से तीन ड्रोन मार गिराए, लेकिन चौथे ने जहाज को निशाना बना लिया।
अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हमला कब और कैसे किया?
CENTCOM बलों ने 26 जून 2025 को ईरान के मिसाइल-ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर लगभग 90 मिनट के हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह जवाबी कार्रवाई थी, किसी बड़े युद्ध अभियान की पुनः शुरुआत नहीं।
अमेरिका-ईरान सीजफायर समझौते में क्या तय हुआ था?
दोनों देशों के बीच हुए समझौते में सैन्य अभियान समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को व्यापार के लिए फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। एम/वी एवर लवली पर हमले और उसके बाद अमेरिकी जवाबी कार्रवाई ने इस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान ने अमेरिकी हमले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान ने एम/वी एवर लवली पर हमले की तत्काल जिम्मेदारी नहीं ली। IRGC ने दावा किया कि उसने अमेरिकी ऑपरेशन के एक हिस्से को नाकाम किया, हालांकि अमेरिकी सेना ने इसकी पुष्टि नहीं की। IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी नई कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का भारत पर क्या असर हो सकता है?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है और भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 4 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले