11 अगस्त 2026
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अल नीनो की मार: दक्षिण तमिलनाडु में ताड़ गुड़ ₹400/किलो पार, हज़ारों श्रमिक प्रभावित

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अल नीनो की मार: दक्षिण तमिलनाडु में ताड़ गुड़ ₹400/किलो पार, हज़ारों श्रमिक प्रभावित

सारांश

अल नीनो की वजह से हुई कम बारिश ने दक्षिण तमिलनाडु के ताड़ गुड़ उद्योग की कमर तोड़ दी है। सयालकुडी में गुड़ ₹400/किलो और उडांगुडी किस्म ₹600/किलो तक पहुँच गई है। रामनाथपुरम समेत चार जिलों के हज़ारों श्रमिकों की आजीविका दाँव पर है और सीजन खत्म होते ही कीमतें और बढ़ने की आशंका है।

मुख्य बातें

अल नीनो के कारण कम बारिश से दक्षिण तमिलनाडु में ताड़ गुड़ उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सयालकुडी में ताड़ का गुड़ एक महीने में ₹350 से बढ़कर ₹400 प्रति किलो हो गया है।
प्रसिद्ध उडांगुडी करुपट्टी का पुराना स्टॉक ₹600/किलो , ताज़ा ₹500/किलो ; ताड़ मिश्री ₹800/किलो पर बिक रही है।
रामनाथपुरम, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों के हज़ारों श्रमिकों की आय प्रभावित।
उत्पादन सीजन समाप्त होने के बाद मानसून और सर्दियों में कीमतें और बढ़ने की आशंका।

अल नीनो के कारण हुई कम बारिश ने दक्षिण तमिलनाडु के पारंपरिक ताड़ गुड़ उद्योग को गहरी चोट पहुँचाई है। रामनाथपुरम, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों में फैले इस उद्योग में उत्पादन घटने से 11 अगस्त 2026 तक ताड़ के गुड़ की कीमतें असामान्य रूप से ऊँचाई पर पहुँच गई हैं। सयालकुडी में जो गुड़ पिछले महीने ₹350 प्रति किलो बिक रहा था, वह अब ₹400 प्रति किलो तक जा पहुँचा है।

उद्योग का विस्तार और महत्त्व

तमिलनाडु में सर्वाधिक ताड़ के पेड़ रामनाथपुरम जिले में हैं, जो राज्य की ताड़ गुड़ राजधानी माना जाता है। सयालकुडी, नरीप्पैयूर, मारियूर, कन्नीराजापुरम, मेलाचेलवानूर और मल्लत्तर जैसे गाँवों में हज़ारों श्रमिक पीढ़ियों से इस काम में लगे हैं। हर वर्ष जनवरी-फरवरी में 'पडनीर' (ताड़ का रस) संग्रह का मौसम शुरू होता है। श्रमिक पेड़ों से मीठा रस इकट्ठा कर उसे उबालकर 'करुपट्टी' यानी ताड़ का गुड़ तैयार करते हैं।

उत्पादन में भारी गिरावट

श्रमिकों के अनुसार, पिछले मानसून और उसके बाद के गर्मी के महीनों में वर्षा सामान्य से काफी कम रही, जिससे ताड़ के पेड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिली। इसका सीधा असर 'पडनीर' की उपलब्धता पर पड़ा और गुड़ उत्पादन में भारी कमी आई। मौजूदा उत्पादन सीजन के समाप्त होते ही आपूर्ति और घटने की आशंका है, जिससे आने वाले मानसून और सर्दियों के महीनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं — यह वही समय है जब माँग सामान्यतः अपने चरम पर होती है।

कीमतों का हाल और उत्पाद विविधता

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, उडांगुडी किस्म का पुराना स्टॉक इस समय लगभग ₹600 प्रति किलो और ताज़ा गुड़ लगभग ₹500 प्रति किलो बिक रहा है। थूथुकुडी जिले की 'उडांगुडी करुपट्टी' अपनी विशिष्ट पहचान और छोटे आकार के बावजूद सर्वाधिक महँगी है। इसके अलावा, 'पनंगालकंडु' (ताड़ की मिश्री) लगभग ₹800 प्रति किलो और 'सिल्लुकुरुपट्टी' लगभग ₹600 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है — दोनों उत्पादों की बाज़ार में निरंतर माँग बनी रहती है।

श्रमिकों और व्यापारियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब ताड़ उद्योग पहले से ही आधुनिकीकरण और युवा पीढ़ी की इस परंपरागत काम में घटती रुचि की चुनौती झेल रहा है। उत्पादन घटने से श्रमिकों की आय पर सीधा असर पड़ा है, क्योंकि वे उत्पादित मात्रा के अनुसार कमाते हैं। व्यापारी सीधे श्रमिकों से गुड़ खरीदकर थोक और खुदरा बाज़ारों में भेजते हैं, इसलिए आपूर्ति में कमी पूरी मूल्य-श्रृंखला को प्रभावित कर रही है।

आगे की चुनौतियाँ

व्यापारियों का अनुमान है कि उत्पादन सीजन बंद होने के बाद कीमतों में और उछाल आ सकता है। गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, और अगले मानसून की स्थिति पर ही उद्योग की अगले वर्ष की सेहत निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह के मौसमी व्यवधान भविष्य में और बार-बार हो सकते हैं, जिससे इस पारंपरिक उद्योग के दीर्घकालिक संरक्षण की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत भी है, जिसे अब तक किसी ठोस सरकारी सहायता ढाँचे का संबल नहीं मिला है। अल नीनो की घटनाएँ वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार आने वाले दशकों में अधिक बारंबार होंगी — ऐसे में बिना जलवायु-अनुकूल नीति और श्रमिक सुरक्षा जाल के, यह संकट हर कुछ वर्षों में दोहराता रहेगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण तमिलनाडु में ताड़ गुड़ की कीमतें क्यों बढ़ी हैं?
अल नीनो के कारण हुई कम बारिश से ताड़ के पेड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिली, जिससे 'पडनीर' (ताड़ रस) की उपलब्धता घटी और गुड़ उत्पादन में भारी कमी आई। आपूर्ति घटने और माँग बनी रहने के कारण कीमतें असामान्य रूप से ऊँची हो गई हैं।
अभी ताड़ गुड़ किस भाव पर बिक रहा है?
सयालकुडी में सामान्य ताड़ गुड़ लगभग ₹400 प्रति किलो बिक रहा है। उडांगुडी किस्म का ताज़ा गुड़ ₹500/किलो और पुराना स्टॉक ₹600/किलो तक है। ताड़ मिश्री (पनंगालकंडु) ₹800/किलो और सिल्लुकुरुपट्टी ₹600/किलो के आसपास है।
इस उद्योग से कौन-से जिले प्रभावित हैं?
रामनाथपुरम, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों के हज़ारों श्रमिक इस उद्योग पर निर्भर हैं। रामनाथपुरम में तमिलनाडु के सर्वाधिक ताड़ के पेड़ हैं और यह ताड़ गुड़ उत्पादन का प्रमुख केंद्र है।
क्या आगे कीमतें और बढ़ेंगी?
व्यापारियों का अनुमान है कि उत्पादन सीजन खत्म होने के बाद मानसून और सर्दियों के महीनों में, जब माँग सामान्यतः अधिक होती है, कीमतें और बढ़ सकती हैं। आपूर्ति में और कमी आने की आशंका है।
उडांगुडी करुपट्टी क्या है और यह इतनी महँगी क्यों है?
उडांगुडी करुपट्टी थूथुकुडी जिले के उडांगुडी क्षेत्र में बनाई जाने वाली विशेष ताड़ गुड़ है, जो आकार में छोटी लेकिन अपनी विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। इसकी माँग अधिक और उत्पादन सीमित होने के कारण यह सामान्य ताड़ गुड़ से अधिक महँगी बिकती है।
राष्ट्र प्रेस
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