तमिलनाडु में धान-गन्ना किसानों को राहत: CM विजय ने बढ़ाई प्रोत्साहन राशि, गन्ना खरीद ₹4,000 प्रति टन
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को विधानसभा में नियम 110 के तहत बयान देते हुए धान और गन्ना उत्पादकों के लिए प्रोत्साहन राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की। इस फैसले से राज्य में सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर बड़ी संख्या में किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
धान किसानों को क्या मिलेगा
राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त धान किसानों को विशेष प्रोत्साहन देगी। अच्छी किस्म के धान पर ₹289 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान पर ₹150 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन घोषित किया गया है।
इस संशोधन के बाद अच्छी किस्म का धान बेचने वाले किसानों को ₹2,750 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान के लिए ₹2,600 प्रति क्विंटल की प्रभावी खरीद कीमत प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री विजय ने इसे किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
गन्ना खरीद में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
गन्ना उत्पादकों के लिए यह घोषणा और भी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ₹3,290.50 प्रति टन के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के ऊपर, तमिलनाडु सरकार ₹709.50 प्रति टन का अतिरिक्त राज्य प्रोत्साहन देगी। इस तरह गन्ना किसानों को मिलने वाली कुल प्रभावी कीमत ₹4,000 प्रति टन हो जाएगी।
मुख्यमंत्री विजय ने स्वयं इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि तमिलनाडु में पहली बार गन्ने की कुल खरीद कीमत ₹4,000 प्रति टन के स्तर पर पहुँची है।
किसानों की माँग और सरकार की प्रतिक्रिया
ये घोषणाएँ ऐसे समय में की गई हैं जब राज्यभर के किसान खेती की बढ़ती लागत — कृषि आदान, मजदूरी और सिंचाई खर्च — की भरपाई के लिए खरीद मूल्य बढ़ाने की माँग कर रहे थे। धान तमिलनाडु की प्रमुख खरीफ फसल है और खरीद मूल्यों में बदलाव का सीधा असर खेती के मौसम में किसानों की आय पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसान समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इस तरह के उपाय जारी रहेंगे।
आम जनता और कृषि क्षेत्र पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर किसानों को इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक फायदा होगा। गौरतलब है कि तमिलनाडु में चीनी मिलों को गन्ना बेचने वाले किसानों की संख्या काफी बड़ी है, और ₹4,000 प्रति टन की कीमत उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकती है।
यह कदम राज्य सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित कर किसानों की आजीविका को स्थायित्व देना है। आने वाले खरीद सत्र में इन नई दरों का क्रियान्वयन किसानों की वास्तविक आय पर इस नीति के असर को परखने की कसौटी होगी।