24 जुलाई 2026
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तमिलनाडु के डेल्टा किसानों की केंद्र से माँग: धान एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी करो, अल नीनो और खाद-ईंधन महँगाई बनी चिंता

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तमिलनाडु के डेल्टा किसानों की केंद्र से माँग: धान एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी करो, अल नीनो और खाद-ईंधन महँगाई बनी चिंता

सारांश

तमिलनाडु के डेल्टा किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से धान एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी की माँग की है। ₹72/क्विंटल की मौजूदा वृद्धि को नाकाफी बताते हुए किसान नेताओं ने अगस्त में सीएसीपी की विशेष बैठक बुलाने की अपील की है — अल नीनो की आशंका और खाद-ईंधन की बढ़ती कीमतें इस माँग के पीछे की असली वजह हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से 2026-27 मार्केटिंग वर्ष से पहले धान एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी की माँग की।
केंद्र ने 13 मई 2026 को धान की दोनों किस्मों पर ₹72 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी घोषित की थी, जिसे किसान नाकाफी मानते हैं।
पोटाश, अमोनियम सल्फेट और एनपीके खाद की कीमतों में ₹50 से ₹400 प्रति 50-किलो बैग तक की वृद्धि दर्ज।
तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई एस.
विमलनाथन ने अगस्त 2026 में सीएसीपी की विशेष बैठक बुलाने की माँग की।
पर्यावरणविद् भास्कर राज ने अल नीनो से फसल उत्पादन पर पड़ने वाले असर को लेकर चेतावनी दी।
नई एमएसपी दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होनी हैं।

तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्र के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से धान सहित प्रमुख कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अंतरिम बढ़ोतरी की माँग की है। 8 जून 2026 को तिरुचि से उठी इस माँग के पीछे ईंधन और खाद की कीमतों में तेज उछाल तथा संभावित 'अल नीनो' घटना से उत्पन्न मौसम-संबंधी अनिश्चितता को मुख्य कारण बताया गया है। यह माँग ऐसे समय आई है जब 1 सितंबर 2026 से 2026-27 मार्केटिंग वर्ष के लिए नई एमएसपी दरें लागू होनी हैं।

मौजूदा एमएसपी और किसानों की आपत्ति

केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को संशोधित एमएसपी दरें घोषित की थीं, जिनमें धान की सामान्य और बढ़िया — दोनों किस्मों की खरीद कीमत में ₹72 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि खेती की बढ़ती इनपुट लागत की तुलना में यह वृद्धि बेहद कम है और वास्तविक राहत देने में असमर्थ है।

गौरतलब है कि एमएसपी प्रतिवर्ष कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसमें उत्पादन लागत, बाज़ार के रुझान, माँग-आपूर्ति संतुलन और व्यापक आर्थिक कारकों को ध्यान में रखा जाता है।

किसान नेता की माँग: अगस्त में सीएसीपी बैठक बुलाई जाए

तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई एस. विमलनाथन ने कहा कि एमएसपी घोषणा के समय जो परिस्थितियाँ थीं, वे अब काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अगस्त 2026 में सीएसीपी की बैठक पुनः बुलाई जाए और खरीद का नया सीजन शुरू होने से पहले समर्थन मूल्यों की समीक्षा की जाए।

विमलनाथन ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और आने वाले महीनों में इनमें और वृद्धि की आशंका है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ और गहरा होगा। उन्होंने तमिलनाडु के सांसदों से भी अपील की कि वे संसद में सामूहिक रूप से यह मुद्दा उठाएँ।

अल नीनो और जलवायु जोखिम

किसानों ने 2026 में तेज़ी से विकसित हो रहे 'अल नीनो' की खबरों पर गहरी चिंता जताई है। एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् भास्कर राज ने कहा कि प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी से वर्षा के वैश्विक पैटर्न बदल सकते हैं, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा और किसानों के लिए जोखिम बढ़ेगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कृषि नीति संबंधी फैसलों में जलवायु-संबंधी अनिश्चितताओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

खाद की कीमतों में तेज उछाल

किसानों के अनुसार, हाल के हफ्तों में पोटाश, अमोनियम सल्फेट और एनपीके खाद की कीमतों में ₹50 से ₹400 प्रति 50-किलो बैग तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तिरुवेरुम्बुर के किसान मेय्याझगन ने कहा कि एमएसपी में अंतरिम वृद्धि से बेहद जरूरी राहत मिलेगी और इस चुनौतीपूर्ण सीजन में बढ़ती लागत से निपटने में किसानों को मदद मिलेगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब कृषि क्षेत्र पर इनपुट लागत का दोहरा दबाव — ईंधन और उर्वरक — एक साथ पड़ रहा है। किसान संगठनों की नज़र अब अगस्त 2026 में संभावित सीएसीपी बैठक और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि अंतरिम संशोधन नहीं हुआ, तो आलोचकों का कहना है कि डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति और कमज़ोर हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केंद्र के लिए राजनीतिक रूप से असुविधाजनक भी — क्योंकि एक बार की छूट भविष्य में दबाव की नज़ीर बन सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या नीति-निर्माता इनपुट-लागत डेटा को एमएसपी तंत्र में गतिशील रूप से जोड़ने की व्यवस्था बनाते हैं, या हर बार किसानों को सड़क पर उतरने के बाद ही प्रतिक्रिया देते हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के किसान धान एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी क्यों माँग रहे हैं?
किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 13 मई 2026 को घोषित ₹72 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी खेती की बढ़ती इनपुट लागत की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। ईंधन की कीमतों में उछाल, खाद के दाम बढ़ने और अल नीनो से उत्पन्न मौसम-जोखिम ने इस माँग को और तीव्र कर दिया है।
धान की मौजूदा एमएसपी दर क्या है और नई दरें कब से लागू होंगी?
केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को धान की सामान्य और बढ़िया दोनों किस्मों पर ₹72 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। ये संशोधित दरें 2026-27 मार्केटिंग वर्ष के लिए 1 सितंबर 2026 से लागू होनी हैं।
सीएसीपी क्या है और एमएसपी तय करने में इसकी क्या भूमिका है?
कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) एक सरकारी सलाहकार निकाय है जो प्रतिवर्ष उत्पादन लागत, बाज़ार के रुझान और माँग-आपूर्ति के आधार पर एमएसपी की सिफारिश करता है। किसान नेताओं ने माँग की है कि अगस्त 2026 में सीएसीपी की विशेष बैठक बुलाकर बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनज़र दरों की पुनः समीक्षा की जाए।
खाद की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
किसानों के अनुसार हाल के हफ्तों में पोटाश, अमोनियम सल्फेट और एनपीके खाद की कीमतों में ₹50 से ₹400 प्रति 50-किलो बैग तक की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पहले से बढ़े ईंधन खर्च के साथ मिलकर किसानों की उत्पादन लागत को काफी बढ़ा रही है।
अल नीनो का तमिलनाडु की खेती पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी से वर्षा के वैश्विक पैटर्न बदल सकते हैं, जिससे फसल की पैदावार घट सकती है। पर्यावरणविद् भास्कर राज ने चेतावनी दी है कि कृषि नीति के फैसलों में इन जलवायु-जोखिमों को ध्यान में रखना अब ज़रूरी हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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