तमिलनाडु कृषि बजट से पहले किसानों की माँग: TVK सरकार से व्यापक सलाह-मशविरे की अपेक्षा

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तमिलनाडु कृषि बजट से पहले किसानों की माँग: TVK सरकार से व्यापक सलाह-मशविरे की अपेक्षा

सारांश

तमिलनाडु के किसान TVK की नई सरकार से माँग कर रहे हैं कि कृषि बजट से पहले 2021–22 की तरह व्यापक सलाह-मशविरा हो। धान और गन्ने के खरीद मूल्य तथा लंबित केंद्रीय निधियाँ किसानों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के किसानों ने TVK नेतृत्व वाली नई सरकार से कृषि बजट से पहले व्यापक सलाह-मशविरा आयोजित करने की माँग की।
तमिलनाडु 2021–22 में देश का पहला राज्य बना था जिसने अलग कृषि बजट पेश किया; उससे पहले 28 सलाह-मशविरा बैठकें हुई थीं।
किसानों ने धान और गन्ने के खरीद मूल्यों पर वादे पूरे करने और लंबित केंद्रीय निधियाँ प्राप्त करने को तत्काल प्राथमिकता बताया।
कुछ किसान नेताओं का मानना है कि बिना पर्याप्त वित्तीय सहायता के अलग बजट अकेले क्षेत्र की समस्याएँ नहीं सुलझा सकता।
किसानों ने सुझाया कि समय कम होने पर भी क्षेत्र-वार बैठकें आयोजित की जाएँ ताकि स्थानीय कृषि प्राथमिकताएँ बजट में शामिल हों।

तमिलनाडु के किसानों ने TVK के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह अपना पहला कृषि बजट तैयार करने से पहले किसान समुदायों, संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक सलाह-मशविरा करे। तिरुची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आई यह माँग इस बात को रेखांकित करती है कि किसान न केवल एक अलग कृषि बजट की परंपरा को जारी रखना चाहते हैं, बल्कि उसमें अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहते हैं।

पिछली परंपरा और किसानों की उम्मीदें

तमिलनाडु 2021–22 में देश का पहला ऐसा राज्य बना था जिसने एक अलग कृषि बजट पेश किया। उस बजट को अंतिम रूप देने से पहले पिछली सरकार ने पूरे राज्य में 28 सलाह-मशविरा बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में किसान, किसान संघ, जैविक खेती समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि मशीनरी निर्माता, बीज उत्पादक, व्यापारी, डेयरी व मुर्गी पालन करने वाले किसान, मछुआरे, विशेषज्ञ और चुने हुए प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसके अतिरिक्त, याचिकाओं और ईमेल के माध्यम से भी सुझाव एकत्र किए गए थे।

किसान संगठनों की प्रमुख माँगें

किसान संगठनों का कहना है कि सलाह-मशविरा प्रक्रिया ने नीतिगत फैसलों में उनकी आवाज़ को प्रभावी ढंग से शामिल करने में मदद की थी। किसानों के प्रतिनिधियों ने बताया कि उस दौरान किसान संघों के चुने हुए प्रतिनिधियों को चेन्नई में बजट चर्चाओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिससे स्थानीय चिंताओं को सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुँचाया जा सका। अब किसानों ने नई सरकार से यही प्रक्रिया दोहराने की अपेक्षा जताई है — भले ही समय कम हो, क्षेत्र-वार बैठकें आयोजित की जानी चाहिए।

कृषि बजट में किन विषयों पर रहा था जोर

पिछले कृषि बजट में फसलों में विविधता, खेती में नवाचार, बाज़ार तक बेहतर पहुँच, जैविक खेती को बढ़ावा, पोषण से जुड़ी पहलें और तकनीकी बदलावों को प्राथमिकता दी गई थी। साथ ही किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन की घोषणाएँ भी की गई थीं।

कुछ किसान नेताओं की अलग राय

हालाँकि कुछ किसान नेताओं ने यह भी तर्क दिया है कि केवल एक अलग कृषि बजट पेश करना तब तक पर्याप्त नहीं होगा जब तक राज्य को केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलती। उनके अनुसार, लंबित निधियों को प्राप्त करना और धान तथा गन्ने के लिए खरीद मूल्यों से जुड़े वादों को पूरा करना कृषि क्षेत्र को अधिक तत्काल राहत दे सकता है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब TVK की नई सरकार अपने पहले पूर्ण बजट की तैयारी में है। किसान समुदाय की यह अपेक्षा सरकार के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि कृषि नीति-निर्माण में भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। क्षेत्र-वार सलाह-मशविरा आयोजित होता है या नहीं, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों का कहना है कि बजट की भव्यता तब तक अधूरी है जब तक धान और गन्ने के खरीद मूल्यों पर पुराने वादे पूरे नहीं होते। केंद्र से लंबित निधियों का मुद्दा राज्य-केंद्र वित्तीय संबंधों की उस पुरानी खींचतान को भी उजागर करता है जो कृषि राज्यों के लिए बजट घोषणाओं को अक्सर कागज़ी बना देती है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में अलग कृषि बजट की शुरुआत कब हुई थी?
तमिलनाडु ने 2021–22 वित्तीय वर्ष में देश का पहला अलग कृषि बजट पेश किया था। उससे पहले पूरे राज्य में 28 सलाह-मशविरा बैठकें आयोजित की गई थीं जिनमें किसानों से लेकर विशेषज्ञों तक सभी पक्षों को शामिल किया गया था।
TVK सरकार से किसान क्या माँग कर रहे हैं?
किसान चाहते हैं कि TVK नेतृत्व वाली नई सरकार कृषि बजट को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों, FPO, जैविक खेती समूहों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ क्षेत्र-वार सलाह-मशविरा करे। इसके अलावा धान और गन्ने के खरीद मूल्यों पर वादे पूरे करने और लंबित केंद्रीय निधियाँ प्राप्त करने की भी माँग है।
पिछले कृषि बजट में किन विषयों को प्राथमिकता दी गई थी?
पिछले कृषि बजट में फसलों में विविधता, जैविक खेती, बाज़ार तक पहुँच, तकनीकी नवाचार, पोषण पहलें और किसानों के लिए सब्सिडी व प्रोत्साहन पर जोर दिया गया था।
क्या अलग कृषि बजट किसानों की सभी समस्याएँ सुलझा सकता है?
कुछ किसान नेताओं का मानना है कि केवल अलग बजट पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, जब तक राज्य को केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलती और धान-गन्ने के खरीद मूल्यों पर वादे पूरे नहीं होते, तब तक बजट घोषणाओं का असर सीमित रहेगा।
सलाह-मशविरा बैठकों में कौन-कौन से पक्ष शामिल होते हैं?
पिछले अनुभव के अनुसार इन बैठकों में किसान, किसान संघ, जैविक खेती समूह, FPO, कृषि मशीनरी निर्माता, बीज उत्पादक, व्यापारी, डेयरी व मुर्गी पालन करने वाले किसान, मछुआरे, विशेषज्ञ और चुने हुए जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे। याचिकाओं और ईमेल के ज़रिए भी सुझाव लिए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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