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तमिलनाडु में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी, किसानों की आर्थिक चिंता गहराई

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तमिलनाडु में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी, किसानों की आर्थिक चिंता गहराई

सारांश

तमिलनाडु में एनपीके, पोटाश और मिश्रित उर्वरकों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले से बढ़ती खेती की लागत के बीच यह वृद्धि छोटे और कर्जदार किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका है। किसान संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु में एनपीके मिश्रण , पोटाश , सल्फेट और मिश्रित उर्वरकों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ये उर्वरक धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी फसलों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
बीज, मज़दूरी, सिंचाई और मशीनरी की बढ़ती लागत के साथ खाद की महँगाई ने खेती की कुल लागत को और बोझिल बनाया।
कर्ज लेकर खेती करने वाले छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका।
किसान संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से उर्वरक कीमतें स्थिर करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।

तमिलनाडु में खाद की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। 1 जून 2026 को सामने आई इस स्थिति में कृषि संगठनों ने चेतावनी दी है कि पहले से ही बढ़ती खेती की लागत के बीच यह कदम किसानों की आमदनी पर सीधा और गंभीर असर डाल सकता है। चेन्नई सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से किसानों ने अपनी फसल योजनाओं को लेकर गहरी अनिश्चितता जताई है।

किन उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं

किसानों के अनुसार, एनपीके मिश्रण, मिश्रित उर्वरक, पोटाश, सल्फेट और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों वाले उर्वरकों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये उर्वरक धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी उत्पादों सहित तमाम फसलों में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हालिया बदलावों के बाद एनपीके उर्वरकों की कीमतों में तेज़ उछाल आया है, जबकि मिश्रित उर्वरकों और पोटाश की दरें भी काफी बढ़ा दी गई हैं।

खेती की लागत पर असर

कृषि संगठनों का कहना है कि बीज, मज़दूरी, सिंचाई और मशीनरी की कीमतें पहले से ही लगातार ऊपर जा रही हैं। ऐसे में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी खेती की कुल लागत को और अधिक बोझिल बना देती है। यह ऐसे समय में आया है जब छोटे और सीमांत किसान पहले से ही कर्ज के दबाव में हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में किसान उधार लेकर खेती करते हैं, जिससे मुनाफे में किसी भी कमी का असर उनकी वित्तीय स्थिरता पर सीधे पड़ता है।

किसानों की फसल योजनाओं पर अनिश्चितता

कृषि प्रतिनिधियों ने बताया कि खेती के लिए ज़रूरी सामग्री की कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि से कई किसान यह पुनर्विचार करने पर मजबूर हो गए हैं कि वे कितनी ज़मीन पर खेती कर सकते हैं। खबरों के मुताबिक, विशेष रूप से वे किसान जो कर्ज लेकर या छोटी जोत पर खेती करते हैं, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इससे आगामी खरीफ सीजन में बुआई के रकबे पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार से हस्तक्षेप की माँग

किसान समुदाय ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से अपील की है कि वे उर्वरकों की कीमतें स्थिर करने के लिए तत्काल कदम उठाएँ। उनका तर्क है कि खेती के लिए ज़रूरी सामग्री का उचित मूल्य पर उपलब्ध होना न केवल कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अनिवार्य है। फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़े। असली सवाल यह है कि जब केंद्र सरकार उर्वरक सब्सिडी के बजट को तर्कसंगत बनाने की दिशा में काम कर रही है, तो उसका बोझ अंततः किसान पर ही क्यों पड़ता है। छोटे और कर्जदार किसानों के लिए यह बढ़ोतरी सिर्फ लागत का मामला नहीं, बल्कि खेती छोड़ने की एक और वजह बन सकती है — जो ग्रामीण पलायन और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए दीर्घकालिक जोखिम है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में कौन-से उर्वरकों की कीमतें बढ़ी हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, एनपीके मिश्रण, मिश्रित उर्वरक, पोटाश, सल्फेट और फास्फोरस आधारित उर्वरकों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये उर्वरक धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी फसलों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
खाद की महँगाई का किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
खाद की बढ़ी कीमतें खेती की कुल लागत को और बढ़ा देंगी, जिससे किसानों के मुनाफे में कमी आने की आशंका है। विशेष रूप से कर्ज लेकर खेती करने वाले और छोटी जोत वाले किसान सबसे अधिक प्रभावित होंगे, और कई किसान अपने बुआई रकबे में कटौती पर विचार कर रहे हैं।
किसानों ने सरकार से क्या माँग की है?
किसान समुदाय ने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से उर्वरकों की कीमतें स्थिर करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। उनका कहना है कि खेती की सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध होना कृषि उत्पादकता और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।
क्या तमिलनाडु में खेती की लागत पहले से बढ़ रही थी?
हाँ, कृषि संगठनों के अनुसार बीज, मज़दूरी, सिंचाई और मशीनरी की कीमतें पहले से लगातार बढ़ रही थीं। खाद की ताज़ा महँगाई इस पहले से मौजूद दबाव को और गहरा कर रही है।
इस बढ़ोतरी से आगामी फसल सीजन पर क्या असर पड़ सकता है?
कृषि प्रतिनिधियों के अनुसार, कई किसान अपनी फसल योजनाओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं और बुआई का रकबा घटाने पर मजबूर हो सकते हैं। इससे आगामी खरीफ सीजन में उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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