तमिलनाडु में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी, किसानों की आर्थिक चिंता गहराई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में खाद की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। 1 जून 2026 को सामने आई इस स्थिति में कृषि संगठनों ने चेतावनी दी है कि पहले से ही बढ़ती खेती की लागत के बीच यह कदम किसानों की आमदनी पर सीधा और गंभीर असर डाल सकता है। चेन्नई सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से किसानों ने अपनी फसल योजनाओं को लेकर गहरी अनिश्चितता जताई है।
किन उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं
किसानों के अनुसार, एनपीके मिश्रण, मिश्रित उर्वरक, पोटाश, सल्फेट और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों वाले उर्वरकों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये उर्वरक धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी उत्पादों सहित तमाम फसलों में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हालिया बदलावों के बाद एनपीके उर्वरकों की कीमतों में तेज़ उछाल आया है, जबकि मिश्रित उर्वरकों और पोटाश की दरें भी काफी बढ़ा दी गई हैं।
खेती की लागत पर असर
कृषि संगठनों का कहना है कि बीज, मज़दूरी, सिंचाई और मशीनरी की कीमतें पहले से ही लगातार ऊपर जा रही हैं। ऐसे में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी खेती की कुल लागत को और अधिक बोझिल बना देती है। यह ऐसे समय में आया है जब छोटे और सीमांत किसान पहले से ही कर्ज के दबाव में हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में किसान उधार लेकर खेती करते हैं, जिससे मुनाफे में किसी भी कमी का असर उनकी वित्तीय स्थिरता पर सीधे पड़ता है।
किसानों की फसल योजनाओं पर अनिश्चितता
कृषि प्रतिनिधियों ने बताया कि खेती के लिए ज़रूरी सामग्री की कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि से कई किसान यह पुनर्विचार करने पर मजबूर हो गए हैं कि वे कितनी ज़मीन पर खेती कर सकते हैं। खबरों के मुताबिक, विशेष रूप से वे किसान जो कर्ज लेकर या छोटी जोत पर खेती करते हैं, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इससे आगामी खरीफ सीजन में बुआई के रकबे पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार से हस्तक्षेप की माँग
किसान समुदाय ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से अपील की है कि वे उर्वरकों की कीमतें स्थिर करने के लिए तत्काल कदम उठाएँ। उनका तर्क है कि खेती के लिए ज़रूरी सामग्री का उचित मूल्य पर उपलब्ध होना न केवल कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अनिवार्य है। फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।