22 अगस्त 2026
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तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का काम फिर शुरू, स्थानीय लोगों ने सख्त निगरानी की उठाई मांग

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तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का काम फिर शुरू, स्थानीय लोगों ने सख्त निगरानी की उठाई मांग

सारांश

तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का काम 31 जुलाई को शिकायतों के बाद रुका था — अब सरकारी अनुमति से फिर शुरू हुआ है। 3,76,152 एकड़ सिंचाई भूमि पर असर डालने वाले इस जलाशय के लिए स्थानीय लोग चाहते हैं कि लाभ असली किसानों तक पहुँचे, व्यावसायिक दोहन न हो।

मुख्य बातें

तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का कार्य 22 अगस्त 2026 को सरकारी अनुमति के बाद पुनः आरंभ हुआ।
काम 27 जुलाई को शुरू हुआ था, अनियमितताओं की शिकायत पर 31 जुलाई को अस्थायी रूप से रोका गया था।
PAP योजना के तहत लगभग 3,76,152 एकड़ और पुरानी आयकट प्रणाली से 3,044 एकड़ भूमि इस जलाशय पर निर्भर है।
स्थानीय निवासियों ने माँग की कि केवल अनुमत गाद निकाली जाए; बजरी, लाल मिट्टी या निर्माण सामग्री की अवैध ढुलाई रोकी जाए।
यह मुद्दा तमिलनाडु विधानसभा में भी उठाया गया था, जिसके बाद काम फिर शुरू करने की अनुमति मिली।

तमिलनाडु के उडुमलपेट के निकट स्थित तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का कार्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार, 22 अगस्त 2026 को एक बार फिर शुरू हो गया। हालांकि स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मिट्टी निकालने और परिवहन में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाए।

बांध का महत्व और पृष्ठभूमि

पश्चिमी घाट में स्थित तिरुमूर्ति बांध आसपास के वन क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों और नालों का जल संग्रह करता है। परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (PAP) के अंतर्गत आने वाले अन्य बांधों से भी पानी इस जलाशय में लाया जाता है। यह बांध कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों की कृषि भूमि की सिंचाई में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

PAP योजना के तहत लगभग 3,76,152 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त 'थाली' और 'वायपालयम' नहरों के माध्यम से पुरानी आयकट प्रणाली के तहत 3,044 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। इस जलाशय पर कई संयुक्त पेयजल योजनाएं भी निर्भर हैं।

मुख्य घटनाक्रम

ग्रीष्म काल में जलस्तर घटने का लाभ उठाते हुए किसानों ने जलाशय में संचित गाद निकालने की अनुमति माँगी थी। इस पर 27 जुलाई को कार्य प्रारंभ हुआ, परंतु कुछ ही दिनों में जिला प्रशासन को अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुईं। शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने 31 जुलाई को गाद निकालने का काम अस्थायी रूप से बंद करवाकर बांध स्थल का निरीक्षण किया।

इसके बाद किसानों ने राज्य सरकार से कार्य पुनः आरंभ करने की अपील की और यह मुद्दा तमिलनाडु विधानसभा में भी उठाया गया। किसानों का तर्क था कि पोषक तत्वों से समृद्ध यह गाद खेतों की उर्वरता और फसल उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। आखिरकार सरकार ने अनुमति दे दी और शुक्रवार को जलाशय से गाद निकालने का कार्य दोबारा शुरू हो गया।

स्थानीय लोगों की माँगें

स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि प्रत्येक लाभार्थी द्वारा निकाली गई मिट्टी की मात्रा की जाँच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उसे परमिट में निर्दिष्ट कृषि भूमि पर ही ले जाया जा रहा है। उन्होंने यह भी माँग की कि बांध के कमांड क्षेत्र से बाहर के लोग, जो किसान नहीं हैं, व्यावसायिक उद्देश्यों से मिट्टी न निकाल सकें।

निवासियों ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया कि केवल निर्धारित गाद ही निकाली जाए और बजरी, लाल मिट्टी या अन्य निर्माण सामग्री को जलाशय क्षेत्र से अवैध रूप से न ले जाया जाए।

आम जनता और किसानों पर असर

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि सख्त निगरानी हो तो इस पहल का वास्तविक लाभ किसानों को मिलेगा। जलाशय की गाद को उचित तरीके से खेतों में पहुँचाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा, फसल की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आजीविका सुदृढ़ होगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में जल संसाधन प्रबंधन और जलाशयों की भंडारण क्षमता को लेकर चर्चा तेज है। गाद निकालने की प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही ही तय करेगी कि यह पहल किसानों के लिए दीर्घकालिक रूप से कितनी फायदेमंद साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिकायत आए तो रोको, फिर शुरू करो' का चक्र बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुमूर्ति बांध में गाद निकालने का काम क्यों रोका गया था?
27 जुलाई को शुरू हुए गाद निकालने के काम में अनियमितताओं की शिकायतें जिला प्रशासन को मिलीं, जिसके बाद अधिकारियों ने 31 जुलाई को काम अस्थायी रूप से बंद करवाकर बांध स्थल का निरीक्षण किया। किसानों की अपील और विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद सरकार ने पुनः अनुमति दी।
तिरुमूर्ति बांध किन जिलों की सिंचाई करता है?
तिरुमूर्ति बांध तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुप्पुर जिलों की कृषि भूमि की सिंचाई करता है। परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (PAP) के तहत लगभग 3,76,152 एकड़ और पुरानी आयकट प्रणाली से 3,044 एकड़ भूमि इस जलाशय पर निर्भर है।
स्थानीय लोगों ने गाद निकालने को लेकर क्या माँगें रखी हैं?
स्थानीय निवासियों ने माँग की है कि प्रत्येक लाभार्थी द्वारा निकाली गई मिट्टी की मात्रा की जाँच हो और उसे केवल परमिट में तय कृषि भूमि पर ले जाया जाए। साथ ही बजरी, लाल मिट्टी या निर्माण सामग्री की अवैध ढुलाई और गैर-किसानों द्वारा व्यावसायिक दोहन रोकने की माँग भी की गई है।
किसानों को गाद निकालने से क्या फायदा होगा?
जलाशय की गाद पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसे खेतों में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, फसल उत्पादकता में सुधार होता है और किसानों की आजीविका मज़बूत होती है। साथ ही जलाशय की भंडारण क्षमता भी बहाल होती है।
परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (PAP) क्या है?
परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (PAP) तमिलनाडु की एक प्रमुख बहु-उद्देशीय जल परियोजना है जिसके तहत कई बांधों और जलाशयों का नेटवर्क है। तिरुमूर्ति बांध इसी प्रणाली का हिस्सा है और इससे कोयंबटूर व तिरुप्पुर जिलों में लगभग 3,76,152 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।
राष्ट्र प्रेस
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