मेट्टूर बांध से 1 सितंबर को पानी छोड़ेंगे CM विजय, कावेरी डेल्टा के 16 लाख एकड़ को मिलेगी सिंचाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 1 सितंबर 2026 को मेट्टूर बांध के द्वार औपचारिक रूप से खोले और कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए सिंचाई जल का प्रवाह शुरू किया। जलाशय का जलस्तर 90 फीट से ऊपर पहुँचने के बाद यह निर्णय लिया गया, जिससे 13 जिलों में फैली लगभग 16 लाख एकड़ कृषि भूमि को राहत मिलेगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री विजय चेन्नई से निजी विमान द्वारा सलेम के ओमालूर कमलपुरम हवाई अड्डे पर पहुँचे और फिर सड़क मार्ग से मेट्टूर गए, जहाँ उन्होंने बांध के द्वार खोलने की औपचारिक प्रक्रिया संपन्न की। प्रारंभिक चरण में कावेरी नदी में 3,000 घन फीट प्रति सेकंड की दर से जल निर्वहन शुरू किया गया। सिंचाई की आवश्यकता और जलाशय में आवक के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।
देरी की वजह और सुधार की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मेट्टूर बांध से हर वर्ष 12 जून को पानी छोड़ने की परंपरा है। किंतु इस वर्ष कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में अपर्याप्त वर्षा के कारण अधिकारी निर्धारित तिथि पर बांध नहीं खोल सके। पिछले दो सप्ताहों में कर्नाटक में हुई भारी बारिश के बाद स्थिति बदली। काबिनी और कृष्णा राजा सागर जलाशयों में पानी का प्रवाह काफी बढ़ा, जिसके बाद कर्नाटक प्रशासन ने अतिरिक्त जल कावेरी में छोड़ा। इससे मेट्टूर जलाशय का स्तर 90 फीट के पार पहुँच गया।
किसानों पर असर
मेट्टूर बांध को डेल्टा किसानों की जीवन रेखा माना जाता है। यह सलेम, इरोड, नामक्कल, करूर, तिरुचि, तंजावुर, तिरुवरूर, पेरम्बलुर, नागपट्टिनम, पुदुकोट्टई, कुड्डालोर और मयिलादुथुरई सहित 13 जिलों की लगभग 16 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करता है। किसानों की माँगों के जवाब में तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की कि 1 सितंबर से 45 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए पूरे सलेम जिले में सुरक्षा बल तैनात किए गए। ओमालूर से मेचेरी और मेट्टूर तक जाने वाली सड़कों के दोनों ओर लोहे के बैरिकेड लगाए गए। हवाई अड्डे से बांध तक के मार्ग पर पार्टी के झंडे लहराए गए और भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिसबल हवाई अड्डे, बांध परिसर और काफिले के रास्ते पर तैनात रहा।
आगे क्या होगा
जल निर्वहन अगले 45 दिनों तक जारी रहेगा और इसे जलाशय में आवक तथा सिंचाई की माँग के अनुसार चरणबद्ध रूप से बढ़ाया जाएगा। यह कदम खरीफ सीजन की बुवाई के लिए समय पर पानी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है।