युद्धविराम के बीच अमेरिकी हमला: ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी बोले — 'वॉशिंगटन को पछताना पड़ेगा'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने 27 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बातचीत जारी रहते हुए अमेरिका का ईरान पर हमला यह साबित करता है कि वॉशिंगटन युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के बुनियादी सिद्धांतों का सम्मान नहीं करता। अजीजी ने दावा किया कि यह 'लापरवाही भरा उल्लंघन' अंततः अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछताने का कारण बनेगा।
मुख्य घटनाक्रम
25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में ओमानी तट के निकट सिंगापुर के ध्वज वाले वाणिज्यिक मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया। इसके जवाब में यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 26 जून को ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों के साथ-साथ तटीय रडार स्थलों पर हवाई हमले किए।
सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक व्यावसायिक जहाज पर ईरान के हमले का 'जोरदार जवाब' थी। जहाज उस समय ओमानी तट के साथ स्ट्रेट से बाहर निकल रहा था जब उसे निशाना बनाया गया।
अजीजी का बयान और ईरान की प्रतिक्रिया
इब्राहिम अजीजी ने एक्स पर लिखा, 'एक बार फिर बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें बातचीत और युद्धविराम के सिद्धांतों का कोई सम्मान नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि युद्धविराम का यह उल्लंघन 'हमेशा की तरह' अंततः अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछताने की वजह बनेगा।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच युद्धविराम समझौते को अंतिम रूप देने की बातचीत चल रही थी। गौरतलब है कि फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसे रोकने के लिए दोनों पक्ष संघर्ष विराम समझौते पर काम कर रहे थे।
इस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने पर सहमति बनाना भी शामिल था। अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई इस सप्ताह हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद वॉशिंगटन की पहली सीधी सैन्य प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट का सामरिक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और शिपिंग मार्गों पर पड़ता है।
आगे क्या होगा
इस ताज़ा घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की दिशा और भविष्य अनिश्चित हो गया है। आलोचकों का कहना है कि युद्धविराम के दौरान इस तरह की सैन्य कार्रवाइयाँ कूटनीतिक प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं। अगले कुछ दिनों में दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और बातचीत की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।