अमेरिका-इजरायल एकमत हैं या नहीं? ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एक्स पर उठाए तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा सवाल दागा है — क्या अमेरिका और इजरायल इस युद्ध के अंतिम परिणाम को लेकर वाकई एकमत हैं? यह बयान ऐसे समय में आया है जब 26 मई को अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के निकट ईरानी ठिकानों पर हमले किए, और दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम वार्ता को लेकर परस्पर विरोधाभासी संकेत सामने आ रहे हैं।
अराघची के एक्स पोस्ट में क्या कहा
अराघची ने एक्स पर लिखा, 'व्हाइट हाउस और ईरान इस बात पर अलग-अलग संकेत दे रहे हैं कि बातचीत शुरू भी हुई है या नहीं, जबकि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। भले ही ट्रंप युद्धविराम करवा लें, लेकिन यह साफ नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर एकमत हैं या नहीं। आपको क्या लगता है?' उनके इस सवाल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
एक अन्य पोस्ट में अराघची ने कहा, 'ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत को एक महीना बीत चुका है, और अब दुनिया भर की सरकारें वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करने की कोशिश कर रही हैं।'
होर्मुज पर अमेरिकी हमला और ईरान का आरोप
26 मई की सुबह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने होर्मुज स्ट्रेट के निकट कार्रवाई की। सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स के अनुसार, यह हमला आत्मरक्षा में किया गया — अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को कथित खतरे से बचाने के लिए। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही नौकाओं को निशाना बनाया, और बंदर अब्बास पोर्ट के निकट एक सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया।
ईरान ने इस कार्रवाई को सीजफायर नियमों का उल्लंघन करार देते हुए इसे दुर्भावना से प्रेरित और वादाखिलाफी बताया। तेहरान ने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है और देश इस आक्रामक कार्रवाई का 'मुकम्मल जवाब' देगा।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दाँव
अराघची ने स्पष्ट किया कि संघर्ष का वैश्विक असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितने समय तक चलता है, और ईरान कितने समय तक होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन निर्यात और मालवाहक जहाजों के आवागमन पर रोक बनाए रखता है। गौरतलब है कि होर्मुज दुनिया की सबसे व्यस्त तेल पारगमन धमनियों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिका-इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद का सवाल
अराघची का केंद्रीय तर्क यह है कि डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम की दिशा में काम कर रहे हैं, किंतु अमेरिका और इजरायल के दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य एकसमान नहीं हो सकते। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब व्हाइट हाउस और तेहरान दोनों ही वार्ता की स्थिति को लेकर अलग-अलग बयान दे रहे हैं, जिससे कूटनीतिक अनिश्चितता और गहरी हो गई है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कोई ठोस युद्धविराम समझौता संभव है, या तनाव और बढ़ेगा।