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ईरान का अमेरिका को अल्टीमेटम: 'हमारी मांगें मानो, वरना युद्ध में और गहरे धँसोगे'

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ईरान का अमेरिका को अल्टीमेटम: 'हमारी मांगें मानो, वरना युद्ध में और गहरे धँसोगे'

सारांश

ईरान के रक्षा मंत्रालय ने साफ कह दिया — युद्ध हो या बातचीत, अमेरिका और इज़रायल को ईरान की शर्तें माननी ही होंगी। इसी के साथ विदेश मंत्री अराघची ने तुर्की, कतर, ओमान, जापान और इराक के समकक्षों से बात कर क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश की।

मुख्य बातें

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रज़ा तलाए-निक ने 23 मई को कहा कि अमेरिका और इज़रायल के पास ईरान की मांगें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को नज़रअंदाज़ कर इज़रायल का पक्ष ले रहे हैं।
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तुर्की, कतर, जापान, ओमान और इराक के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग टेलीफोन वार्ता की।
वार्ताओं में क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थायी संघर्ष विराम के कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई।
ईरान-अमेरिका के बीच किसी प्रत्यक्ष वार्ता की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रज़ा तलाए-निक ने शनिवार, 23 मई को कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायल के पास ईरान की मांगें स्वीकार करने के सिवा कोई विकल्प शेष नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच स्थायी संघर्ष विराम को लेकर कूटनीतिक वार्ताओं का दौर जारी है।

रक्षा मंत्रालय का कड़ा रुख

प्रवक्ता तलाए-निक ने कहा, 'चाहे जंग हो या बातचीत, दोनों हालात में अमेरिका और इज़रायल के लिए यही एक रास्ता शेष है। अगर वे ईरान की मांगों को नहीं मानते, तो दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को दरकिनार कर पूरी तरह इज़रायल के पक्ष में खड़े हैं।

प्रवक्ता के अनुसार, ट्रंप का 'अहंकारी रवैया' अमेरिका को युद्ध के दलदल में और गहरे धकेल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते पर अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें भी सामने आ रही हैं।

विदेश मंत्री की बहुपक्षीय कूटनीति

इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को कई देशों के अपने समकक्षों के साथ टेलीफोन वार्ता की। रिपोर्टों के अनुसार, अराघची ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी, इराक के विदेश मंत्री फुआद मोहम्मद हुसैन और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से अलग-अलग बातचीत की।

इन वार्ताओं में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों, तनाव कम करने के उपायों और संघर्ष समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। गौरतलब है कि ओमान पारंपरिक रूप से ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।

क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

यह कूटनीतिक सरगर्मी ऐसे समय में तेज हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी संघर्ष विराम की शर्तों पर कोई सार्वजनिक सहमति अभी तक नहीं बन पाई है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से जारी तीखी बयानबाज़ी वार्ता की प्रक्रिया को और जटिल बना रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की यह कूटनीतिक सक्रियता — विशेष रूप से तुर्की, कतर और ओमान के साथ — यह संकेत देती है कि तेहरान क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश में है, ताकि किसी भी संभावित समझौते में उसकी स्थिति मज़बूत रहे।

आगे की राह

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच कोई प्रत्यक्ष वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में मध्यस्थ देशों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ईरान के रक्षा मंत्रालय का यह बयान वार्ता की मेज़ पर ईरान की सौदेबाज़ी की स्थिति को और मज़बूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर वार्ताकारों के लिए लचीलेपन की गुंजाइश कम हो जाती है। अराघची की बहुपक्षीय कूटनीति — तुर्की, कतर, ओमान — यह बताती है कि तेहरान जानता है कि सीधी बात से पहले मध्यस्थों का नेटवर्क ज़रूरी है। सवाल यह है कि क्या यह आक्रामक बयानबाज़ी और पर्दे के पीछे की कूटनीति एक साथ टिकाऊ है — या यह दोनों पक्षों को उस 'दलदल' में और गहरे धकेल देगी जिसका ज़िक्र खुद ईरान के प्रवक्ता ने किया।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने अमेरिका को क्या अल्टीमेटम दिया है?
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रज़ा तलाए-निक ने 23 मई को कहा कि अमेरिका और इज़रायल के पास ईरान की मांगें मानने और उसके अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें न मानने पर दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने किन देशों से बात की?
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तुर्की, कतर, जापान, ओमान और इराक के अपने समकक्षों से अलग-अलग टेलीफोन वार्ता की। इन बातचीतों में क्षेत्रीय तनाव, संघर्ष विराम के प्रयास और द्विपक्षीय मुद्दे शामिल रहे।
ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष विराम वार्ता की स्थिति क्या है?
दोनों देशों के बीच स्थायी संघर्ष विराम को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन किसी प्रत्यक्ष वार्ता या समझौते की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ओमान जैसे मध्यस्थ देश इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाए?
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को नज़रअंदाज़ कर पूरी तरह इज़रायल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप का 'अहंकारी रवैया' अमेरिका को युद्ध के दलदल में और गहरे ले जाएगा।
ओमान इस कूटनीतिक प्रक्रिया में क्यों अहम है?
ओमान पारंपरिक रूप से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। अराघची और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी के बीच हुई बातचीत में क्षेत्र में तेज़ी से बदल रहे हालात और युद्ध रोकने के कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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