अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता: मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों में अहम फोन बातचीत
सारांश
Key Takeaways
- मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलट्टी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने 25 अप्रैल को फोन पर अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रक्रिया पर चर्चा की।
- ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद में हैं, लेकिन अमेरिका से सीधी बात से इनकार किया है।
- ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान दौरे पर रवाना होने वाले हैं।
- अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास अभी भी परमाणु डील के लिए 'खुली खिड़की' मौजूद है।
- तेहरान के इमाम खुमैनी हवाई अड्डे से मस्कट, इस्तांबुल और मदीना के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शनिवार सुबह फिर शुरू हुईं।
- दोनों विदेश मंत्रियों ने दूसरे दौर की वार्ता और स्थायी युद्धविराम के लिए अनुकूल माहौल बनाने की उम्मीद जताई।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलट्टी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार के बीच शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक रास्ते को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उल्लेखनीय है कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हुए हैं, जबकि ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से स्पष्ट इनकार किया है।
मिस्र-पाकिस्तान वार्ता का मुख्य घटनाक्रम
मिस्र के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बद्र अब्देलट्टी और इशाक डार ने इस फोन वार्ता में दूसरे दौर की बातचीत की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों मंत्रियों ने उम्मीद जताई कि आगामी वार्ता में दोनों पक्षों के बीच स्थायी युद्धविराम के समर्थन, तनाव में कमी लाने और चल रही लड़ाई को समाप्त करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर सहमति बन सकेगी।
अब्देलट्टी ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और अरब खाड़ी देशों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। यह बयान इस बात का संकेत है कि मिस्र इस कूटनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है।
अमेरिकी दूतों का इस्लामाबाद दौरा
यह टेलीफोन वार्ता ऐसे नाजुक समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान रवाना होने वाले थे। इससे साफ जाहिर होता है कि इस्लामाबाद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अनौपचारिक कूटनीतिक सेतु के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई जा रही है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस बीच स्पष्ट किया कि ईरान के पास अभी भी एक 'खुली खिड़की' मौजूद है, जिसके जरिए वह सत्यापन योग्य तरीके से परमाणु हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा छोड़ कर किसी समझौते पर पहुंच सकता है। यह बयान अमेरिका की नरम रुख की ओर संकेत करता है, लेकिन साथ ही दबाव की नीति भी जारी है।
ईरान का रुख और हवाई सेवाओं की बहाली
ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शनिवार सुबह कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पुनः शुरू कर दी गईं। शुरुआती उड़ानें मस्कट, इस्तांबुल और सऊदी अरब के मदीना के लिए रवाना हुईं। इसके अलावा देश के उत्तर-पूर्व में स्थित मशहद हवाई अड्डा भी इसी सप्ताह के शुरुआत में दोबारा खोल दिया गया था।
हवाई सेवाओं की बहाली को कूटनीतिक तनाव में हल्की नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि ईरान ने अभी तक अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की संभावना को खारिज ही रखा है।
गहरा कूटनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह घटनाक्रम उस व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए जब 2015 के ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत लगभग ठप पड़ी है। ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रफ्तार को देखते हुए, यह कूटनीतिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान की भूमिका यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय है — एक मुस्लिम-बहुल परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान दोनों से संवाद की स्थिति में है। मिस्र का सक्रिय होना भी इस प्रक्रिया को अरब जगत की स्वीकृति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आने वाले दिनों में विटकॉफ और कुशनर की इस्लामाबाद यात्रा के नतीजे और ईरानी विदेश मंत्री अराघची की पाकिस्तान यात्रा के दौरान होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि यह कूटनीतिक प्रयास किसी ठोस समझौते की दिशा में बढ़ता है या नहीं।