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ट्रंप का दावा: इजरायल-ईरान दोनों चाहते हैं तत्काल सीजफायर, 'मूर्खता' न बने बाधा

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ट्रंप का दावा: इजरायल-ईरान दोनों चाहते हैं तत्काल सीजफायर, 'मूर्खता' न बने बाधा

सारांश

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि इजरायल और ईरान दोनों तत्काल सीजफायर के पक्ष में हैं, लेकिन 'मूर्खता' शांति की राह में बाधा बन सकती है। यह बयान ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई के बाद आया है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जून 2026 को दावा किया कि इजरायल और ईरान दोनों तत्काल सीजफायर चाहते हैं।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी कि 'मूर्खता या अज्ञानता' शांति प्रक्रिया को बाधित कर सकती है।
अंतिम समझौते तक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी — ट्रंप का स्पष्ट संदेश।
रविवार, 7 जून को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं; इजरायल ने भी जवाबी हमले किए।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सभी पक्षों से युद्धविराम बहाल करने की अपील की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जून 2026 को दावा किया कि इजरायल और ईरान दोनों 'तत्काल संघर्ष विराम' के पक्ष में हैं और शांति वार्ता अंतिम चरण में है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में चेतावनी दी कि केवल 'मूर्खता या अज्ञानता' ही इस शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है।

ट्रंप का ट्रुथ सोशल संदेश

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इजरायल और ईरान दोनों तुरंत संघर्ष विराम चाहते हैं। शांति को लेकर अंतिम बातचीत आगे बढ़ रही है, बस मूर्खता या अज्ञानता शांति की राह में बाधा न बने।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'अंतिम समझौता होने तक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी और प्रभावी बनी रहेगी।' इससे पहले एक संक्षिप्त पोस्ट में उन्होंने दोनों पक्षों से तुरंत 'शूटिंग रोकने' की अपील की थी।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

रविवार, 7 जून को ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइलें दागीं। तेहरान ने हिज्बुल्लाह पर हुए हमले को सीजफायर का उल्लंघन करार देते हुए यह कार्रवाई की। इसके जवाब में इजरायल ने भी ईरान पर हमले शुरू कर दिए। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम की बहाली के लिए प्रयासरत था।

ब्रिटेन की प्रतिक्रिया

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी हिंसा की पुनरावृत्ति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'हिंसा फिर से शुरू होने को लेकर मैं बेहद चिंतित हूँ। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सभी पक्ष फिर से युद्धविराम का पालन करें।' स्टार्मर ने आगे कहा, 'स्थायी शांति की दिशा में गंभीर बातचीत चल रही है। इस संघर्ष का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है।'

आगे क्या होगा

ट्रंप ने संकेत दिया कि 'चीजें तेजी से आगे बढ़नी चाहिए', जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि निकट भविष्य में कोई ठोस समझौता सामने आ सकता है। हालाँकि, जमीनी स्तर पर सीजफायर की बहाली तब तक अनिश्चित बनी रहेगी जब तक दोनों पक्ष औपचारिक रूप से सहमति नहीं जताते। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के साथ, कूटनीतिक प्रयासों की दिशा और गति अगले कुछ घंटों में निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ ईरान और इजरायल के बीच ताजा मिसाइल हमले। 'मूर्खता' जैसे शब्द का इस्तेमाल दोनों पक्षों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति लगती है, न कि किसी ठोस समझौते की पुष्टि। नाकेबंदी जारी रखने की शर्त बताती है कि वाशिंगटन वार्ता में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है। ब्रिटेन की चिंता यह संकेत देती है कि पश्चिमी गठबंधन के भीतर भी इस संघर्ष को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने इजरायल-ईरान सीजफायर को लेकर क्या कहा?
ट्रंप ने 8 जून 2026 को ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि इजरायल और ईरान दोनों तत्काल संघर्ष विराम चाहते हैं और शांति वार्ता अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम समझौते तक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी।
ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमला क्यों किया?
ईरान ने रविवार, 7 जून को इजरायल पर मिसाइलें दागीं क्योंकि तेहरान ने हिज्बुल्लाह पर हुए इजरायली हमले को सीजफायर का उल्लंघन माना। इसके जवाब में इजरायल ने भी ईरान पर हमले शुरू कर दिए।
ब्रिटेन ने इस संघर्ष पर क्या रुख अपनाया?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हिंसा की पुनरावृत्ति पर गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से युद्धविराम बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर, यूनाइटेड किंगडम सहित, पड़ रहा है।
क्या इजरायल-ईरान के बीच जल्द शांति समझौता हो सकता है?
ट्रंप के अनुसार शांति वार्ता अंतिम चरण में है और 'चीजें तेजी से आगे बढ़नी चाहिए।' हालाँकि, जमीनी स्तर पर हमले जारी रहने के कारण किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ट्रंप ने 'नाकेबंदी' को लेकर क्या स्पष्ट किया?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होने तक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी और प्रभावी बनी रहेगी। यह बयान वार्ता में अमेरिकी दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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