27 जुलाई 2026
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मध्य पूर्व संकट: चीन ने अमेरिका-ईरान से माँगा संयम, 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

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मध्य पूर्व संकट: चीन ने अमेरिका-ईरान से माँगा संयम, 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत के बाद चीन ने तत्काल युद्धविराम की माँग की है। ईरान ने कथित तौर पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया — जिसमें जॉर्डन का अल-अजराक एयर बेस और बहरीन का पाँचवाँ बेड़ा शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराते इस संकट की आँच अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों तक पहुँच रही है।

मुख्य बातें

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 11 जून 2026 को अमेरिका और ईरान समेत सभी पक्षों से तत्काल संयम और संवाद की अपील की।
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा और रडार ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया; राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने का जवाब बताया।
आईआरजीसी ने कथित तौर पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया, जिसमें अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन) और बहरीन का पाँचवाँ बेड़ा शामिल है।
एफ-35 , एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा; आईआरजीसी के बयान स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए।
चीन ने मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करने और स्थायी युद्धविराम की दिशा में काम करने की माँग की।

चीनी विदेश मंत्रालय ने 11 जून 2026 को बीजिंग में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में मध्य पूर्व में जारी सैन्य टकराव को तत्काल रोकने की माँग की और अमेरिकाईरान समेत सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान ने कथित तौर पर 22 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया और क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया।

चीन का आधिकारिक रुख

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने ब्रीफिंग में कहा, 'सभी संबंधित पक्ष एक-दूसरे को उकसाना और तनाव बढ़ाने वाली सैन्य गतिविधियाँ तुरंत बंद करें और संवाद स्थापित करें।' 10 जून के बाद से बिगड़ते हालात पर सवाल उठने पर उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की कोशिशों का समर्थन किया जाना चाहिए ताकि जल्द से जल्द स्थायी युद्धविराम हो सके। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।

अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया

बुधवार को यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया कि उसने आत्मरक्षा के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा तंत्र, नियंत्रण केंद्रों और निगरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यह हमला एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में किया गया था।

इसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार, बहरीन और जॉर्डन समेत विभिन्न देशों में कुल 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया गया, जिसमें बहरीन स्थित अमेरिका के पाँचवें बेड़े को भी निशाना बताया गया।

आईआरजीसी का बैलिस्टिक मिसाइल अभियान

गुरुवार को भी सैन्य कार्रवाई जारी रही। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी एफ-35, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने कथित तौर पर गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से यह अभियान शुरू किया।

आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के बयान के अनुसार, इन हमलों में अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन) और वहाँ स्थित अमेरिकी सेना के नियंत्रण केंद्रों को भी निशाना बनाया गया। ये सभी दावे आईआरजीसी के अपने बयानों पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक निहितार्थ

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस क्षेत्र में किसी भी व्यापक संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर सीधा पड़ सकता है। चीन की यह अपील ऐसे समय आई है जब वह स्वयं मध्य पूर्व के कई देशों के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा साझेदारी रखता है। आने वाले घंटों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिक्रिया और क्षेत्र में तैनात अन्य शक्तियों का रुख निर्णायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें कोई ठोस मध्यस्थता प्रस्ताव नहीं है — यह संकट के समय बीजिंग की परिचित 'संयम की भाषा' है जो किसी एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराती। असली सवाल यह है कि जब अमेरिका और ईरान दोनों सक्रिय सैन्य कार्रवाई में हैं, तो चीन की अपील का व्यावहारिक असर कितना होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव चीन के अपने ऊर्जा हितों के लिए भी खतरा है, फिर भी बीजिंग ने अब तक कोई सक्रिय कूटनीतिक भूमिका नहीं निभाई है — जो उसकी 'शांतिदूत' छवि और वास्तविक कार्रवाई के बीच की खाई को उजागर करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच ताज़ा तनाव क्यों बढ़ा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के जवाब में सेंटकॉम ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा ठिकानों पर कार्रवाई की। इसके बाद ईरान ने कथित तौर पर 22 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए।
चीन ने मध्य पूर्व संकट पर क्या कहा?
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 11 जून 2026 को सभी पक्षों से उकसावे और सैन्य तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियाँ तुरंत बंद करने की अपील की। चीन ने स्थायी युद्धविराम के लिए मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन करने की भी माँग की।
आईआरजीसी ने किन ठिकानों पर हमले का दावा किया?
आईआरजीसी के बयान के अनुसार, हमलों में अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन), बहरीन स्थित अमेरिका का पाँचवाँ बेड़ा, और एफ-35, एफ-15 व एफ-16 विमानों की तैनाती वाले ठिकाने शामिल थे। ये दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव का वैश्विक असर क्या हो सकता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर सीधा और व्यापक असर पड़ सकता है।
क्या चीन इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है?
चीन ने मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई ठोस मध्यस्थता प्रस्ताव सामने नहीं आया है। चीन के ईरान और खाड़ी देशों दोनों के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध हैं, जो उसकी भूमिका को जटिल बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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