मध्य पूर्व संकट: चीन ने अमेरिका-ईरान से माँगा संयम, 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय ने 11 जून 2026 को बीजिंग में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में मध्य पूर्व में जारी सैन्य टकराव को तत्काल रोकने की माँग की और अमेरिका व ईरान समेत सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान ने कथित तौर पर 22 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया और क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया।
चीन का आधिकारिक रुख
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने ब्रीफिंग में कहा, 'सभी संबंधित पक्ष एक-दूसरे को उकसाना और तनाव बढ़ाने वाली सैन्य गतिविधियाँ तुरंत बंद करें और संवाद स्थापित करें।' 10 जून के बाद से बिगड़ते हालात पर सवाल उठने पर उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की कोशिशों का समर्थन किया जाना चाहिए ताकि जल्द से जल्द स्थायी युद्धविराम हो सके। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।
अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया
बुधवार को यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया कि उसने आत्मरक्षा के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा तंत्र, नियंत्रण केंद्रों और निगरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यह हमला एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में किया गया था।
इसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार, बहरीन और जॉर्डन समेत विभिन्न देशों में कुल 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया गया, जिसमें बहरीन स्थित अमेरिका के पाँचवें बेड़े को भी निशाना बताया गया।
आईआरजीसी का बैलिस्टिक मिसाइल अभियान
गुरुवार को भी सैन्य कार्रवाई जारी रही। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी एफ-35, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने कथित तौर पर गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से यह अभियान शुरू किया।
आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के बयान के अनुसार, इन हमलों में अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन) और वहाँ स्थित अमेरिकी सेना के नियंत्रण केंद्रों को भी निशाना बनाया गया। ये सभी दावे आईआरजीसी के अपने बयानों पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक निहितार्थ
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस क्षेत्र में किसी भी व्यापक संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर सीधा पड़ सकता है। चीन की यह अपील ऐसे समय आई है जब वह स्वयं मध्य पूर्व के कई देशों के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा साझेदारी रखता है। आने वाले घंटों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिक्रिया और क्षेत्र में तैनात अन्य शक्तियों का रुख निर्णायक हो सकता है।