अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव पर रूस की कड़ी चेतावनी, दोनों पक्षों से तत्काल संयम की माँग
सारांश
मुख्य बातें
रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच तेज़ी से बढ़ते सैन्य टकराव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से तत्काल सभी सैन्य अभियान रोकने की अपील की है। मास्को के अनुसार यह तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद का सबसे गंभीर दौर है। जहाँ अमेरिका अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा बता रहा है, वहीं ईरान इसे जवाबी हमला करार दे रहा है।
रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि रूस 'नए दौर के अमेरिका-ईरान सशस्त्र संघर्ष को लेकर अत्यंत चिंतित' है। उन्होंने स्थिति को 'बिना उकसावे के अमेरिका-इज़राइल की ईरान के खिलाफ कार्रवाई' बताते हुए इसे गंभीर करार दिया।
ज़ाखारोवा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस दोनों पक्षों से अपील करता है कि वे संयम बनाए रखें और तुरंत सभी सैन्य कार्रवाइयाँ रोकें, ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।
ईरान के हमले और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
इस बीच ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए इन्हें अमेरिकी कार्रवाई का जवाब बताया।
बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर किए गए इन ईरानी हमलों की यूएई और कतर समेत तमाम खाड़ी देशों ने कड़ी आलोचना की है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में कूटनीतिक संपर्क पहले से ही न्यूनतम स्तर पर है।
चीन की भी चिंता, संयम की अपील
चीन ने भी इस संकट पर चिंता जाहिर की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'सभी पक्षों को संयम बनाए रखने की ज़रूरत है, संघर्ष को और बढ़ाने से बचना चाहिए। इससे क्षेत्र में हालात बनेंगे नहीं, बल्कि और बिगड़ेंगे ही।'
रूस-ईरान संबंधों की पृष्ठभूमि
रूस और ईरान के संबंध लंबे समय से अमेरिका की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और इराक़ में नीतियों को लेकर साझा अविश्वास पर टिके रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह रणनीतिक साझेदारी समय के साथ और मज़बूत हुई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई मौकों पर ईरान के साथ संबंधों को 'रणनीतिक प्राथमिकता' बता चुके हैं, जो मास्को की इस संघर्ष में गहरी दिलचस्पी को रेखांकित करता है।
आगे क्या
रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया है कि वह क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास तेज़ करे। यदि दोनों पक्ष सैन्य अभियान जारी रखते हैं, तो पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष का ख़तरा और गहरा हो सकता है।