गालिबाफ का अमेरिका पर पलटवार: 'हम उनकी हर चाल पहचानते हैं', 9 दिनों से जारी है अमेरिका-ईरान जंग
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 20 जुलाई को अमेरिका पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिकी शायद ईरान की बुद्धिमत्ता को कमज़ोर आँक रहे हैं, लेकिन ईरान अब उनकी हर रणनीतिक चाल को भली-भाँति समझता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच 9 दिनों से सशस्त्र संघर्ष जारी है और मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है।
गालिबाफ का एक्स पर सीधा हमला
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अमेरिकी लोग लगातार इस क्षेत्र में नए सैन्य उपकरण ला रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि वे युद्ध रोकना चाहते हैं। उन्होंने शायद हमारी समझ को अपनी बुद्धि की तरह ही कमज़ोर मान रखा है।' उन्होंने आगे कहा कि ईरान अब अमेरिकी चालों को पहचानने में माहिर हो चुका है और इसी आधार पर उसने खुद को तैयार किया है।
गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि किसी के शब्दों से अधिक ज़रूरी है कि उसके कार्य भी उन्हीं शब्दों की पुष्टि करें — न कि उनका खंडन।
मुख्य घटनाक्रम: दोनों ओर से हमले जारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हो चुका है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना बताया गया है। वहीं ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने ऑपरेशन 'सैकेह' (लाइटनिंग) के तहत कुवैत में स्थित अमेरिका के दो प्रमुख सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले किए।
ईरानी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से बार-बार किए जा रहे घातक हमलों के जवाब में की गई है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच एमओयू समझौता टूटने के बाद यह संघर्ष फिर से भड़क उठा है।
मध्यस्थता के प्रस्ताव, पर शर्तें कड़ी
सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्वीकार किया कि मध्यस्थों की ओर से कुछ प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। भारत में ईरानी दूतावास ने अपनी एक्स पोस्ट में बाघेई के हवाले से लिखा, 'हमें मध्यस्थों की तरफ से कुछ प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन इस समय मैं उनकी जानकारी साझा नहीं करना चाहूंगा। मैं इतनी पुष्टि जरूर कर सकता हूं कि ऐसे प्रस्ताव हमें भेजे गए हैं।'
हालाँकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया कि युद्धविराम तब तक संभव नहीं जब तक ईरान को लड़ाई में मज़बूत बढ़त न मिल जाए। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, 'बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो, जहाँ उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं।'
क्षेत्रीय असर और आगे की राह
यह संघर्ष मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता का कारण बन रहा है। एक ओर ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका ईरान की सैन्य संरचनाओं पर हमले जारी रखे हुए है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और क्षेत्रीय राजनय दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। मध्यस्थता के प्रस्तावों के बावजूद दोनों पक्षों की कड़ी शर्तें संकेत देती हैं कि निकट भविष्य में युद्धविराम की संभावना सीमित है।