ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम वार्ता: तेहरान कर रहा 14-सूत्रीय मसौदे की समीक्षा, पाकिस्तान बना मध्यस्थ
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रस्तावित संघर्ष विराम के 14-सूत्रीय मसौदे पर वार्ता जारी है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 21 मई को पुष्टि की कि अमेरिकी पक्ष के विचार प्राप्त हो चुके हैं और उनकी समीक्षा की जा रही है। यह बयान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की तेहरान यात्रा के दौरान आया।
मुख्य घटनाक्रम
नूर न्यूज एजेंसी ने गुरुवार को दावा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम दस्तावेज की भाषा को लेकर पाकिस्तान के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है। प्रवक्ता बाघेई ने कहा, 'ईरान के 14 बिंदुओं वाले मूल मसौदे के आधार पर कई बार संदेशों का आदान-प्रदान किया गया है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमें अमेरिकी पक्ष के विचार प्राप्त हुए हैं और हम उनकी समीक्षा कर रहे हैं।'
गुरुवार को ईरानी न्यूज एजेंसी आईएसएनए ने बताया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी ईरान रवाना हुए। इससे एक दिन पहले गृह मंत्री नकवी तेहरान पहुँचे थे — और यह एक सप्ताह के भीतर उनकी दूसरी ईरान यात्रा थी।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका
पाकिस्तान ने 8 अप्रैल को युद्धविराम कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन तब उसकी कूटनीतिक कोशिशें सफल नहीं हो पाई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद इस विफलता के बावजूद दोनों पक्षों के बीच संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश में लगा है। बताया जा रहा है कि जनरल असीम मुनीर दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने और संभावित समझौते का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान की नीयत पर सवाल
हालाँकि, पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर कुछ रिपोर्टों ने सवाल खड़े किए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मध्य पूर्व तनाव के बीच ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब को चीन के सहयोग से निर्मित जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट्स का पूरा स्क्वाड्रन — कथित तौर पर करीब 16 विमान — बेचा। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 8,000 सैनिक, दो ड्रोन स्क्वाड्रन और चीनी एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए बताए जाते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह एक साथ शांतिदूत और हथियार आपूर्तिकर्ता की भूमिका निभाने की कोशिश है।
आगे क्या
गौरतलब है कि ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का यह दौर ऐसे समय में चल रहा है जब मध्य पूर्व में तनाव का व्यापक परिदृश्य बना हुआ है। 14-सूत्रीय मसौदे पर अमेरिकी पक्ष की प्रतिक्रिया की समीक्षा के बाद ईरान की अगली स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। पाकिस्तान की दोहरी भूमिका — मध्यस्थ और हथियार आपूर्तिकर्ता — इस वार्ता प्रक्रिया की जटिलता को और बढ़ाती है।