श्रीलंका की नेशनल आर्ट गैलरी से 42 प्राचीन पेंटिंग्स गायब, संसद में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका की नेशनल आर्ट गैलरी से 42 अनमोल प्राचीन पेंटिंग्स के लापता होने का मामला 21 मई को संसद में उजागर हुआ, जब बुद्धशासन, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुनील सेनेवी ने इसकी आधिकारिक जानकारी दी। कोलंबो स्थित इस ऐतिहासिक गैलरी में हुई इस चूक की जड़ें वर्ष 2015 में हुए एक सर्वेक्षण तक जाती हैं, जिसमें पहली बार यह विसंगति सामने आई थी।
मुख्य घटनाक्रम
एसजेबी सांसद मुजीबुर रहमान के प्रश्न के उत्तर में मंत्री सेनेवी ने संसद को बताया कि गैलरी के आधिकारिक रजिस्टर और स्टॉक बुक में कुल 281 पेंटिंग्स दर्ज हैं। परंतु जब भौतिक गणना की गई, तो केवल 239 पेंटिंग्स ही मौजूद पाई गईं — यानी 42 पेंटिंग्स का कोई अता-पता नहीं। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लापता पेंटिंग्स कौन-सी हैं।
उल्लेखनीय है कि 2015 में तत्कालीन सांस्कृतिक मामलों के निदेशक द्वारा नियुक्त सर्वेक्षण बोर्ड ने गैलरी में मौजूद पेंटिंग्स और मूर्तियों का फिजिकल सत्यापन किया था। उसी जांच में यह विसंगति पहली बार दर्ज हुई थी, लेकिन एक दशक बाद भी मामला सार्वजनिक नहीं हुआ था।
जांच की स्थिति
मंत्री ने सदन को सूचित किया कि बुद्धशासन और धार्मिक मामलों के मंत्रालय के सचिव द्वारा गठित एक जांच समिति ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस भी स्वतंत्र रूप से मामले की जांच कर रही है। संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, हालांकि अब तक किसी को आरोपी नहीं बनाया गया है।
गैलरी की पृष्ठभूमि
श्रीलंका नेशनल आर्ट गैलरी कोलंबो के सिनेमन गार्डन क्षेत्र में स्थित देश की पहली राज्य-प्रायोजित कला दीर्घा है। यह राष्ट्रीय संग्रहालय और विहारमहादेवी पार्क के समीप स्थित है और श्रीलंका की पारंपरिक एवं समकालीन कला का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक केंद्र मानी जाती है। रिपोर्टों के अनुसार, नवीनीकरण कार्य के चलते यह गैलरी 2012 से ही बंद पड़ी है।
आगे क्या होगा
संसद में पूछे जाने पर मंत्री सेनेवी ने दावा किया कि सरकार की योजना है कि गैलरी को इस वर्ष के अंत तक आम जनता के लिए पुनः खोल दिया जाएगा। हालांकि, लापता पेंटिंग्स की पहचान और उनकी बरामदगी की समय-सीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह मामला श्रीलंका की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सरकारी संस्थाओं में जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है।