यूएन सुरक्षा परिषद में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: रमजान में काबुल अस्पताल पर हमले में 269 मौतें, बताया अमानवीय

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यूएन सुरक्षा परिषद में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: रमजान में काबुल अस्पताल पर हमले में 269 मौतें, बताया अमानवीय

सारांश

रमजान में नमाजियों पर हमला, नशा मुक्ति अस्पताल में 269 मौतें, और 94,000 शरणार्थी — भारत ने यूएन सुरक्षा परिषद में यूएनएएमए के आँकड़ों के साथ पाकिस्तान की 'अंतरराष्ट्रीय कानून' वाली छवि की कलई खोल दी।

मुख्य बातें

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने 21 मई 2026 को यूएन सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति की कड़ी आलोचना की।
यूएनएएमए के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों में 750 अफगान नागरिक मारे गए या घायल हुए।
रमजान में काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर हमले में 269 मौतें और 122 घायल ; हमला तरावीह के बाद हुआ।
पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा से 94,000 से अधिक अफगान नागरिक शरणार्थी बनने पर मजबूर।
हरीश ने 1971 ऑपरेशन सर्चलाइट और चार लाख महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 21 मई 2026 को भारत ने पाकिस्तान की दोहरी नीति को कटघरे में खड़ा किया — एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देना और दूसरी ओर अफगानिस्तान में निर्दोष नागरिकों पर बेरहम हवाई हमले करना। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2026 की पहली तिमाही में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों में 750 अफगान नागरिक मारे गए या घायल हुए।

काबुल अस्पताल पर क्रूर हवाई हमला

हरीश ने यूएनएएमए की 10 मई को जारी रिपोर्ट 'अफगानिस्तान में सीमा पार नागरिक हताहत' का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि मार्च 2026 में रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर हवाई हमला किया। यह हमला उस वक्त हुआ जब तरावीह की नमाज समाप्त हुई थी और कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे।

यूएनएएमए के आँकड़ों के अनुसार, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 लोग घायल हुए। हरीश ने स्पष्ट किया कि यह अस्पताल किसी भी मानक से सैन्य ठिकाना नहीं था।

पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर भारत का कड़ा बयान

चीन की अध्यक्षता में आयोजित 'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषयक खुली बहस में हरीश ने पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के भारत-विरोधी बयान और कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी का करारा जवाब दिया।

हरीश ने कहा, "दुनिया पाकिस्तान के प्रचार को अच्छी तरह समझती है। उसमें न भरोसा है, न कानून का सम्मान और न ही नैतिकता।" उन्होंने आगे कहा कि यह गहरी विडंबना है कि जिस देश का इतिहास नरसंहार जैसे अपराधों से भरा हुआ है, वह भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का साहस दिखा रहा है।

94,000 से अधिक अफगान शरणार्थी बनने पर मजबूर

भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94,000 से अधिक अफगान नागरिक अपने ही देश में शरणार्थी बनने पर विवश हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही गहरे मानवीय संकट से जूझ रहा है।

गौरतलब है कि यूएनएएमए की रिपोर्ट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में हुई अधिकांश हताहत की घटनाएं पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण हुईं — जो पिछले वर्षों की तुलना में एक चिंताजनक वृद्धि है।

1971 के नरसंहार का संदर्भ

हरीश ने पाकिस्तान की हिंसक प्रवृत्ति को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के विरुद्ध संगठित नरसंहार को अंजाम दिया था और चार लाख महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध किए थे।

यह टिप्पणी पाकिस्तान के उस दावे को सीधी चुनौती थी जिसमें वह खुद को मानवाधिकारों का पैरोकार बताता है। भारत के इस कड़े बयान के बाद सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की स्थिति कूटनीतिक रूप से कमज़ोर पड़ती दिखी।

आगे क्या होगा

भारत के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पाकिस्तान पर टिकी हैं। यूएनएएमए की रिपोर्ट अब सुरक्षा परिषद के विचार-विमर्श का हिस्सा बन चुकी है, और आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान को इन हमलों के लिए जवाबदेह ठहराने हेतु ठोस अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ करना पाकिस्तान के लिए कठिन होगा। विडंबना यह है कि जिस 'नागरिक सुरक्षा' बहस में पाकिस्तान ने कश्मीर उठाया, उसी मंच पर उसके अपने हवाई हमलों में रमजान के दौरान अस्पताल के मरीज़ मारे गए — यह नैतिक दिवालियापन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बेनकाब हुआ। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा परिषद इन आँकड़ों को महज रिकॉर्ड में दर्ज करेगी या पाकिस्तान पर ठोस जवाबदेही सुनिश्चित करेगी — पिछला अनुभव बताता है कि भू-राजनीतिक समीकरण अक्सर न्याय पर भारी पड़ते हैं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
भारत ने यूएनएएमए की रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने 2026 की पहली तिमाही में अफगानिस्तान में 750 नागरिकों को हताहत किया और रमजान में काबुल के एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हवाई हमले में 269 लोगों की जान ली। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया।
काबुल के ओमिद अस्पताल पर हमला कब और कैसे हुआ?
यूएनएएमए के अनुसार मार्च 2026 में रमजान के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर हवाई हमला किया। यह हमला तरावीह की नमाज के बाद उस वक्त हुआ जब मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे; इसमें 269 लोगों की मौत हुई और 122 घायल हुए।
पाकिस्तान की अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा का असर क्या हुआ?
यूएनएएमए की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों के कारण 94,000 से अधिक अफगान नागरिक अपने ही देश में विस्थापित होकर शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। 2026 की पहली तिमाही में 750 नागरिक मारे गए या घायल हुए, जिनमें अधिकांश घटनाएं हवाई हमलों से हुईं।
भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे पर क्या जवाब दिया?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि यह गहरी विडंबना है कि नरसंहार के इतिहास वाला देश भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहा है। उन्होंने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट में पाकिस्तान द्वारा अपने ही नागरिकों के विरुद्ध किए गए नरसंहार और चार लाख महिलाओं पर हुए अत्याचारों का उल्लेख किया।
यूएनएएमए की 'सीमा पार नागरिक हताहत' रिपोर्ट क्या कहती है?
यूएनएएमए ने 10 मई 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों के कारण 2026 की पहली तिमाही में 750 अफगान नागरिक हताहत हुए। रिपोर्ट में काबुल के नशा मुक्ति अस्पताल पर हमले को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है, जिसमें 269 लोग मारे गए।
राष्ट्र प्रेस
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