यूएन सुरक्षा परिषद में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: रमजान में काबुल अस्पताल पर हमले में 269 मौतें, बताया अमानवीय
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 21 मई 2026 को भारत ने पाकिस्तान की दोहरी नीति को कटघरे में खड़ा किया — एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देना और दूसरी ओर अफगानिस्तान में निर्दोष नागरिकों पर बेरहम हवाई हमले करना। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2026 की पहली तिमाही में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों में 750 अफगान नागरिक मारे गए या घायल हुए।
काबुल अस्पताल पर क्रूर हवाई हमला
हरीश ने यूएनएएमए की 10 मई को जारी रिपोर्ट 'अफगानिस्तान में सीमा पार नागरिक हताहत' का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि मार्च 2026 में रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर हवाई हमला किया। यह हमला उस वक्त हुआ जब तरावीह की नमाज समाप्त हुई थी और कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे।
यूएनएएमए के आँकड़ों के अनुसार, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 लोग घायल हुए। हरीश ने स्पष्ट किया कि यह अस्पताल किसी भी मानक से सैन्य ठिकाना नहीं था।
पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर भारत का कड़ा बयान
चीन की अध्यक्षता में आयोजित 'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषयक खुली बहस में हरीश ने पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के भारत-विरोधी बयान और कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी का करारा जवाब दिया।
हरीश ने कहा, "दुनिया पाकिस्तान के प्रचार को अच्छी तरह समझती है। उसमें न भरोसा है, न कानून का सम्मान और न ही नैतिकता।" उन्होंने आगे कहा कि यह गहरी विडंबना है कि जिस देश का इतिहास नरसंहार जैसे अपराधों से भरा हुआ है, वह भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का साहस दिखा रहा है।
94,000 से अधिक अफगान शरणार्थी बनने पर मजबूर
भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94,000 से अधिक अफगान नागरिक अपने ही देश में शरणार्थी बनने पर विवश हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही गहरे मानवीय संकट से जूझ रहा है।
गौरतलब है कि यूएनएएमए की रिपोर्ट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में हुई अधिकांश हताहत की घटनाएं पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण हुईं — जो पिछले वर्षों की तुलना में एक चिंताजनक वृद्धि है।
1971 के नरसंहार का संदर्भ
हरीश ने पाकिस्तान की हिंसक प्रवृत्ति को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के विरुद्ध संगठित नरसंहार को अंजाम दिया था और चार लाख महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध किए थे।
यह टिप्पणी पाकिस्तान के उस दावे को सीधी चुनौती थी जिसमें वह खुद को मानवाधिकारों का पैरोकार बताता है। भारत के इस कड़े बयान के बाद सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की स्थिति कूटनीतिक रूप से कमज़ोर पड़ती दिखी।
आगे क्या होगा
भारत के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पाकिस्तान पर टिकी हैं। यूएनएएमए की रिपोर्ट अब सुरक्षा परिषद के विचार-विमर्श का हिस्सा बन चुकी है, और आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान को इन हमलों के लिए जवाबदेह ठहराने हेतु ठोस अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाना चाहिए।