पाकिस्तानी हवाई हमलों में १३ अफगान नागरिकों की जान गई, जिसमें बच्चे भी शामिल: यूएनएएमए
सारांश
Key Takeaways
- १३ नागरिकों की हुई मौत, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
- पाकिस्तानी हवाई हमलों की यूएनएएमए ने निंदा की।
- आवश्यकता है अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की।
काबुल, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने यह पुष्टि की है कि पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा किए गए हवाई हमलों में १३ नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यह जानकारी मंगलवार को स्थानीय मीडिया ने यूएनएएमए के हवाले से दी।
अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने यूएनएएमए की एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि हालिया हवाई हमलों में १३ अफगान नागरिक मारे गए, जबकि ७ लोग घायल हुए। ये हमले नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में २१-२२ फरवरी की रात को किए गए थे।
पक्तिका के बरमल में एक स्कूल और मस्जिद को लक्षित किया गया, वहीं ओर्गुन जिले में एक घर पर हवाई हमला किया गया।
यूएनएएमए ने पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इसके साथ ही, उन्होंने इस मामले की पारदर्शी जांच की भी मांग की है और घटनास्थल पर सुरक्षा उपाय बढ़ाने की सिफारिश की है।
हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव में वृद्धि हुई है।
२२ फरवरी को, अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी सैन्य शासन पर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के रिहायशी इलाकों में जानलेवा हवाई हमले करने का आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप कई आम नागरिकों की मौत हुई।
मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में एक मदरसा और कई रिहायशी घरों को लक्षित किया गया, जिससे महिलाओं और बच्चों समेत कई आम नागरिक मारे गए और घायल हुए।
हमले की कड़ी निंदा करते हुए, अफगान मंत्रालय ने इसे अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन और "अंतरराष्ट्रीय कानून, अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों और इस्लामी मूल्यों" का उल्लंघन बताया।
अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश की स्वतंत्रता और उसके नागरिकों की सुरक्षा उसकी "धार्मिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय कर्तव्य" है, साथ ही चेतावनी दी कि "सही समय पर उचित और सोच-समझकर प्रतिक्रिया दी जाएगी।"
मंत्रालय ने यह भी कहा कि "आम लोगों और धार्मिक संस्थानों पर हमले पाकिस्तानी सेना की खुफिया और सुरक्षा विफलताओं का प्रमाण हैं, और बार-बार होने वाले ये हमले उनकी आंतरिक कमजोरियों को कभी नहीं छिपा पाएंगे।"