एमनेस्टी इंटरनेशनल ने काबुल हमले पर गंभीर चिंताओं का इजहार किया, पाकिस्तान से जवाब मांगा
सारांश
Key Takeaways
- काबुल में पाकिस्तान का हवाई हमला मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
- 400 से अधिक नागरिकों की जान गई है।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हमले की गंभीरता पर चिंता जताई है।
- अब पाकिस्तान को जानकारी साझा करनी चाहिए।
- स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।
काबुल/इस्लामाबाद, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक नशामुक्ति पुनर्वास केंद्र पर पाकिस्तान के हालिया हवाई हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गहरी चिंता व्यक्त की है। इस हमले में 400 से अधिक नागरिकों की जान गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया था कि 16 मार्च को काबुल के एक नशामुक्ति पुनर्वास केंद्र पर किया गया हवाई हमला एक गोला-बारूद भंडार को निशाना बनाकर किया गया। इस पर प्रतिक्रिया में एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया के लिए उप-क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि पाकिस्तान की सेना नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने में असफल रही।
इसके अनुसार, पाकिस्तान ने 16 मार्च को “ऑपरेशन गजब लिल हक” के तहत काबुल और नंगरहार में हवाई हमले किए। इन हमलों में काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को निशाना बनाया गया। यह केंद्र 2016 में कैंप फीनिक्स की जगह पर स्थापित किया गया था, जो कभी अमेरिका और नाटो का सैन्य अड्डा हुआ करता था और अफगान राजधानी के बाहरी हिस्से में स्थित है।
यह पुनर्वास केंद्र और इसके जुड़े अन्य परिसर करीब 2,000 लोगों के ठहरने की क्षमता रखते थे। मानवाधिकार संगठन ने अफगान अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस हमले में 400 से ज्यादा नागरिकों की जान गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए।
इसाबेल लासी ने कहा कि भले ही कुल मृतकों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस हमले में सैकड़ों नागरिकों की मौत हुई है।
उन्होंने कहा, “यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि पूर्व नाटो कैंप फीनिक्स का अधिकांश हिस्सा 2016 से नशामुक्ति पुनर्वास केंद्र के रूप में कार्य कर रहा था। पाकिस्तान की सेना को इस हमले से पहले नागरिकों और नागरिक स्थलों को बचाने के लिए हर संभव सावधानी बरतनी चाहिए थी। किसी भी उचित जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो जाता कि वहां बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।”
इसाबेल ने कहा कि भले ही कैंप के बड़े हिस्से में कहीं गोला-बारूद का भंडार हो, फिर भी पाकिस्तान की सेना को हमला करने से पहले यह आकलन करना चाहिए था कि इससे नागरिकों को कितना अधिक नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले में हुई मौतों की संख्या और तबाही का स्तर यह सवाल उठाता है कि क्या पाकिस्तान की सेना ने हमले से पहले सही आकलन किया था और क्या उसने नागरिकों को नुकसान कम से कम करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए थे।
इसाबेल लासी ने कहा कि अब पाकिस्तानी अधिकारियों को बताना चाहिए कि उन्होंने किस जानकारी के आधार पर कार्रवाई की और उसकी पुष्टि के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके साथ ही, इस हमले और उससे हुई नागरिक हानि की परिस्थितियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए, और उसके परिणामों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सख्ती से पालन करने और नागरिकों तथा नागरिक संरचनाओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। इसमें अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।