श्रीलंका: महिंदा राजपक्षे और पियंकारा जयरत्ने पर एयरबस डील भ्रष्टाचार का आरोप, 12 मई को CIABOC ने किया तलब
सारांश
Key Takeaways
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री एवं सांसद प्रियंकारा जयरत्ने को कमिशन टू इन्वेस्टिगेट एलिगेशंस ऑफ ब्राइबरी ऑर करप्शन (CIABOC) ने 12 मई को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है। न्यूजवायरएलके और अडाडेराना के अनुसार, यह समन श्रीलंकाई एयरलाइंस की एक प्रमुख एयरबस विमान खरीद डील में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब श्रीलंका में 2024 में नया भ्रष्टाचार-विरोधी कानून लागू होने के बाद जवाबदेही की प्रक्रिया को नई गति मिली है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
न्यूजफर्स्ट और तमिल गार्जियन के अनुसार, श्रीलंकाई एयरलाइंस के एक पूर्व सीईओ ने आरोप लगाया है कि एयरबस डील से प्राप्त धनराशि में से 6 करोड़ रुपए किश्तों में पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को दिए गए, जबकि पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रियंकारा जयरत्ने को 2 करोड़ रुपए की कथित रकम दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इन फंड्स को कथित तौर पर ब्रुनेई की एक शेल कंपनी और सिंगापुर के बैंक खाते के ज़रिए भेजा गया था।
गौरतलब है कि यह मामला श्रीलंकाई एयरलाइंस की पूर्व सीईओ कपिला चंद्रसेना के खिलाफ चल रहे बड़े भ्रष्टाचार मामले से भी जुड़ा हुआ है। CIABOC ने 2024 में नए एंटी-करप्शन कानून के लागू होने के बाद इस एयरबस केस को पुनः सक्रिय किया है।
आरोपों की प्रकृति और जांच का दायरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, समन उन मामलों से संबंधित है जिनमें कथित तौर पर पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों का विस्तृत ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। आयोग दस्तावेजों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगा।
यह ऐसी पहली बार नहीं है जब महिंदा राजपक्षे किसी जांच के दायरे में आए हों — उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लिए गए कई आर्थिक और प्रशासनिक फैसले पहले भी विवादों में रहे हैं।
श्रीलंका में भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों का संदर्भ
श्रीलंका 2022 की ऐतिहासिक आर्थिक संकट के बाद से पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहा है। IMF की शर्तों और जनता के दबाव के बीच, वर्तमान सरकार ने 2024 में एक सशक्त भ्रष्टाचार-विरोधी कानून लागू किया, जिसके तहत CIABOC को अधिक स्वायत्तता और जांच अधिकार दिए गए। यह मामला उसी नए ढाँचे के तहत पुनः खोला गया है।
आगे क्या होगा
दोनों नेताओं को 12 मई को CIABOC के समक्ष उपस्थित होकर बयान दर्ज कराना है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो दोनों के खिलाफ औपचारिक कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। यह घटनाक्रम श्रीलंका के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहाँ शक्तिशाली राजनीतिक हस्तियों को जवाबदेह ठहराने की प्रक्रिया अभी भी परीक्षण के दौर में है।