दक्षिण लेबनान में IDF की गोलाबारी तेज, टायर जिले के 12 कस्बों-गाँवों को खाली करने का आदेश
सारांश
Key Takeaways
इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने 3 मई 2026 को दक्षिणी लेबनान के टायर जिले में कई स्थानों पर तोपों से गोलाबारी की। इससे पहले इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के 12 कस्बों और गाँवों के निवासियों को चेतावनी जारी कर तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया था। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए (नेशनल न्यूज एजेंसी) के अनुसार, यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन का हिस्सा बताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
एनएनए ने बताया कि IDF की तोपों ने फ्रून और घंदूरियेह नगरपालिकाओं के साथ-साथ अल-मंसूरी, कलाइला और माजदल जौन की पहाड़ियों के बाहरी क्षेत्रों को निशाना बनाया। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार गोलाबारी के कारण इन इलाकों में दहशत का माहौल है और नागरिक सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अब तक किसी के हताहत होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
निकासी आदेश और सैन्य तैयारी
IDF ने निवासियों को निर्देश दिया कि वे अपने घरों से कम से कम 1,000 मीटर दूर खुले इलाकों में चले जाएँ। रविवार को जारी खाली करने के आदेश में शामिल तीन कस्बों को कथित तौर पर पहले ही सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ा। दक्षिण लेबनान में इजरायल के पाँच डिवीजन तैनात हैं, जो बड़े पैमाने पर बमबारी और संरचनाओं को ध्वस्त करने की कार्रवाई में लगे हैं।
सीजफायर के बावजूद हमले जारी
गौरतलब है कि अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच एक सीजफायर समझौता हुआ था, जो अप्रैल के मध्य में लागू हुआ था और अब उसे मई के मध्य तक बढ़ा दिया गया है। हालाँकि इस दौरान भी जमीनी कार्रवाई रुक-रुककर जारी रही है। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थायी युद्धविराम की माँग कर रहा है।
आम नागरिकों पर असर
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, गोलाबारी प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों नागरिक विस्थापन की मार झेल रहे हैं। घरों और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचने की खबरें हैं, हालाँकि आधिकारिक आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। मानवाधिकार संगठन इस क्षेत्र में नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
आगे क्या होगा
सीजफायर की मियाद मई के मध्य तक है और इसके नवीनीकरण पर अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि IDF की कार्रवाई इसी रफ्तार से जारी रही तो क्षेत्रीय तनाव और गहरा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक पहल ही इस संकट का दीर्घकालिक समाधान निकाल सकती हैं।