वित्त मंत्रालय का DRT से आग्रह: बकाया ऋण मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाएं

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वित्त मंत्रालय का DRT से आग्रह: बकाया ऋण मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाएं

सारांश

वित्त मंत्रालय ने DRT को उच्च प्रदर्शन वाले ट्रिब्यूनलों की सर्वोत्तम प्रथाएँ अपनाने का निर्देश दिया है। लोक अदालत, प्रक्रियात्मक सुधार और मध्यस्थता प्रशिक्षण के ज़रिए बकाया ऋण मामलों की वसूली में तेज़ी लाने की कोशिश — बैंकिंग क्षेत्र की NPA चुनौती से सीधे जुड़ा कदम।

Key Takeaways

वित्त मंत्रालय ने 3 मई 2026 को नई दिल्ली में DRT के साथ बैठक कर बकाया ऋण मामलों के त्वरित निपटारे पर जोर दिया। उच्च प्रदर्शन करने वाले DRT की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता देने और लोक अदालतों के उपयोग पर चर्चा हुई। लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बाद DRT की मासिक निपटान दरों में उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले सितंबर में DFS और सर्वोच्च न्यायालय की MCPC के सहयोग से मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण में DRT पीठासीन अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को ADR तकनीकों से परिचित कराया गया।

वित्त मंत्रालय ने 3 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) से आग्रह किया कि वे ऋण से जुड़े बकाया मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उच्च प्रदर्शन करने वाले DRT द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाएं। सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बैठक मामलों के निपटारे की गति को तेज़ करने और वसूली परिणामों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।

बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु

वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इनमें बैंकों के भीतर निरीक्षण और निगरानी तंत्र को मजबूत करना प्रमुख था। इसके साथ ही, अच्छे वसूली परिणामों के लिए उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में लोक अदालतों को विवाद समाधान के एक प्रभावी वैकल्पिक माध्यम के रूप में उपयोग करने की बात भी हुई, जिससे DRT के ज़रिए वसूली को और बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, त्वरित निपटान के तंत्र, प्रक्रियात्मक सुधार और व्यापक क्षमता निर्माण पहलों पर भी गहन चर्चा की गई।

मासिक निपटान दरों में उत्साहजनक वृद्धि

वित्त मंत्रालय ने बताया कि लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर नए सिरे से ध्यान देने के परिणामस्वरूप DRT की मासिक निपटान दरों में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई है। गौरतलब है कि यह सुधार पिछले कुछ महीनों में किए गए क्षमता निर्माण प्रयासों का सीधा परिणाम बताया जा रहा है।

मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम की भूमिका

पिछले सितंबर में, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (MCPC) के सहयोग से एक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में DRT के पीठासीन अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मध्यस्थता की अवधारणा, पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं पर इसके लाभ, और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) के अन्य तरीकों से परिचित कराया गया। सत्रों में मध्यस्थता के चरण, मध्यस्थों की भूमिका, संचार तकनीक और बातचीत एवं सौदेबाजी की रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।

मंत्रालय ने कहा,

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि 'सर्वोत्तम प्रथाओं' को अपनाने का आग्रह कितना बाध्यकारी होगा। भारत में ऋण वसूली ट्रिब्यूनल वर्षों से मामलों के बोझ तले दबे हैं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से मासिक निपटान दरें बढ़ना उत्साहजनक है, परंतु NPA की विशालता के सामने यह पर्याप्त नहीं। जब तक DRT में रिक्त पदों की भर्ती, डिजिटल अवसंरचना और प्रक्रियात्मक सुधारों को एक साथ लागू नहीं किया जाता, तब तक 'आग्रह' और 'बैठकें' सीमित परिणाम ही देंगी।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) क्या है?
DRT यानी ऋण वसूली अधिकरण एक विशेष न्यायिक निकाय है जो बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के ऋण वसूली से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है। यह SARFAESI अधिनियम और ऋण वसूली अधिनियम के तहत स्थापित है और देशभर में कई DRT कार्यरत हैं।
वित्त मंत्रालय ने DRT को क्या निर्देश दिए हैं?
वित्त मंत्रालय ने DRT से आग्रह किया है कि वे उच्च प्रदर्शन करने वाले ट्रिब्यूनलों की सर्वोत्तम प्रथाएँ अपनाएं, उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता दें और लोक अदालतों का उपयोग वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए करें। बैंकों के भीतर निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्या सिखाया गया?
पिछले सितंबर में आयोजित इस कार्यक्रम में DRT पीठासीन अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को मध्यस्थता की अवधारणा, ADR तकनीकें, संचार के तरीके और बातचीत एवं सौदेबाजी की रणनीतियाँ सिखाई गईं। यह कार्यक्रम DFS और सर्वोच्च न्यायालय की MCPC के सहयोग से आयोजित किया गया था।
DRT की मासिक निपटान दरों में सुधार क्यों महत्वपूर्ण है?
DRT की बेहतर निपटान दर सीधे बैंकों की NPA वसूली और वित्तीय सेहत को प्रभावित करती है। जितनी तेज़ी से ऋण मामले सुलझेंगे, उतनी ही जल्दी बैंक उस पूँजी को नए ऋण के रूप में अर्थव्यवस्था में लगा सकेंगे, जिससे समग्र ऋण प्रवाह बेहतर होगा।
लोक अदालत DRT मामलों में कैसे मदद कर सकती है?
लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद समाधान मंच है जहाँ दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामला सुलझा सकते हैं। DRT मामलों में लोक अदालत का उपयोग करने से न्यायिक बोझ कम होता है, मामले तेज़ी से निपटते हैं और दोनों पक्षों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है।
Nation Press