सरकार ने निर्यातकों के लिए व्यापार सुगमता के लिए नई पहलों की शुरुआत की

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सरकार ने निर्यातकों के लिए व्यापार सुगमता के लिए नई पहलों की शुरुआत की

सारांश

सरकार ने निर्यातकों के लिए व्यापार को सरल बनाने के लिए नई पहलों की शुरुआत की है, जिससे प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम किया जा सके। यह सुधार व्यापार की पारदर्शिता बढ़ाने और त्वरित अनुमोदन सुनिश्चित करने के लिए हैं।

Key Takeaways

  • सरकार की पहल से निर्यातकों के लिए व्यापार सुगमता बढ़ेगी।
  • मानदंड समितियों में सुधार प्रक्रिया को तेज करेगा।
  • लघु एवं मध्यम उद्यमों को विशेष लाभ होगा।
  • पारदर्शिता और पूर्वानुमानशीलता में वृद्धि होगी।
  • विभिन्न मंत्रालयों से तकनीकी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई है।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने निर्यातकों के लिए व्यापार को सरल बनाने के लिए फिर से अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। इस दिशा में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के तहत मानक समितियों के कार्यों में सुधार लाने के लिए एक श्रृंखला की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत प्रक्रिया के समय को कम करना, त्वरित अनुमोदन प्राप्त करना और पारदर्शिता एवं पूर्वानुमानशीलता को बढ़ाना है। यह जानकारी शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में साझा की गई है।

इन सुधारों में मानदंड समितियों (एनसी) के कार्य में एकरूपता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करना शामिल है। इसमें निश्चित पाक्षिक चक्र पर बैठकों का निर्धारण, लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता देना, समयबद्ध तरीके से बैठक के कार्यवृत्त को अंतिम रूप देना और लंबित मामलों की व्यवस्थित निगरानी करना शामिल है। बयान में यह भी कहा गया है कि बार-बार होने वाली स्वीकृतियों को कम करने के लिए, बार-बार आने वाले मामलों की पहचान कर उन्हें मानक इनपुट-आउटपुट मानदंडों (एसआईओएन) में परिवर्तित करने के प्रयास किए गए हैं।

संबंधित मंत्रालयों से समितियों में अतिरिक्त तकनीकी अधिकारियों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है, ताकि क्षेत्रीय विशेषज्ञता को बढ़ाया जा सके और सदस्यों के सीमित समूह पर निर्भरता को कम किया जा सके। इसके साथ ही, लंबित आवेदनों के त्वरित निपटान के लिए एक विशेष अभियान आरंभ किया गया है, जिसके तहत नियमित समय पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं और पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मामलों का कालानुक्रमिक क्रम में निपटारा किया जा रहा है।

क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से, विभिन्न मंत्रालयों से दस अतिरिक्त तकनीकी सदस्यों को मनोनीत किया गया है, जिससे तकनीकी प्राधिकारियों की कुल संख्या 12 से बढ़कर 22 हो गई है। इससे समितियों की अधिक संख्या में मामलों को बेहतर दक्षता के साथ संभालने की क्षमता मजबूत हुई है।

इन सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 के बीच, मानक समितियों की कुल 38 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 3,925 मामलों पर विचार किया गया और 1,770 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

ये कदम सरकार के सुगम और पूर्वानुमानित व्यापार वातावरण बनाने के उद्देश्यों के अनुरूप हैं, खासकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए। मानक निर्धारण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया से लेनदेन लागत में कमी, प्राधिकरण की समय सीमा में कमी और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होने की संभावना है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि सरकार निर्यातकों के लिए व्यापार को सुगम बनाने के लिए गंभीर है। यह सुधार लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित होंगे, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

सरकार ने व्यापार सुगमता के लिए कौन से सुधार किए हैं?
सरकार ने मानदंड समितियों के कार्यों में सुधार लाने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे प्रक्रिया का समय कम होगा और त्वरित अनुमोदन सुनिश्चित होगा।
इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाना, समय की बचत करना और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।
कितनी बैठकें आयोजित की गई हैं?
जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 के बीच, मानक समितियों की कुल 38 बैठकें आयोजित की गईं।
इन सुधारों का लाभ किसे होगा?
इन सुधारों का लाभ विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को होगा।
क्या इन सुधारों से व्यापार की लागत में कमी आएगी?
हाँ, इन सुधारों से लेनदेन लागत में कमी आने की उम्मीद है।
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