अमेरिकी दूत सर्गियो गोर का नेपाल दौरा 'सार्थक', पीएम बालेन्द्र शाह से मुलाकात नहीं हो सकी

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अमेरिकी दूत सर्गियो गोर का नेपाल दौरा 'सार्थक', पीएम बालेन्द्र शाह से मुलाकात नहीं हो सकी

सारांश

अमेरिकी विशेष दूत सर्गियो गोर नेपाल की नई सरकार बनने के बाद वहाँ पहुँचने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक रहे — लेकिन प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से मुलाकात नहीं हो सकी। यह चूक राजनयिक हलकों में सवाल उठा रही है कि नेपाल की नई सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को किस प्राथमिकता पर रखती है।

Key Takeaways

सर्गियो गोर ने 3 मई 2025 को नेपाल यात्रा समाप्त की और इसे "सार्थक" बताया। अमेरिकी अनुरोध के बावजूद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह घरेलू प्राथमिकताओं के कारण गोर से नहीं मिले। गोर ने रवि लामिछाने , विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से उच्चस्तरीय बैठकें कीं। यात्रा का मुख्य फोकस नेपाल के टेक सेक्टर में अमेरिकी निवेश और व्यापारिक सहयोग पर था। गोर 27 मार्च 2025 को नई सरकार बनने के बाद नेपाल आने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक हैं। अमेरिका ने अक्षोभ्य बुद्ध प्रतिमा सहित सांस्कृतिक धरोहर लौटाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्गियो गोर ने 3 मई 2025 को काठमांडू में अपनी यात्रा समाप्त की और इसे "सार्थक" करार दिया। हालाँकि, अमेरिकी पक्ष के अनुरोध के बावजूद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह घरेलू प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए उनसे नहीं मिल सके। गोर इस नई सरकार के गठन के बाद नेपाल का दौरा करने वाले अब तक के सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक हैं।

मुख्य बैठकें और घटनाक्रम

इस यात्रा के दौरान गोर ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने, विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, उन्होंने नेपाल के प्रमुख उद्यमियों के साथ भी विचार-विमर्श किया।

शनिवार की सुबह गोर ने लामिछाने से मुलाकात कर अमेरिका–नेपाल साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि नेपाल की नई सरकार के पास "परिवर्तन के लिए शानदार जनादेश" है और उसके सुधारों की दिशा सकारात्मक है।

पीएम शाह से मुलाकात क्यों नहीं हो सकी

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गोर के बीच बैठक का औपचारिक अनुरोध किया था, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि घरेलू प्राथमिकताओं और शासन संबंधी मुद्दों के कारण यह संभव नहीं हो सका। कुछ मंत्रियों — विशेषकर विदेश मंत्रालय से जुड़े — ने प्रधानमंत्री को गोर से मिलने की सलाह दी थी, परंतु शाह ने अपना प्रोटोकॉल बनाए रखा। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वे एक वर्ष तक विदेश यात्रा नहीं करेंगे और केवल चुनिंदा देशों के विदेश मंत्रियों से ही मुलाकात करेंगे।

व्यापार और निवेश पर फोकस

अमेरिकी दूतावास के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका–नेपाल संबंधों को और प्रगाढ़ करना और व्यापारिक सहयोग बढ़ाना था। गोर का विशेष ध्यान नेपाल के उभरते टेक सेक्टर में अमेरिकी निवेश के अवसरों पर था। शुक्रवार को उन्होंने खनाल और वाग्ले से मिलकर व्यापारिक माहौल सुधारने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की।

एवरेस्ट बेस कैंप और सांस्कृतिक विरासत

गोर ने एवरेस्ट बेस कैंप का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें अमेरिकी ड्रोन तकनीक और माउंट एवरेस्ट की सफाई के प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इस नई ड्रोन तकनीक से कुछ ही मिनटों में डिलीवरी संभव हो सकती है, जो पहले कई दिनों में होती थी। इसके अलावा, उन्होंने काठमांडू के न्हू छेन बहा में अक्षोभ्य बुद्ध की प्रतिमा की वापसी समारोह में भाग लिया, जहाँ अमेरिका ने नेपाल को सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर लौटाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। गोर ने भक्तपुर दरबार स्क्वायर का भी भ्रमण किया।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब 27 मार्च 2025 को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार बनी है और नेपाल अपनी विदेश नीति की दिशा तय कर रहा है। प्रधानमंत्री शाह का अमेरिकी दूत से न मिलना राजनयिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले महीनों में अमेरिका–नेपाल व्यापार और निवेश संबंधों की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Point of View

बल्कि एक सोची-समझी संकेत भाषा है। नेपाल की नई सरकार का यह रुख — जो विदेश यात्रा और चुनिंदा राजनयिक मुलाकातों तक खुद को सीमित रखने का दावा करती है — भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की पुरानी नेपाली रणनीति से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्रवादी छवि बनाने का प्रयास लगता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे प्रमुख साझेदार के साथ इस तरह का दूरी-भरा रवैया दीर्घकालिक निवेश और सहायता संबंधों पर असर डाल सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह प्रोटोकॉल सिद्धांत पर आधारित है या केवल घरेलू राजनीति की सुविधा के अनुसार लागू होता है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

सर्गियो गोर कौन हैं और वे नेपाल क्यों गए?
सर्गियो गोर अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत और भारत में अमेरिकी एंबेसडर हैं। वे अमेरिका–नेपाल संबंधों को मजबूत करने, व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और नेपाल के टेक सेक्टर में निवेश के अवसर तलाशने के उद्देश्य से काठमांडू आए थे।
पीएम बालेन्द्र शाह ने अमेरिकी दूत से मिलने से क्यों मना किया?
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, घरेलू प्राथमिकताओं और शासन संबंधी मुद्दों के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो सकी। उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि वे एक वर्ष तक विदेश यात्रा नहीं करेंगे और केवल चुनिंदा देशों के विदेश मंत्रियों से ही मिलेंगे।
गोर ने नेपाल में किन नेताओं से मुलाकात की?
गोर ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने, विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इसके अलावा उन्होंने नेपाल के प्रमुख उद्यमियों से भी चर्चा की।
इस यात्रा में अमेरिका ने कौन-सी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता दोहराई?
अमेरिका ने काठमांडू के न्हू छेन बहा में अक्षोभ्य बुद्ध की प्रतिमा की वापसी समारोह में भाग लेकर नेपाल को सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर लौटाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
नेपाल की नई सरकार कब बनी और गोर की यात्रा का क्या महत्व है?
27 मार्च 2025 को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। गोर इस सरकार के गठन के बाद नेपाल पहुँचने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक हैं, जो अमेरिका की नई नेपाली सरकार के साथ शीघ्र संबंध स्थापित करने की प्राथमिकता दर्शाता है।
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