नेपाल: राष्ट्रपति पौडेल ने 1,594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कीं, PM बालेंद्र शाह के आदेश पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
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सारांश
नेपाल में PM बालेंद्र शाह की सरकार ने एक झटके में 1,594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कर दीं — संसद सत्र स्थगित कर अध्यादेश का रास्ता साफ किया गया। पूर्व PM ओली, देउबा और दहल मनी लॉन्ड्रिंग जांच के घेरे में हैं। यह नेपाल के राजनीतिक इतिहास का सबसे तेज और आक्रामक सत्ता-परिवर्तन माना जा रहा है।
Key Takeaways
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने 3 मई 2026 को अध्यादेश जारी कर 1,594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कीं। अध्यादेश के तहत 26 मार्च 2026 से पहले की सभी नियुक्तियां स्वतः समाप्त मानी जाएंगी। विश्वविद्यालयों, सरकारी कंपनियों, बोर्ड्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट और मीडिया संगठनों के अधिकारी प्रभावित। पूर्व PM केपी शर्मा ओली , शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में। RSP ने 5 मार्च 2026 के चुनावों में निचले सदन में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था।
नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने 3 मई 2026 को एक अध्यादेश जारी करते हुए पिछले वर्ष की गई 1,594 राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया। यह कदम प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली कैबिनेट की सिफारिश पर उठाया गया, जो 5 मार्च 2026 के चुनावों के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में आई है। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, इस फैसले को हाल के वर्षों के सबसे बड़े प्रशासनिक बदलावों में से एक बताया जा रहा है।
अध्यादेश में क्या है
Point of View
बल्कि नेपाल की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है — संसद सत्र स्थगित कर अध्यादेश का रास्ता साफ करना यह बताता है कि सरकार विधायी बाधाओं को दरकिनार करने में संकोच नहीं करती। 1,594 नियुक्तियां एक साथ रद्द करने से सैकड़ों संस्थान नेतृत्वहीन हो गए हैं — यह शासन-व्यवस्था के लिए तात्कालिक जोखिम है। ओली, देउबा और दहल जैसे दिग्गजों पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच यह संकेत देती है कि RSP पुरानी पार्टियों को कानूनी दबाव में रखना चाहती है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तविक सुधार है या सत्ता को केंद्रीकृत करने की रणनीति।
NationPress
03/05/2026
Frequently Asked Questions
नेपाल में 1,594 राजनीतिक नियुक्तियां क्यों रद्द की गईं?
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने एक अध्यादेश जारी किया, जिसके तहत 26 मार्च 2026 से पहले की सभी राजनीतिक नियुक्तियां स्वतः समाप्त मानी जाएंगी। यह कदम RSP सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह कौन हैं?
बालेंद्र शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें 26 मार्च 2026 को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। उनकी पार्टी ने 5 मार्च 2026 के चुनावों में प्रतिनिधिसभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था।
इस अध्यादेश से कौन-कौन से संस्थान प्रभावित हुए हैं?
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, विश्वविद्यालयों, सरकारी कंपनियों, नियंत्रक इकाइयों, परिषदों, बोर्ड्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट और मीडिया संगठनों के अधिकारियों को पद से हटाया गया है। इससे कई संस्थान बिना नेतृत्व के रह गए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्रियों पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच क्यों हो रही है?
नई सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में संशोधन के लिए एक अलग अध्यादेश जारी किया है, जिसका उद्देश्य सत्ता में रहे लोगों पर आसानी से मुकदमा चलाना है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल इस जांच के दायरे में हैं।
नेपाल में संसद सत्र क्यों स्थगित किया गया?
राष्ट्रपति पौडेल ने सरकार की सिफारिश पर 30 अप्रैल 2026 को बुलाए गए संसद सत्र को स्थगित कर दिया, जिससे सरकार को अध्यादेश जारी करने का संवैधानिक रास्ता मिल गया। संसद सत्र के दौरान अध्यादेश जारी नहीं किए जा सकते।