हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के बीच ओपेक प्लस ने जून के लिए 1.88 लाख बैरल/दिन उत्पादन बढ़ाया, कुवैत का निर्यात शून्य

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हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के बीच ओपेक प्लस ने जून के लिए 1.88 लाख बैरल/दिन उत्पादन बढ़ाया, कुवैत का निर्यात शून्य

सारांश

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बावजूद ओपेक प्लस ने जून के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया — लेकिन यह वृद्धि ज़्यादातर कागज़ी है। कुवैत ने अप्रैल में शून्य बैरल निर्यात किया, यूएई कार्टेल से बाहर हो गया, और खाड़ी देशों का निर्यात ठप है। यह 1991 के बाद का सबसे गंभीर तेल संकट है।

Key Takeaways

ओपेक प्लस के सात सदस्यों ने जून 2026 के लिए 1.88 लाख बैरल प्रति दिन उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई — यह लगातार तीसरी मासिक वृद्धि है। हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण वृद्धि व्यावहारिक रूप से सांकेतिक रहने की आशंका है। कुवैत ने अप्रैल 2026 में कच्चे तेल का शून्य बैरल निर्यात किया — 1991 में इराकी कब्जे के बाद पहली बार। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने फोर्स मेज्योर घोषित किया; लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन प्रभावित। यूएई ने ओपेक प्लस से अलग होने की घोषणा की; उसकी ओपेक निर्यात में हिस्सेदारी लगभग 15% है। मार्च 2026 में ओपेक प्लस का औसत उत्पादन 3.506 करोड़ बैरल/दिन रहा, जो फरवरी से 7.70 लाख बैरल/दिन कम था।

पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच ओपेक प्लस के सात सदस्य देशों ने जून 2026 के लिए कच्चे तेल का उत्पादन 1.88 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह लगातार तीसरी मासिक वृद्धि है, जो ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद है और फारस की खाड़ी के देशों का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

उत्पादन वृद्धि का निर्णय और उसकी सीमाएँ

कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सात ओपेक प्लस देशों ने यह उत्पादन वृद्धि तय की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय काफी हद तक सांकेतिक ही रहेगा। इसकी वजह यह है कि हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के चलते खाड़ी देशों के लिए वास्तविक निर्यात करना संभव नहीं हो पा रहा। मार्च 2026 में समस्त ओपेक प्लस सदस्यों का औसत उत्पादन 3.506 करोड़ बैरल प्रति दिन रहा, जो फरवरी की तुलना में 7.70 लाख बैरल प्रति दिन कम था।

यूएई का ओपेक प्लस से अलग होना: बड़ा झटका

पिछले सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओपेक और ओपेक प्लस कार्टेल से औपचारिक रूप से अलग होने की घोषणा की। यूएई ने कहा कि यह कदम उसकी

Point of View

बल्कि ओपेक के उस ढाँचे पर सवाल है जो दशकों से वैश्विक तेल कीमतें तय करता आया है। कुवैत का 1991 के बाद पहली बार शून्य निर्यात यह बताता है कि यह संकट कितना असाधारण है — और भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती अब और गहरी हो गई है। बिना किसी कूटनीतिक समाधान के, उत्पादन बढ़ाने के कागज़ी फैसले वैश्विक बाज़ार में कोई राहत नहीं दे सकते।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

ओपेक प्लस ने जून 2026 के लिए कितना उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया?
सात ओपेक प्लस सदस्य देशों ने जून 2026 के लिए कच्चे तेल का उत्पादन 1.88 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह लगातार तीसरी मासिक वृद्धि है, हालांकि हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण यह वृद्धि व्यावहारिक रूप से सांकेतिक मानी जा रही है।
कुवैत का कच्चा तेल निर्यात शून्य क्यों हो गया?
हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण कुवैत ने अप्रैल 2026 में कच्चे तेल का शून्य बैरल निर्यात किया — यह 1991 में इराकी कब्जे के बाद पहली बार हुआ है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने फोर्स मेज्योर घोषित किया, जिससे लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन प्रभावित हुआ।
यूएई ने ओपेक प्लस क्यों छोड़ा और इसका क्या असर होगा?
यूएई ने कहा कि उसका यह निर्णय अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि तथा विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफाइल को दर्शाता है। चूँकि ओपेक के तेल निर्यात में यूएई की हिस्सेदारी लगभग 15% है, इसलिए इसके बाहर निकलने से कार्टेल के कमजोर होने की आशंका है।
हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी का वैश्विक तेल बाज़ार पर क्या असर पड़ रहा है?
ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने से फारस की खाड़ी के देशों का निर्यात लगभग ठप हो गया है। कुवैत जैसे देशों का निर्यात शून्य हो गया है और ईरान के खुद के निर्यात में भी भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर दबाव बन रहा है।
ओपेक प्लस में अभी कितने सदस्य देश हैं?
यूएई के अलग होने के बाद ओपेक प्लस में ईरान सहित 21 सदस्य देश रह गए हैं। हालांकि, मासिक उत्पादन निर्णयों में केवल सात देशों की ही सक्रिय भागीदारी रही है।
Nation Press